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Faridabad News: खामनेई की कथित मौत के विरोध में कैंडल मार्च
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-दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की इस्राइल और अमेरिकी स्ट्राइक में कथित मौत की खबरों के बीच नूंह में सोमवार देर शाम कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च नए बस अड्डा नूंह से शुरू होकर खेड़ला मोड़ स्थित शहीदी पार्क तक पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ।
कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हाथों में खामनई के पोस्टर ओर मोमबत्तियां लेकर शांति, एकजुटता और इंसाफ की मांग से जुड़े संदेश दिए। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा और प्रशासन की निगरानी में व्यवस्था बनाए रखी गई। वक्ताओं ने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर अपनी भावनाएं लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराना है। वक्ताओं ने धार्मिक एकता और आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए कहा कि फिरका परस्ती से ऊपर उठकर इंसानियत और न्याय की बात करना समय की जरूरत है। कैंडल मार्च में मुख्य रूप से हजरत परवान अलवर और मुब्बसी मेवाती सालाहेडी नूंह उपस्थित रहे। अंत में शहीदी पार्क में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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नूंह। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की इस्राइल और अमेरिकी स्ट्राइक में कथित मौत की खबरों के बीच नूंह में सोमवार देर शाम कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च नए बस अड्डा नूंह से शुरू होकर खेड़ला मोड़ स्थित शहीदी पार्क तक पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ।
कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हाथों में खामनई के पोस्टर ओर मोमबत्तियां लेकर शांति, एकजुटता और इंसाफ की मांग से जुड़े संदेश दिए। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा और प्रशासन की निगरानी में व्यवस्था बनाए रखी गई। वक्ताओं ने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर अपनी भावनाएं लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराना है। वक्ताओं ने धार्मिक एकता और आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए कहा कि फिरका परस्ती से ऊपर उठकर इंसानियत और न्याय की बात करना समय की जरूरत है। कैंडल मार्च में मुख्य रूप से हजरत परवान अलवर और मुब्बसी मेवाती सालाहेडी नूंह उपस्थित रहे। अंत में शहीदी पार्क में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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