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आयुष्मान योजना: 3 करोड़ रुपये बकाया, 20 निजी अस्पताल बंद कर सकते हैं इलाज
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फरीदाबाद। आयुष्मान और चिरायु योजना के तहत निजी अस्पतालों में होने वाले मरीजों के इलाज का भुगतान सरकार की ओर से समय पर नहीं किया जा रहा। ऐसे में निजी अस्पताल प्रबंधकों में नाराजगी बनी हुई है। सरकार पर तीन करोड़ रुपये बिलाें का बकाया है। समय पर भुगतान न होने के कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही बकाया भुगतान की राशि अदा न की गई तो वह जल्द ही इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करना बंद कर देंगे।
सरकार की चिरायु और आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पताल प्रबंधकों को इलाज के एवज में मिलने वाली राशि का समय से भुगतान नहीं किया जा रहा। इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पर्याप्त और समय पर भुगतान न किया गया तो जिले के सभी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करना बंद कर देंगे। एसोसिएशन का कहना है कि लगातार बिलों में कटौती की जाती है। कारण पूछे जाने पर कई-कई माह के बाद उत्तर दिया जाता है। बिलों का भुगतान तय समझौते के मुताबिक किया जाना चाहिए।
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जिले के केवल 20 निजी अस्पताल ही पैनल में शामिल
आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत सरकार की ओर से भले ही मरीजों का पांच लाख रुपये तक फ्री इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। निजी अस्पतालों को केवल 20 से 25 हजार रुपये तक के पैकेज बनाकर मरीजों के इलाज की छूट दी गई है। जिले में केवल 20 निजी अस्पतालों को ही सरकार ने आयुष्मान और चिरायु योजना के पैनल में शामिल किया है। इन अस्पतालों में प्रतिमाह करीब 15 से 20 मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग पर तीन करोड़ रुपये का बकाया
योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को नियमानुसार पंद्रह दिन के अंदर भुगतान करना होता है। पिछले काफी समय से बिलों का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में अस्पताल अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार पर करीब तीन करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान बकाया है, जबकि अदा किए जाने वाले बिलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत की कटौती की जा रही है जिसका कोई औचित्य नहीं है।
- डॉ. सुरेश अरोड़ा, चेयरमैन आयुष्मान कमेटी आईएमए
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सरकार की चिरायु और आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पताल प्रबंधकों को इलाज के एवज में मिलने वाली राशि का समय से भुगतान नहीं किया जा रहा। इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पर्याप्त और समय पर भुगतान न किया गया तो जिले के सभी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करना बंद कर देंगे। एसोसिएशन का कहना है कि लगातार बिलों में कटौती की जाती है। कारण पूछे जाने पर कई-कई माह के बाद उत्तर दिया जाता है। बिलों का भुगतान तय समझौते के मुताबिक किया जाना चाहिए।
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जिले के केवल 20 निजी अस्पताल ही पैनल में शामिल
आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत सरकार की ओर से भले ही मरीजों का पांच लाख रुपये तक फ्री इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। निजी अस्पतालों को केवल 20 से 25 हजार रुपये तक के पैकेज बनाकर मरीजों के इलाज की छूट दी गई है। जिले में केवल 20 निजी अस्पतालों को ही सरकार ने आयुष्मान और चिरायु योजना के पैनल में शामिल किया है। इन अस्पतालों में प्रतिमाह करीब 15 से 20 मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग पर तीन करोड़ रुपये का बकाया
योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को नियमानुसार पंद्रह दिन के अंदर भुगतान करना होता है। पिछले काफी समय से बिलों का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में अस्पताल अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार पर करीब तीन करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान बकाया है, जबकि अदा किए जाने वाले बिलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत की कटौती की जा रही है जिसका कोई औचित्य नहीं है।
- डॉ. सुरेश अरोड़ा, चेयरमैन आयुष्मान कमेटी आईएमए