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Faridabad News: गाड़ियों के काफिले के साथ गांव पहुंची एशियाई खेल की पदक विजेता प्रीति
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एशियाई खेलाें के 3000 मीटर स्टीपल चेज में कांस्य पदक विजेता प्रीति लांबा बुधवार को अपने गांव जवां पहुंच गई। उनके स्वागत के लिए बल्लभगढ़ बस स्टैंड के पास खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने स्वागत किया। जाट चौथ पर 50 से अधिक कार और 100 बाइक मौजूद रहीं। वहीं, विभाग में तैनात एथलेटिक कोच धमेंद्र भी मौजूद रहें। जबकि, जिला खेल अधिकारी की गुरुग्राम में अधिकारियों के साथ बैठक होने के कारण वह स्वागत समारोह में मौजूद नहीं हो सकें।
पदक विजेता प्रीति लांबा अपने दोस्ते के साथ दिल्ली से करीब तीन बने बल्लभगढ़ बस स्टैंड पहुंची। वहां के बाद दूसरे गाड़ी में सवार हो गांव के लिए रवाना हो गई। बस स्टैंड के पास ट्रैफिक जाम नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने उनका फूल और नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया। उसके बाद वह जाट चौक पहुंची, वहां से उनके साथी दो पहिया वाहन और कारों के काफिले के साथ चली गई। इस मौके पर दो डीजे साउंड बॉक्स आदि भी मौजूद थे। वहीं, गांव में ग्रामीणों की ओर से उनके सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित कई अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया था। पिता जगवीर लांबा ने बताया कि आज पूरा देश मुझे मेरी बेटी के नाम से जानता है। यह पिता के लिए गर्व की बात है। पदक जीतकर लौटने के बाद मेरा फर्ज बनता है कि उसका जमकर स्वागत किया जाए।
गांव पहुंचने से पहले मंदिर में मथा टेका
पदक जीतकर घर लौटने के दौरान गांव के मंदिर में माथा टेकने के बाद जवा गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस मंदिर की बहुत मान्यता है। मंदिर में जो भी लोग श्रद्धा से मांगते है, उनकी मन्नत पूरी हो जाती है। एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए उन्होंने 15 वर्ष की आयु में ही अपना घर छोड़ दी थी। पहली बार उन्होंने भोपाल में जूनियर कैंप में हिस्सा लिया था। उसके बाद उन्होंने बैंगलूरु साई सेंटर में प्रशिक्षण लिया। इससे पहले वह जवा गांव और सेक्टर 12 खेल परिसर में अभ्यास करती थी। बताया जा रहा है एशियाई खेल में हिस्सा लेने के करीब छह महीने पहले ही वह घर छोड़ चुकी थी। गांव वाले उनका बेसब्री से इंतजार कर रहें थे।
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कोच ने दी उन्हें बधाई
खेल विभाग में तैनात एथलेटिक्स कोच धमेंद्र ने उनका स्वागत किया। उनका कहना था कि उनकी इस जीत से गांव के युवाओं में एक जोश आएगा। गांव में कई बेहतरीन एथलीट है।
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फरीदाबाद। एशियाई खेलाें के 3000 मीटर स्टीपल चेज में कांस्य पदक विजेता प्रीति लांबा बुधवार को अपने गांव जवां पहुंच गई। उनके स्वागत के लिए बल्लभगढ़ बस स्टैंड के पास खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने स्वागत किया। जाट चौथ पर 50 से अधिक कार और 100 बाइक मौजूद रहीं। वहीं, विभाग में तैनात एथलेटिक कोच धमेंद्र भी मौजूद रहें। जबकि, जिला खेल अधिकारी की गुरुग्राम में अधिकारियों के साथ बैठक होने के कारण वह स्वागत समारोह में मौजूद नहीं हो सकें।
पदक विजेता प्रीति लांबा अपने दोस्ते के साथ दिल्ली से करीब तीन बने बल्लभगढ़ बस स्टैंड पहुंची। वहां के बाद दूसरे गाड़ी में सवार हो गांव के लिए रवाना हो गई। बस स्टैंड के पास ट्रैफिक जाम नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने उनका फूल और नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया। उसके बाद वह जाट चौक पहुंची, वहां से उनके साथी दो पहिया वाहन और कारों के काफिले के साथ चली गई। इस मौके पर दो डीजे साउंड बॉक्स आदि भी मौजूद थे। वहीं, गांव में ग्रामीणों की ओर से उनके सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित कई अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया था। पिता जगवीर लांबा ने बताया कि आज पूरा देश मुझे मेरी बेटी के नाम से जानता है। यह पिता के लिए गर्व की बात है। पदक जीतकर लौटने के बाद मेरा फर्ज बनता है कि उसका जमकर स्वागत किया जाए।
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गांव पहुंचने से पहले मंदिर में मथा टेका
पदक जीतकर घर लौटने के दौरान गांव के मंदिर में माथा टेकने के बाद जवा गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस मंदिर की बहुत मान्यता है। मंदिर में जो भी लोग श्रद्धा से मांगते है, उनकी मन्नत पूरी हो जाती है। एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए उन्होंने 15 वर्ष की आयु में ही अपना घर छोड़ दी थी। पहली बार उन्होंने भोपाल में जूनियर कैंप में हिस्सा लिया था। उसके बाद उन्होंने बैंगलूरु साई सेंटर में प्रशिक्षण लिया। इससे पहले वह जवा गांव और सेक्टर 12 खेल परिसर में अभ्यास करती थी। बताया जा रहा है एशियाई खेल में हिस्सा लेने के करीब छह महीने पहले ही वह घर छोड़ चुकी थी। गांव वाले उनका बेसब्री से इंतजार कर रहें थे।
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कोच ने दी उन्हें बधाई
खेल विभाग में तैनात एथलेटिक्स कोच धमेंद्र ने उनका स्वागत किया। उनका कहना था कि उनकी इस जीत से गांव के युवाओं में एक जोश आएगा। गांव में कई बेहतरीन एथलीट है।