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बीके अस्पताल : कैंसर पीड़ित को ओपीडी से खींचकर बाहर लाए और लातों से मारा
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फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल में मरीजों और परिजनों का शिकायतों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को कैंसर पीड़ित एक पिता को इस बदहाली और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। पचास वर्षीय राजू अपनी बेटी का दिव्यांग प्रमाणपत्र कैसे बनेगा, ये पूछने के लिए सीधे डॉक्टर के कमरे में चले गए। इस पर सुरक्षा सहायकों ने उनसे मारपीट की। यही नहीं, उन्हें खींचते हुए ओपीडी के बाहर लाए और कई बार पैर से मारा। बहरहाल, शिकायत पर अधिकारियों ने पीड़ित का ओपीडी कार्ड बनवाकर डॉक्टर का परामर्श दिलवाया।
बदरपुर निवासी राजू अपनी पत्नी अर्चना के साथ मानसिक रूप से विक्षिप्त 18 वर्षीय बेटी का अशक्तता का प्रमाणपत्र बनवाने आए थे। उनका कहना है कि ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए पंजीकरण काउंटर पर लंबी लाइन लगी थी। इसके लिए वे काफी देर तक इंतजार करते रहे। इसलिए राजू ने पहले प्रमाणपत्र कैसे बनेगा, इसकी जानकारी लेना ठीक समझा। पूछताछ के लिए वह ओपीडी में बने कमरा नंबर-1 में सीधे डॉक्टर के पास पहुंच गये। सुरक्षा सहायक ने पहले उसे बिना कार्ड डॉक्टर से मिलने से रोका लेकिन वह डॉक्टर तक पहुंच गए।
डॉक्टर ने भी नहीं सुनी पूरी बात
राजू का आरोप है कि डॉक्टर ने उनकी बात नहीं सुनी। इसी बीच सुरक्षा सहायक ने राजू को डॉक्टर के कमरे से जबरन बाहर खींच लिया। दोनों के बीच इस दौरान कहासुनी हुई। देखते ही देखते मामला गरमा गया और बात हाथापाई पर उतर आई। राजू का आरोप है कि इस बीच दो अन्य सुरक्षा सहायक भी वहां आ पहुंचे। एक ने उन्हें लात मारी। यह देख साथ में पत्नी और बेटी ने विरोध किया और भीड़ में खड़े लोग बीचबचाव करने लगे। पीड़ित ने मामले की शिकायत प्रधान चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में भी की।
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क्या कहते हैं अधिकारी
राजू व उसके परिवार ने मामले की शिकायत की थी। पीड़ित की बेटी का ओपीडी कार्ड बनवाने के बाद उसे मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श दिलवा दिया। मारपीट मामले में जांच की जाएगी।
- डॉ तांत्या अत्री, बीके अस्पताल प्रशासन सहायक
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बदरपुर निवासी राजू अपनी पत्नी अर्चना के साथ मानसिक रूप से विक्षिप्त 18 वर्षीय बेटी का अशक्तता का प्रमाणपत्र बनवाने आए थे। उनका कहना है कि ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए पंजीकरण काउंटर पर लंबी लाइन लगी थी। इसके लिए वे काफी देर तक इंतजार करते रहे। इसलिए राजू ने पहले प्रमाणपत्र कैसे बनेगा, इसकी जानकारी लेना ठीक समझा। पूछताछ के लिए वह ओपीडी में बने कमरा नंबर-1 में सीधे डॉक्टर के पास पहुंच गये। सुरक्षा सहायक ने पहले उसे बिना कार्ड डॉक्टर से मिलने से रोका लेकिन वह डॉक्टर तक पहुंच गए।
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डॉक्टर ने भी नहीं सुनी पूरी बात
राजू का आरोप है कि डॉक्टर ने उनकी बात नहीं सुनी। इसी बीच सुरक्षा सहायक ने राजू को डॉक्टर के कमरे से जबरन बाहर खींच लिया। दोनों के बीच इस दौरान कहासुनी हुई। देखते ही देखते मामला गरमा गया और बात हाथापाई पर उतर आई। राजू का आरोप है कि इस बीच दो अन्य सुरक्षा सहायक भी वहां आ पहुंचे। एक ने उन्हें लात मारी। यह देख साथ में पत्नी और बेटी ने विरोध किया और भीड़ में खड़े लोग बीचबचाव करने लगे। पीड़ित ने मामले की शिकायत प्रधान चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में भी की।
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क्या कहते हैं अधिकारी
राजू व उसके परिवार ने मामले की शिकायत की थी। पीड़ित की बेटी का ओपीडी कार्ड बनवाने के बाद उसे मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श दिलवा दिया। मारपीट मामले में जांच की जाएगी।
- डॉ तांत्या अत्री, बीके अस्पताल प्रशासन सहायक