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Faridabad News: ठेकेदारों को पेमेंट नहीं देने पर अधीक्षण अभियंता और कार्यकारी अभियंताओं के वेतन पर रोक

Thu, 04 May 2023 10:50 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 04 May 2023 10:50 PM IST
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Ban on salary of Superintending Engineer and Executive Engineers for non-payment to contractors
-हाईकोर्ट के आदेश पर संबंधित की रुकी पेेमेंट, सात ठेकेदार गए थे कोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो



फरीदाबाद। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निगम ठेकेदारों के दस करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर अधीक्षण अभियंता और संबंधित कार्यकारी अभियंताओं के वेतन रोकने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने 31 मई तक ठेकेदारों को 18 फीसदी ब्याज के साथ पैसे देने को कहा है।



कई ठेकेदारों ने शहर में निगम की सड़क समेत अन्य विकास कार्य करवाए हुए हैं। इसके बाद भी उन्हें निगम ने पैसे का भुगतान नहीं किया। इस पर नगर निगम ठेकेदार एसोसिएशन ने साल 2020-22 में कराए गए कार्यों के पेमेंट को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में हाईकोर्ट ने एक मई को सुनवाई पूरी कर ली थी। बुधवार की शाम कोर्ट का ऑर्डर ठेकेदारों को उपलब्ध हो गया।
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नगर निगम ठेकेदार एसोसिएशन के प्रधान गिरिराज ने बताया कि निगम लगातार ठेकेदारों के काम का भुगतान नहीं कर रहा है। कार्य होने पर भी निगम के अधिकारी पेमेंट के लिए एक-दूसरे पर टाल देते हैं। निगम आयुक्त समेत अन्य से मिलने के बाद भी भुगतान नहीं हो रहा था। इसके बाद सात ठेकेदार हाईकोर्ट चले गए थे। उनके केस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने आदेश दिए हैं कि नगर निगम के संबंधित कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता की सेलरी अगली सुनवाई तक रोक दी जाए। प्रधान ने कहा कि निगम के अधिकारी अपने मनमाफिक ठेकेदारों को पेमेंट कर रहे थे लेकिन कुछेक में जानबूझ कर देरी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि निगम में ठेकेदारों की 20 करोड़ की पेमेंट अटकी है जोकि साल 2020-22 के बीच कराए गए कार्याें की है। अभी दस करोड़ के मामले में फैसला आया है। प्रधान गिरिराज ने बताया कि अन्य दस करोड़ के मामले में भी जल्द फैसला आने की उम्मीद है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 31 मई को होनी है।
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200 करोड़ के घोटाले के बाद बढ़ी सख्ती



नगर निगम में बिना काम कराए 200 करोड़ का घोटाला आने के बाद निगम के अधिकारी सतर्क हो गए है। इसके बाद ठेकेदारों के पेमेंट में देरी होने लगी। इसके अलावा पेमेंट जारी करने के लिए नए मानक बना दिए गए। ऐसे में कई ठेकेदारों के पेमेंट लटक गए। निगम के ठेकेदार लगातार पेमेंट के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन उनके बिल को पास करने में अधिकारी कतराते रहे।
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