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Faridabad News: फर्जी दस्तावेज से 10 करोड़ का प्लॉट बेचने के आरोप में जमानत याचिका खारिज
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फरीदाबाद। फर्जी इकरारनामा तैयार कर करीब 10 करोड़ रुपये का प्लॉट बेचने की कोशिश के आरोपी प्रदीप कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने चिकित्सा आधार पर उसकी 30 दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आरोपों को गंभीर माना और कहा कि आरोपी की हालत फिलहाल स्थिर है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता रविकांत शर्मा ने 8 अगस्त को खेड़ीपुल थाना पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि बुढ़ैना गांव में 1315 वर्ग गज का प्लॉट उनकी पत्नी रजनी शर्मा और ममता तेली के नाम पर पंजीकृत है। एक परिचित ने उन्हें सूचित किया कि प्रदीप कुमार यह प्लॉट बेचने आया है। शिकायतकर्ता ने दस्तावेज देखे और इकरारनामे पर हस्ताक्षर फर्जी होने का आरोप लगाया। आरोपियों ने दावा किया था कि प्लॉट 6 अगस्त को 1 करोड़ रुपये नकद और 40 लाख रुपये चेक से खरीदकर बेचा गया। इकरारनामे में बिक्री राशि 9,99,40,000 रुपये दर्शाई गई थी। पुलिस ने प्रदीप को 8 अगस्त और सह-आरोपियों को 9 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
आरोपी के वकील ने सीने में दर्द और जेल में उचित उपचार न मिलने का हवाला दिया था। सरकारी पक्ष ने बताया कि आरोपी को सफदरजंग अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाया गया। उसका ईसीजी हुआ और दवाएं भी दी गईं। अदालत ने जेल में उपचार अपर्याप्त होने का कोई प्रमाण नहीं माना। संवाद
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पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता रविकांत शर्मा ने 8 अगस्त को खेड़ीपुल थाना पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि बुढ़ैना गांव में 1315 वर्ग गज का प्लॉट उनकी पत्नी रजनी शर्मा और ममता तेली के नाम पर पंजीकृत है। एक परिचित ने उन्हें सूचित किया कि प्रदीप कुमार यह प्लॉट बेचने आया है। शिकायतकर्ता ने दस्तावेज देखे और इकरारनामे पर हस्ताक्षर फर्जी होने का आरोप लगाया। आरोपियों ने दावा किया था कि प्लॉट 6 अगस्त को 1 करोड़ रुपये नकद और 40 लाख रुपये चेक से खरीदकर बेचा गया। इकरारनामे में बिक्री राशि 9,99,40,000 रुपये दर्शाई गई थी। पुलिस ने प्रदीप को 8 अगस्त और सह-आरोपियों को 9 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
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आरोपी के वकील ने सीने में दर्द और जेल में उचित उपचार न मिलने का हवाला दिया था। सरकारी पक्ष ने बताया कि आरोपी को सफदरजंग अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाया गया। उसका ईसीजी हुआ और दवाएं भी दी गईं। अदालत ने जेल में उपचार अपर्याप्त होने का कोई प्रमाण नहीं माना। संवाद
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