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Faridabad News: खत्म नहीं हो रहे ब्लैक स्पॉट, जान गंवा रहे लोग
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर ब्लैक स्पॉट दो दशक बाद भी खत्म नहीं हो सके हैं। हर माह जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होने और इन स्थानों पर सुधार के दावों के बावजूद हादसों का सिलसिला जारी है। जिले में हर साल 200 से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। वर्ष 2025 में चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर ही 56 हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है।
ट्रैफिक पुलिस ने दुर्घटनाओं के विश्लेषण के बाद एनएच-44 पर 12 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए थे। इनमें जेसीबी चौक, अजरौंदा चौक और एनएचपीसी चौक समेत कई स्थान शामिल हैं। एनएचएआई ने कुछ जगह सड़क डिजाइन, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन में बदलाव किए, लेकिन जेसीबी चौक, एल्सन चौक और अनाज मंडी कट अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।
यहां लोग फेंसिंग के बीच से हाईवे पार करते हैं। सुरक्षित पैदल पार पथ और ऊंची स्टील फेंसिंग की व्यवस्था अभी अधूरी है। गौरतलब है कि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को वर्ष 2005 के सर्वे में भी असुरक्षित मार्गों में शामिल किया गया था।
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फरीदाबाद। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर ब्लैक स्पॉट दो दशक बाद भी खत्म नहीं हो सके हैं। हर माह जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होने और इन स्थानों पर सुधार के दावों के बावजूद हादसों का सिलसिला जारी है। जिले में हर साल 200 से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। वर्ष 2025 में चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर ही 56 हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है।
ट्रैफिक पुलिस ने दुर्घटनाओं के विश्लेषण के बाद एनएच-44 पर 12 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए थे। इनमें जेसीबी चौक, अजरौंदा चौक और एनएचपीसी चौक समेत कई स्थान शामिल हैं। एनएचएआई ने कुछ जगह सड़क डिजाइन, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन में बदलाव किए, लेकिन जेसीबी चौक, एल्सन चौक और अनाज मंडी कट अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।
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यहां लोग फेंसिंग के बीच से हाईवे पार करते हैं। सुरक्षित पैदल पार पथ और ऊंची स्टील फेंसिंग की व्यवस्था अभी अधूरी है। गौरतलब है कि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को वर्ष 2005 के सर्वे में भी असुरक्षित मार्गों में शामिल किया गया था।
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