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Faridabad News: कम उम्र में सता रहा कमर व गर्दन दर्द, फिजियोथेरेपी सहारा
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खराब जीवनशैली ही नहीं जिम और अधिक आरामदायक कार्य भी लोगों के शरीर को खराब कर रहे हैं
भारती दुबे
फरीदाबाद। खराब जीवनशैली ही नहीं जिम और अधिक आरामदायक कार्य भी लोगों के शरीर को खराब कर रहे हैं। नई उम्र के बच्चों में कमर व गर्दन दर्द की अधिक समस्या देखी जा रही है। इसमें 16 से 30 साल के लोग शामिल हैं। जिम करते समय चोट लगने व अधिक आरामदायक कार्य करने से लोगों को फिजियोथेरेपी के लिए जाना पड़ रहा है।
बीके अस्पताल में रेड क्रॉस की ओर से चलाए जा रहे फिजियोथेरेपी केंद्र में प्रतिदिन 35 से 40 मरीज थेरेपी लेने के लिए आते हैं। इसमें महिलाओं व बुजुर्गों के अलावा किशोर भी शामिल हैं। इसमें सबसे अधिक लैपटॉप के आगे सारा दिन कुर्सी पर बैठने, जिम करने वाले लोग और वाहन से लंबा सफर करने वाले लोग थेरेपी लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
पूरे दिन कुर्सी पर बैठे रहने से बढ़ रही समस्या
आजकल भाग दौड़ भरी जिंदगी में नई उम्र के बच्चे सेहत और व्यायाम पर ध्यान न देते हुए दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर काम करना अधिक पसंद कर रहे हैं। किशोर कॅरिअर को प्राथमिकता देते हुए पूरे दिन कंप्यूटर के बैठे रहते हैं। इससे उसकी गर्दन और कमर में अधिक प्रभाव पड़ता है। जिस पर वे शुरूआत में ध्यान नहीं देते और बाद में समस्या बढ़ जाती है। इसके बाद उन्हें केवल दवाई ही नहीं बल्कि फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
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जिम में क्षमता से अधिक वजन उठाने से लग रही चोट
डॉक्टर की माने तो आजकल नई उम्र के बच्चों में बॉडी बनाने का ट्रेंड चल गया है। इसी होड़ में जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में किशोर क्षमता से अधिक वजन उठा लेते हैं। इसके बाद उनकी कमर और गर्दन में इंजरी (चोट) हो रही है और उन्हें फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
अस्पताल में जगह की कमी के कारण नहीं हो पा रहा सही से कार्य
बीके अस्पताल में 200 बेड की मातृ शिशु इकाई का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में रेड क्रॉस की ओर से चलाए जा रहे फिजियोथेरेपी केंद्र को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश के बाद खाली करना पड़ा। जगह मांगी गई तो अस्पताल में पीछे की ओर बने आइसोलेशन वार्ड में केंद्र चालू करने के लिए जगह दी गई। आइसोलेशन वार्ड मोटी टीन की चादर से बनाया गया है, जिसके कारण थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली मशीन नहीं लग पा रही है। वहीं, कंटेनर में भारी सामान भी नहीं रख पा रहे हैं। इसके कारण मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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वर्जन
कंटेनर में मरीजों की सही से थेरेपी नहीं हो पा रही है। हम भारी सामान नहीं रख सकते हैं और मशीन लगाने में भी काफी समस्या आ रही है। हम प्रशासन से लगातार केंद्र के लिए बीके अस्पताल में ही नई जगह देने के लिए मांग कर रहे हैं, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके। - बिजेंद्र सौरोत, सचिव, जिला रेडक्रॉस सोसाइटी
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भारती दुबे
फरीदाबाद। खराब जीवनशैली ही नहीं जिम और अधिक आरामदायक कार्य भी लोगों के शरीर को खराब कर रहे हैं। नई उम्र के बच्चों में कमर व गर्दन दर्द की अधिक समस्या देखी जा रही है। इसमें 16 से 30 साल के लोग शामिल हैं। जिम करते समय चोट लगने व अधिक आरामदायक कार्य करने से लोगों को फिजियोथेरेपी के लिए जाना पड़ रहा है।
बीके अस्पताल में रेड क्रॉस की ओर से चलाए जा रहे फिजियोथेरेपी केंद्र में प्रतिदिन 35 से 40 मरीज थेरेपी लेने के लिए आते हैं। इसमें महिलाओं व बुजुर्गों के अलावा किशोर भी शामिल हैं। इसमें सबसे अधिक लैपटॉप के आगे सारा दिन कुर्सी पर बैठने, जिम करने वाले लोग और वाहन से लंबा सफर करने वाले लोग थेरेपी लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
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पूरे दिन कुर्सी पर बैठे रहने से बढ़ रही समस्या
आजकल भाग दौड़ भरी जिंदगी में नई उम्र के बच्चे सेहत और व्यायाम पर ध्यान न देते हुए दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर काम करना अधिक पसंद कर रहे हैं। किशोर कॅरिअर को प्राथमिकता देते हुए पूरे दिन कंप्यूटर के बैठे रहते हैं। इससे उसकी गर्दन और कमर में अधिक प्रभाव पड़ता है। जिस पर वे शुरूआत में ध्यान नहीं देते और बाद में समस्या बढ़ जाती है। इसके बाद उन्हें केवल दवाई ही नहीं बल्कि फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
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जिम में क्षमता से अधिक वजन उठाने से लग रही चोट
डॉक्टर की माने तो आजकल नई उम्र के बच्चों में बॉडी बनाने का ट्रेंड चल गया है। इसी होड़ में जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में किशोर क्षमता से अधिक वजन उठा लेते हैं। इसके बाद उनकी कमर और गर्दन में इंजरी (चोट) हो रही है और उन्हें फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
अस्पताल में जगह की कमी के कारण नहीं हो पा रहा सही से कार्य
बीके अस्पताल में 200 बेड की मातृ शिशु इकाई का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में रेड क्रॉस की ओर से चलाए जा रहे फिजियोथेरेपी केंद्र को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश के बाद खाली करना पड़ा। जगह मांगी गई तो अस्पताल में पीछे की ओर बने आइसोलेशन वार्ड में केंद्र चालू करने के लिए जगह दी गई। आइसोलेशन वार्ड मोटी टीन की चादर से बनाया गया है, जिसके कारण थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली मशीन नहीं लग पा रही है। वहीं, कंटेनर में भारी सामान भी नहीं रख पा रहे हैं। इसके कारण मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
वर्जन
कंटेनर में मरीजों की सही से थेरेपी नहीं हो पा रही है। हम भारी सामान नहीं रख सकते हैं और मशीन लगाने में भी काफी समस्या आ रही है। हम प्रशासन से लगातार केंद्र के लिए बीके अस्पताल में ही नई जगह देने के लिए मांग कर रहे हैं, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके। - बिजेंद्र सौरोत, सचिव, जिला रेडक्रॉस सोसाइटी