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Faridabad News: ऑनलाइन काम के दबाव से आशा कार्यकर्ता नाराज, प्रशासन से लगाई गुहार
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तकनीकी काम करवाने और मानदेय रोकने की धमकी का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आशा वर्कर्स यूनियन ने जिले में आशा कार्यकर्ताओं पर ऑनलाइन कार्य का दबाव बनाए जाने को लेकर कड़ा विरोध जताया है। यूनियन की ओर से सिविल सर्जन को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि आशा कार्यकर्ताओं से आभा आईडी और सीबीसी से जुड़े ऑनलाइन कार्य जबरन करवाए जा रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह तकनीकी कार्य है और इसके लिए अलग से प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है।
यूनियन का आरोप है कि आशा कार्यकर्ताओं की मूल जिम्मेदारी गांवों और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसमें टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों की बीमारियों की रोकथाम और जागरूकता जैसे कार्य शामिल हैं, जिनमें उनका अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है। ऐसे में ऑनलाइन रिपोर्टिंग का अतिरिक्त बोझ उनके नियमित कार्यों को प्रभावित कर रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि बीएसी और पीएचएम स्तर के अधिकारी आशा कर्मियों पर ऑनलाइन काम पूरा न करने की स्थिति में 6100 रुपये मानदेय रोकने की धमकी दे रहे हैं, जिसे यूनियन ने गैर संवैधानिक बताया है। यूनियन का कहना है कि इससे आशा कार्यकर्ताओं में मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
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आशा कार्यकर्ता यूनियन ने सिविल सर्जन से मांग की है कि आशाओं से जबरन ऑनलाइन कार्य करवाने पर तुरंत रोक लगाई जाए और उन्हें उनके मूल कार्यों तक सीमित रखा जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस मामले में उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आशा वर्कर्स यूनियन ने जिले में आशा कार्यकर्ताओं पर ऑनलाइन कार्य का दबाव बनाए जाने को लेकर कड़ा विरोध जताया है। यूनियन की ओर से सिविल सर्जन को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि आशा कार्यकर्ताओं से आभा आईडी और सीबीसी से जुड़े ऑनलाइन कार्य जबरन करवाए जा रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह तकनीकी कार्य है और इसके लिए अलग से प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है।
यूनियन का आरोप है कि आशा कार्यकर्ताओं की मूल जिम्मेदारी गांवों और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसमें टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों की बीमारियों की रोकथाम और जागरूकता जैसे कार्य शामिल हैं, जिनमें उनका अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है। ऐसे में ऑनलाइन रिपोर्टिंग का अतिरिक्त बोझ उनके नियमित कार्यों को प्रभावित कर रहा है।
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ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि बीएसी और पीएचएम स्तर के अधिकारी आशा कर्मियों पर ऑनलाइन काम पूरा न करने की स्थिति में 6100 रुपये मानदेय रोकने की धमकी दे रहे हैं, जिसे यूनियन ने गैर संवैधानिक बताया है। यूनियन का कहना है कि इससे आशा कार्यकर्ताओं में मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
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आशा कार्यकर्ता यूनियन ने सिविल सर्जन से मांग की है कि आशाओं से जबरन ऑनलाइन कार्य करवाने पर तुरंत रोक लगाई जाए और उन्हें उनके मूल कार्यों तक सीमित रखा जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस मामले में उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।