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Faridabad News: बिजेन्द्र के पड़ोसियों के घर भी नहीं जला चूल्हा
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- महिपालपुर दिल्ली में कार लूट के दौरान हो गई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूर्या कॉलोनी सेहतपुर निवासी बिजेन्द्र गुप्ता की नई दिल्ली स्थित महिपालपुर में कार लूटने के दौरान घसीटकर हुई दर्दनाक मौत के बाद बृहस्पतिवार को भी उनके पड़ोसी सदमे में है। पड़ोसियों के दिल-दिमाग से बिजेन्द्र गुप्ता और उसके परिवार का प्रेम पूर्वक व्यवहार नहीं उतर रहा है। शाम को अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जला।
हालांकि बिजेन्द्र का पूरा परिवार फिलहाल गांव गया हुआ है और यहां पर कोई नहीं है। उसकी बड़ी बेटी सुनीता ने बारहवीं कक्षा में फरीदाबाद टॉपर थी, दिल्ली के देशबंधु कॉलेज में पढ़ रही हैं। बिजेन्द्र गुप्ता जिस मकान में किराए पर रहते थे उनके मालिक नरेन्द्र तिवारी ने भी कहा कि उनकी पत्नी सुगंधिता अपने बच्चों के साथ जब तक वो सक्षम नहीं हो जाती, बिना किराया दिए रह सकती हैं। इसके अतिरिक्त पड़ोसी भी उनके परिवार की हर तरह से मदद करने को तैयार हैं। पड़ोसी उसकी मौत से इतना दुखी थे कि जो 10-15 परिवार उनके बहुत नजदीकी थे, उनमें से किसी के घर चूल्हा नहीं जला। यहां रहने वाले सभी लोग 5 से 10 साल पुराने हैं, इसलिए सभी में बहुत अच्छी जान पहचान हो गई थी। कुछ पड़ोसी तो सदमे की वजह से काम पर नहीं गए हैं। उनके दिमाग से बिजेन्द्र गुप्ता का भोला-भाला चेहरा नहीं निकल पा रहा है। बिजेन्द्र गुप्ता के पड़ोसी नितिन ने बताया कि उसके बच्चे भी बहुत समझदार है। 14 साल का बच्चा आलोक अपनी मां को दिलासा दे रहा था। इतनी छोटी उम्र में पिता का साया सिर से छिन गया है। ऐसे में बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूर्या कॉलोनी सेहतपुर निवासी बिजेन्द्र गुप्ता की नई दिल्ली स्थित महिपालपुर में कार लूटने के दौरान घसीटकर हुई दर्दनाक मौत के बाद बृहस्पतिवार को भी उनके पड़ोसी सदमे में है। पड़ोसियों के दिल-दिमाग से बिजेन्द्र गुप्ता और उसके परिवार का प्रेम पूर्वक व्यवहार नहीं उतर रहा है। शाम को अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जला।
हालांकि बिजेन्द्र का पूरा परिवार फिलहाल गांव गया हुआ है और यहां पर कोई नहीं है। उसकी बड़ी बेटी सुनीता ने बारहवीं कक्षा में फरीदाबाद टॉपर थी, दिल्ली के देशबंधु कॉलेज में पढ़ रही हैं। बिजेन्द्र गुप्ता जिस मकान में किराए पर रहते थे उनके मालिक नरेन्द्र तिवारी ने भी कहा कि उनकी पत्नी सुगंधिता अपने बच्चों के साथ जब तक वो सक्षम नहीं हो जाती, बिना किराया दिए रह सकती हैं। इसके अतिरिक्त पड़ोसी भी उनके परिवार की हर तरह से मदद करने को तैयार हैं। पड़ोसी उसकी मौत से इतना दुखी थे कि जो 10-15 परिवार उनके बहुत नजदीकी थे, उनमें से किसी के घर चूल्हा नहीं जला। यहां रहने वाले सभी लोग 5 से 10 साल पुराने हैं, इसलिए सभी में बहुत अच्छी जान पहचान हो गई थी। कुछ पड़ोसी तो सदमे की वजह से काम पर नहीं गए हैं। उनके दिमाग से बिजेन्द्र गुप्ता का भोला-भाला चेहरा नहीं निकल पा रहा है। बिजेन्द्र गुप्ता के पड़ोसी नितिन ने बताया कि उसके बच्चे भी बहुत समझदार है। 14 साल का बच्चा आलोक अपनी मां को दिलासा दे रहा था। इतनी छोटी उम्र में पिता का साया सिर से छिन गया है। ऐसे में बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है।
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