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सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर से परिचित को अस्पताल में भर्ती कराने की बात कहकर एक लाख रुपये की ठगी
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Cheating of one lakh rupees by saying that an acquaintance of a retired brigadier should be admitted to the hospital
फरीदाबाद। साइबर ठगों ने सेक्टर-17 निवासी एक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर से एक लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-17 निवासी सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सतींद्र नाथ सेतिया (73) ने पुलिस को ई-मेल के माध्यम से शिकायत दी कि एक नवंबर सुबह करीब नौ बजे उन्हें दीपक मेहता के नाम का एक ई-मेल मिला।
उन्होंने मेल का जवाब दे दिया। इसके बाद करीब ग्यारह बजे उसी आईडी से एक और ई-मेल मिला। मेल में लिखा था कि उनके दोस्त की पत्नी अरुणिमा की सर्जरी के लिए एक लाख रुपये की जरूरत है। आरोपी ने मेल में एक फोटो भी भेज रखी थी। जिसमें अस्पताल में एक मरीज को एडमिट दिखाया गया था। दो नवंबर को ब्रिगेडियर ने मेल का जवाब दिया कि उन्होंने नेट बैंकिंग नहीं ले रखी है। इस पर आरोपी ने एक बैंक खाता नंबर भेज कर उसमें रुपये जमा करवाने को कहा। आरोपी ने जो खाता भेजा था, वह नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक की शाखा का था।
ब्रिगेडियर को लगा कि उनके दोस्त को मुसीबत में जरूरत है। वे 1965 से कैप्टन दीपक मेहता को जानते थे। मेल भेजने वाले ने खुद को दीपक मेहता का भतीजा माधव कुमार झा बताया था। उन्होंने खाते में राशि जमा करवा दी। रुपये मिलने के बाद आरोपी ने एक और मेल भेजा और कहा कि बाईपास सर्जरी के बाद उन्हें ब्लड की जरूरत है। इसके लिए 30 हजार 800 रुपये चाहिए। इस पर उन्हें शक हुआ। उन्होंने अपने दोस्त कैप्टन दीपक मेहता को फोन किया और हालचाल पूछा। सब ठीक होने पर उन्होंने मेल के बारे में बताया। कैप्टन ने बताया कि वे किसी माधव को नहीं जानते। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
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उन्होंने मेल का जवाब दे दिया। इसके बाद करीब ग्यारह बजे उसी आईडी से एक और ई-मेल मिला। मेल में लिखा था कि उनके दोस्त की पत्नी अरुणिमा की सर्जरी के लिए एक लाख रुपये की जरूरत है। आरोपी ने मेल में एक फोटो भी भेज रखी थी। जिसमें अस्पताल में एक मरीज को एडमिट दिखाया गया था। दो नवंबर को ब्रिगेडियर ने मेल का जवाब दिया कि उन्होंने नेट बैंकिंग नहीं ले रखी है। इस पर आरोपी ने एक बैंक खाता नंबर भेज कर उसमें रुपये जमा करवाने को कहा। आरोपी ने जो खाता भेजा था, वह नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक की शाखा का था।
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ब्रिगेडियर को लगा कि उनके दोस्त को मुसीबत में जरूरत है। वे 1965 से कैप्टन दीपक मेहता को जानते थे। मेल भेजने वाले ने खुद को दीपक मेहता का भतीजा माधव कुमार झा बताया था। उन्होंने खाते में राशि जमा करवा दी। रुपये मिलने के बाद आरोपी ने एक और मेल भेजा और कहा कि बाईपास सर्जरी के बाद उन्हें ब्लड की जरूरत है। इसके लिए 30 हजार 800 रुपये चाहिए। इस पर उन्हें शक हुआ। उन्होंने अपने दोस्त कैप्टन दीपक मेहता को फोन किया और हालचाल पूछा। सब ठीक होने पर उन्होंने मेल के बारे में बताया। कैप्टन ने बताया कि वे किसी माधव को नहीं जानते। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
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