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उजाड़ने से पहले बसाया जाए गांव खोरी निवासियों का आशियाना

Mon, 07 Jun 2021 11:49 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 11:49 PM IST
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Before the desolation, the house of the village Khori residents should be built.
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट अरावली वन क्षेत्र में बसे लकड़पुर और खोरी गांव में अवैध रूप से बने घरों को तोड़ने के आदेश जारी किए है। न्यायालय ने साफ तौर पर कहा है कि वन क्षेत्र को अवैध निर्माणों से मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने जिला प्रशासन को छह हफ्ते का समय दिया है। इससे लोगों में हड़कंप मच गया है। लोगों ने कहा कि तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले सरकार उन्हें दूसरी जगह मकान या जमीन व मुआवजा दे। उसके बाद ही उनके आशियाने को उजाड़ा जाए। लोगों का यह भी आरोप है कि एक तरह सरकार वर्ष 2023 तक सब को पक्का मकान देने की बात करती है। वहीं दूसरी तरह उनके मकानों को तोड़ जा रहा है। तोड़फोड़ की कार्रवाई से हजारों लोग बेघर हो जाएंगे।
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उच्चतम न्यायालय के आदेश पर लोगों ने कहा कि वह अपने घरों को खाली करने के लिए तैयार हैं लेकिन उससे पहले सरकार उनके रहने की व्यवस्था करें। उन्हें दूसरी जगह बसाया जाए। इसके साथ कॉलोनी में तोड़फोड़ के नाम पर लोगों से वसूली करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, जो तोड़फोड़ की बात कह कर हर महीने लोगों से उगाही करते हैं। स्थानीय लोगों ने निगम व अन्य विभागों पर शुरू में ही कार्रवाई नहीं करने पर भी सवाल उठाए हैं।
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सूरजकुंड स्थित अरावली की पहाड़ियों में स्थित गांव खोरी में करीब 30 साल पहले लोगों की बसावट शुरू हुई। दिल्ली व फरीदाबाद सीमा में बसे लोगों ने बिल्डरों के झांसे में आकर यहां अपना आशियाना बनाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआत में बिल्डरों ने उन्हें बिजली पानी देने का आश्वासन दिया। सबसे पहले वर्ष 1998 में एक बार नगर निगम ने तोड़फोड़ की। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे धीरे-धीरे लोगों ने यहां बसना शुरू कर दिया। इस वक्त करीब 15 हजार मकान खोरी में बने हुए है। यहां करीब 60 हजार लोग रहते हैं। लोगों ने बताया कि वर्ष 2011 तक लोगों ने यहां खूब जमीन खरीदी। लोगों ने दो-दो, तीन-तीन मंजिल के मकान बना लिए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि तोड़फोड़ के डर से करीब 10 साल से लोगों ने यहां खरीदारी कम कर दी है। अब जिन लोगों की यहां जमीन है वही यहां रह रहें हैं। कुछ साल पहले हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद कई लोग अपनी जमीन को छोड़कर चले गए। इसके साथ ही नगर निगम पिछले छह माह में तोड़फोड़ की दो बड़ी कार्रवाई यहां कर चुका है। काफी जमीन खाली भी कराई गई है।
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कॉलोन में है पांचवीं तक का सरकारी स्कूल
वर्ष 2011 से पहले बसी कॉलोनी में पांचवीं तक एक सरकारी स्कूल भी चल रहा है। लोगों के वोटर कार्ड सहित सभी जरूरी कागजात बने हुए है। गलियां पक्की हैं। बिजली और पानी की सुविधा दी जा रही है, जबकि नई कॉलोनी में सुविधाओं का अभाव है।
लोगों को पता है कि जमीन वनक्षेत्र की है। इसके बावजूद लोगों ने वहां मकान बना लिए। उन्हें हटाने के लिए प्रशासन समय-समय पहले भी कार्रवाई करता रहा है। गांव खोरी में करीब छह माह के दौरान दो बड़ी तोड़फोड़ की जा चुकी हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश का पलान किया जाएगा। - यशपाल, उपायुक्त, फरीदाबाद

कैबिनेट मंत्री बोले मदद के लिए सरकार करेगी विचार
खोरी गांव में बसे लोगों पर सुप्रीम आदेश के बाद सरकार राहत भरा निर्णय ले सकती है। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हजारों लोग प्रभावित होंगे, ऐसे में यह देखना होगा कि लोगों के लिए सरकार किस तरह से राहत भरे कदम उठा सकती है। कौन सी योजनाएं के तहत उन्हें लाभ दिए जा सकते हैं, मौजूदा समय में कितने लोग सरकारी योजना के तहत लाभ ले रहे हैं। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
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