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चमोली आपदा में एसी नगर के शेषनाथ की मौत
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फरीदाबाद। उत्तराखंड के चमोली में आई प्राकृतिक आपदा में एसी नगर निवासी 52 वर्षीय शेषनाथ की मौत हो गई है। वह बल्लभगढ़ स्थित एक जेनरेटर कंपनी में काम करते थे। वे कंपनी के काम से ही उत्तराखंड गए हुए थे।
एसी नगर एफ ब्लॉक निवासी शेषनाथ का परिवार जल त्रासदी के बाद से उनके सकुशल लौटने की उम्मीद में था। सात दिन परिवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में रविवार को परिवार उत्तराखंड के लिए रवाना हो गया। परिवार आधे रास्ते ही पहुंचा कि उत्तराखंड प्रशासन से शेषनाथ की मौत की सूचना उन्हें मिली। मृतक के परिवार में उनकी पत्नी साधना, बेटी संतोषी (18) और बेटा आदर्श (16) शामिल हैं।
पड़ोसी अनिल बैंसला ने बताया कि शेषनाथ बल्लभगढ़ स्थित जनरेटर बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। फैक्ट्री के काम से वह तीन फरवरी को उत्तराखंड ऋषिगंगा गए थे। सात फरवरी को वहां ग्लेशियर फटने से प्राकृतिक आपदा आ गई। अन्य लोगों के साथ ही शेषनाथ भी लापता हो गए थे। उनका कोई सुराग नहीं लगा तो पत्नी साधना की हिम्मत जवाब देने लगी। अनिल ने बताया कि रविवार को फैक्ट्री प्रबंधन ने परिवार के उत्तराखंड जाने का इंतजाम किया। रास्ते में ही परिवार को शेषनाथ का शव मिलने की सूचना मिल गई।
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एक अन्य पड़ोसी दयाशंकर ने बताया कि शेषनाथ बेहद मिलनसार स्वभाव के थे। फैक्ट्री के काम से दूर-दराज के क्षेत्रों में जाते रहते थे। वहां से अपने मोबाइल में फोटो लेकर साथियों को व्हाट्सएप पर भेजते थे। इस बार भी उन्होंने उत्तराखंड से फोटो भेजी थी। यह उनकी आखिरी फोटो थी। छह फरवरी को फोटो भेजने के बाद उन्होंने परिवार और दोस्तों से बात भी की थी। जल त्रासदी के बाद से किसी का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ।
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एसी नगर एफ ब्लॉक निवासी शेषनाथ का परिवार जल त्रासदी के बाद से उनके सकुशल लौटने की उम्मीद में था। सात दिन परिवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में रविवार को परिवार उत्तराखंड के लिए रवाना हो गया। परिवार आधे रास्ते ही पहुंचा कि उत्तराखंड प्रशासन से शेषनाथ की मौत की सूचना उन्हें मिली। मृतक के परिवार में उनकी पत्नी साधना, बेटी संतोषी (18) और बेटा आदर्श (16) शामिल हैं।
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पड़ोसी अनिल बैंसला ने बताया कि शेषनाथ बल्लभगढ़ स्थित जनरेटर बनाने की फैक्टरी में काम करते थे। फैक्ट्री के काम से वह तीन फरवरी को उत्तराखंड ऋषिगंगा गए थे। सात फरवरी को वहां ग्लेशियर फटने से प्राकृतिक आपदा आ गई। अन्य लोगों के साथ ही शेषनाथ भी लापता हो गए थे। उनका कोई सुराग नहीं लगा तो पत्नी साधना की हिम्मत जवाब देने लगी। अनिल ने बताया कि रविवार को फैक्ट्री प्रबंधन ने परिवार के उत्तराखंड जाने का इंतजाम किया। रास्ते में ही परिवार को शेषनाथ का शव मिलने की सूचना मिल गई।
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एक अन्य पड़ोसी दयाशंकर ने बताया कि शेषनाथ बेहद मिलनसार स्वभाव के थे। फैक्ट्री के काम से दूर-दराज के क्षेत्रों में जाते रहते थे। वहां से अपने मोबाइल में फोटो लेकर साथियों को व्हाट्सएप पर भेजते थे। इस बार भी उन्होंने उत्तराखंड से फोटो भेजी थी। यह उनकी आखिरी फोटो थी। छह फरवरी को फोटो भेजने के बाद उन्होंने परिवार और दोस्तों से बात भी की थी। जल त्रासदी के बाद से किसी का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ।