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Faridabad News: बालवाटिका के विद्यार्थियों को अब तक नहीं मिली किताब
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- पुरानी अध्ययन सामग्री से ही पढ़ा रहे शिक्षक
सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले में बालवाटिका के विद्यार्थियों को स्कूल का आधा सत्र बीत जाने के बाद भी किताब नहीं मिली है। शिक्षक पुरानी अध्ययन सामग्री से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों को खेलने की किट तो मिली है, लेकिन किताब अब तक नहीं दी गई है। किताब न होने की वजह से उनको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 350 से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में वर्ष 2025-26 के लिए 2453 बच्चों ने बालवाटिका में प्रवेश लिया है। इसमें 1022 बच्चे बल्लभगढ़ ब्लाॅक में, जबकि 1431 बच्चे फरीदाबाद ब्लॉक में अध्ययनरत हैं। राजकीय विद्यालयों में जुलाई के माह से ही प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इसके बावजूद भी बच्चों को अब तक किताब नहीं दी गई है। शिक्षकों का कहना है कि पिछले साल बच्चों को किताब मुहैया कराई गई थी, लेकिन इस बार अब तक नहीं मिली है। हम पुरानी किताबों से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि किताब क्यों नहीं मिली है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण पुरानी किताब सभी के लिए किताब उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पुरानी किताबें फट चुकी हैं। इस बात को लेकर अभिभावकों ने भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि बच्चों को किताब मिलनी चाहिए, ताकि वे खेलने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर सकें।
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सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले में बालवाटिका के विद्यार्थियों को स्कूल का आधा सत्र बीत जाने के बाद भी किताब नहीं मिली है। शिक्षक पुरानी अध्ययन सामग्री से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों को खेलने की किट तो मिली है, लेकिन किताब अब तक नहीं दी गई है। किताब न होने की वजह से उनको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 350 से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में वर्ष 2025-26 के लिए 2453 बच्चों ने बालवाटिका में प्रवेश लिया है। इसमें 1022 बच्चे बल्लभगढ़ ब्लाॅक में, जबकि 1431 बच्चे फरीदाबाद ब्लॉक में अध्ययनरत हैं। राजकीय विद्यालयों में जुलाई के माह से ही प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इसके बावजूद भी बच्चों को अब तक किताब नहीं दी गई है। शिक्षकों का कहना है कि पिछले साल बच्चों को किताब मुहैया कराई गई थी, लेकिन इस बार अब तक नहीं मिली है। हम पुरानी किताबों से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि किताब क्यों नहीं मिली है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण पुरानी किताब सभी के लिए किताब उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पुरानी किताबें फट चुकी हैं। इस बात को लेकर अभिभावकों ने भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि बच्चों को किताब मिलनी चाहिए, ताकि वे खेलने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर सकें।
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