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सांसों पर 'जहरीला' संकट: ठंड आते ही बढ़े 30 फीसदी सांस के रोगी, जानें इसके चार लक्षण और बचाव के पांच तरीके

Mon, 30 Oct 2023 06:09 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बल्लभगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, बल्लभगढ़ Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 30 Oct 2023 06:09 PM IST
सार

डॉक्टर बोले- अन्य माह की अपेक्षा सर्दियों के चार महीनों (नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी) में अस्पतालों में इनकी संख्या 30 फीसदी तक बढ़ जाती है।

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As winter came number of respiratory patients increases by 30 percent know its symptoms and prevention
एम्स ओपीडी में बढ़े सांस के मरीज - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे प्रदूषण के चलते एम्स शाखा की ओपीडी में सांस और दमे के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। सामान्य रोग विशेषज्ञ के पास हर रोज 50 से 60 मरीज सांस रोग के आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सर्दियों के आते ही लगभग 30 प्रतिशत मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।

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एम्स शाखा की ओपीडी में प्रतिदिन करीब तीन हजार मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें से 250 मरीज सामान्य रोग विशेषज्ञ के पास बुखार, खांसी और सांस का उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं। एम्स शाखा के सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश ने बताया कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से उनकी ओपीडी में सांस रोगी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उनकी ओपीडी में हर रोज 50 से 60 मरीज सांस रोगी के आ रहे हैं। जिनकी उम्र 50 से ऊपर है।

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बढ़ते प्रदूषण की वजह से उन मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले सांस रोगी मरीज पंप का इस्तेमाल काफी कम किया करते थे लेकिन अब मरीज दिन दो बार कर रहे हैं। राजीव कॉलोनी निवासी घनश्याम ने बताया कि उनको सांस की परेशानी पहले से थी लेकिन अब प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से उनको ज्यादा परेशानी हो रही है। इसी वजह से वह अब सुबह व शाम को सैर करने के लिए भी घर से बाहर नहीं जा रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार वह अब दिन में दो बार पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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सर्दियों में बढ़ जाते हैं 30 प्रतिशत मरीज
बीके अस्पताल के सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि काला दमा व अस्थमा, मरीजों के लिए प्रदूषण और कम तापमान खतरनाक होता है। अन्य माह की अपेक्षा सर्दियों के चार महीनों (नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी) में अस्पतालों में इनकी संख्या 30 फीसदी तक बढ़ जाती है।

यह है लक्षण
- तेजी से सांस लेना।
- बलगम के साथ खांसी आना।
- सीने में इंफेक्शन व जकड़न होना।
- कमजोरी आ जाना

इन सावधानियों को बरतें
- मरीजों को हमेशा गर्म कपड़े पहनने चाहिए
- बाहर निकलने पर नाक और मुंह को कवर जरूर करें
- अस्थमा और काला दमा पीड़ितों के कमरे में अंदर धूपबत्ती न जलाएं।
- घरों में अंगीठी, हीटर आदि के प्रदूषण से मरीज को बचाएं।
- मरीज के लिए सप्ताह में तीन से चार बार 45-45 मिनट के लिए व्यायाम बेहद आवश्यक है।
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