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रिश्वत कांड : आईएएस अफसर पांच दिन की रिमांड पर, खुलेंगे भ्रष्टाचार के राज

Tue, 16 May 2023 10:47 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 16 May 2023 10:47 PM IST
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Bribery scandal: IAS officer on remand for five days, secrets of corruption will be revealed
- नगर निगम में ठेका दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का है आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम में सरकारी ठेका दिलाने के नाम पर करीब 1.10 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोपी आईएएस धर्मेन्द्र सिंह को मंगलवार को पुलिस ने अदालत में पेश करके पांच दिन की रिमांड पर लिया है। पूछताछ में भ्रष्टाचार के कई राज खुलेंगे। विभाग के कई अन्य अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। मंगलवार को निगम में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
आईएएस धर्मेंद सिंह के खिलाफ जून 2022 में नई दिल्ली के रणजीत नगर के निवासी ललित मित्तल की शिकायत पर कोतवाली थाने में केस दर्ज हुआ था। ललित ने शिकायत में बताया था कि पंकज गर्ग, आरबी शर्मा, जेके भाटिया नाम के लोगों ने मिलकर उन्हें नगर निगम में सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा देकर 1.10 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। इन लोगों ने ललित मित्तल को बताया था कि रिश्वत की रकम उच्च अधिकारियों को बांटी गई है। बाद में ललित मित्तल को सरकारी ठेका नहीं मिला तो उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया। जिसकी जांच एसीपी एनआईटी विष्णु प्रसाद द्वारा की जा रही है। जांच में सामने आया कि मामले में निगम के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं। जिन्होंने ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दलाल रामबीर के माध्यम से 1.10 करोड़ रुपये की रिश्वत ली और नियमों को ताक पर रखकर सोनीपत नगर निगम बिल्डिंग का ठेका 52.70 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 87.85 करोड़ का रिवाइज्ड एस्टीमेट (एन्हांसमेंट) तैयार करके अनुमति के लिए अर्बन लोकल बॉडीज के निदेशक को भेजा था। मामले में दलाल रामबीर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में तत्कालीन नगर निगम सोनीपत के आयुक्त आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह का नाम सामने आया। जांच का दायरा बढ़ाया गया तो सामने आया कि वह भी रिश्वत लेने के मामले में शामिल थे। धर्मेंद्र सिंह को गुरुग्राम में उनके घर से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश करके पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान गहनता से पूछताछ की जाएगी। मामले में लिप्त अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ऐसे खुले भ्रष्टाचार के राज
पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि जांच के दौरान तकनीकी टीम द्वारा बढा़ए गए एस्टीमेट की जांच करवाई गई तो जांच में पाया गया कि नगर निगम सोनीपत के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट का रिवाइस्ड एस्टीमेट नियमों की अवहेलना करके बनाया था। बढ़ाए गए एस्टीमेट को आईएएस अधिकारी ने अनुमति के लिए भेजा था। इस मामले में आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह की भी भ्रष्टाचार में संलिप्तता पाई गई। नगर निगम के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा मिलकर कुल 1.10 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई थी।
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एनआईटी विधायक ने 200 करोड़ का मामला सदन में उठाया था
नगर निगम के बहुचर्चित 200 करोड़ के घोटाले मामले को कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने विधानसभा में उठाया था। इसके बाद सीएम मनोहर लाल ने निगमायुक्त रह चुके आईएएस अफसरों से पूछताछ कर राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) को मंजूरी दी थी। राशि का भुगतान करने वाले तीन आईएएस अफसरों को जांच की आंच झेलनी होगी, जिन्होंने वर्क ऑर्डर जारी करने के बाद संशोधित और पुन: संशोधित किए। हालांकि मंजूरी प्रदान किए करीब छह माह का समय बीत गया है लेकिन अब तक त्रिपुरा काडर की आईएएस और तत्कालीन निगमायुक्त सोनल गोयल से ही पूछताछ हुई। इस मामले में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके स्टेट विजिलेंस की जांच पर सवाल उठाए थे। मामला हाई कोर्ट पहुंचते ही स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने आनन-फानन में हरियाणा काडर के दो और आईएएस मोहम्मद साइन सहित अनीता यादव को भी पूछताछ के लिए बुलाया था।

नीरज शर्मा ने छह माह नहीं पहने सिले वस्त्र

एनआईटी फरीदाबाद के विधायक नीरज शर्मा ने 200 करोड़ के घोटाले में कड़ी कार्रवाई न होने पर विधानसभा के बीते बजट सत्र में सिले हुए वस्त्र त्याग दिए थे। छह माह तक वह धोती-चादर में ही रहे। अभियंताओं, ठेकेदार की गिरफ्तारी और अफसरों के निलंबन के बाद बीते दिनों उन्होंने वस्त्र धारण किए थे। उनके इस कदम के बाद सरकार ने घोटाले की जांच विजिलेंस को सौंपी थी। नीरज इस मामले में संलिप्त अफसरों के नाम विधानसभा में ले चुके हैं।
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