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Faridabad News: सस्ते दामों में धान खरीद कर दूसरी मंडी में सरकारी खरीद पर बेच रहे आढ़ती
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सरकारी धान की खरीद में घोटाला शुरू
किसान संगठनों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच कर केस दर्ज करने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर की अनाज मंडी में शनिवार को शुरू हुई धान की सरकारी खरीद में मंडी अधिकारियों के साथ मिलकर कमीशन पर काम कर रहे आढ़तियों ने किसानों को चूना लगाकर सरकारी खरीद में घोटाला शुरू कर दिया है। आढ़ती सस्ते दामों में धान खरीद कर दूसरी मंडी में सरकारी खरीद पर बेच रहे हैं।
किसानों को चूना लगाने के मामले में किसान संगठनों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच कर केस दर्ज करने की मांग की हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में मंडी में 20 हजार क्विंटल धान घोटाले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग भी की है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में 11 अक्तूबर को मंडी अधिकारियों व खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने मंडी आढ़तियों के साथ मिलकर फर्जी 120 गेट पासों के जरिये धान की सरकारी खरीद में 20 हजार क्विंटल धान घोटाला कर दिया। घोटाले की गुप्त सूचना के आधार पर सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर घोटाले का खुलासा कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी लेकिन तीन वर्ष बाद भी आरोपियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के तत्कालीन डीएसपी राजेश चेची ने बताया कि वर्ष 2022 में मंडी में हुए धान घोटाले में सब कुछ हवा में होता है न तो किसान मिले और न ही धरातल पर धान की फसल मौजूद थी। ट्रकों के माध्यम से रात के अंधेरे में हजारों क्विंटल के बिना फसल के गेट पास कटवा दिए जाते थे। बाद में सस्ते दामों पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश से खरीद कर धान को सीधा मिल में पहुंचा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि धान घोटाले में किसान से लेकर खरीद एजेंसी व मंडी अधिकारी और व्यापारी शामिल होते हैं।
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शनिवार को मंडी में आढ़तियों ने सस्ते दामों पर किसानों की धान की फसल को खरीद कर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली सरकारी खरीद में दूसरी मंडी में बोरियों में भरकर पहुंचा दिया। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सैनी के आदेश के बाद भी 22 सितंबर को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली किसानों की धान की फसल की खरीद शुरू नहीं की। किसान संगठन के नेता देवेंद्र नंबरदार, रमन पंखिया ने बताया कि व्यापारी वर्ग किसानों के साथ अन्याय करने में जुटा हुआ है। जहां किसानों की फसल को तोड़ते समय लगभग दो से तीन किलोग्राम अधिक फसल को नमी के नाम पर तुलाई कर दी जाती है। अब व्यापारी किसानों की फसल को सस्ते दामों में खरीद कर सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री कर किसान को चूना लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन के लोग इस मामले को लेकर जल्द अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री नायब सिंह से मुलाकात कर मंडी अधिकारियों के अलावा घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
वर्जन
मंडी में शनिवार शाम तक 85 हजार पीआर धान की खरीद निजी एजेंसियों द्वारा की गई जबकि पांच हजार क्विंटल मोटे धान की खरीद निजी एजेंसियों के माध्यम से हुई है। शनिवार को फसल में नमी होने के कारण खरीद एजेंसी वेयरहाउस ने किसानों की 60 क्विंटल धान की फसल को सरकारी रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा है। - विद्यासागर, मंडी सचिव होडल
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किसान संगठनों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच कर केस दर्ज करने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर की अनाज मंडी में शनिवार को शुरू हुई धान की सरकारी खरीद में मंडी अधिकारियों के साथ मिलकर कमीशन पर काम कर रहे आढ़तियों ने किसानों को चूना लगाकर सरकारी खरीद में घोटाला शुरू कर दिया है। आढ़ती सस्ते दामों में धान खरीद कर दूसरी मंडी में सरकारी खरीद पर बेच रहे हैं।
किसानों को चूना लगाने के मामले में किसान संगठनों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच कर केस दर्ज करने की मांग की हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में मंडी में 20 हजार क्विंटल धान घोटाले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग भी की है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में 11 अक्तूबर को मंडी अधिकारियों व खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने मंडी आढ़तियों के साथ मिलकर फर्जी 120 गेट पासों के जरिये धान की सरकारी खरीद में 20 हजार क्विंटल धान घोटाला कर दिया। घोटाले की गुप्त सूचना के आधार पर सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर घोटाले का खुलासा कर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी लेकिन तीन वर्ष बाद भी आरोपियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया।
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मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के तत्कालीन डीएसपी राजेश चेची ने बताया कि वर्ष 2022 में मंडी में हुए धान घोटाले में सब कुछ हवा में होता है न तो किसान मिले और न ही धरातल पर धान की फसल मौजूद थी। ट्रकों के माध्यम से रात के अंधेरे में हजारों क्विंटल के बिना फसल के गेट पास कटवा दिए जाते थे। बाद में सस्ते दामों पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश से खरीद कर धान को सीधा मिल में पहुंचा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि धान घोटाले में किसान से लेकर खरीद एजेंसी व मंडी अधिकारी और व्यापारी शामिल होते हैं।
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शनिवार को मंडी में आढ़तियों ने सस्ते दामों पर किसानों की धान की फसल को खरीद कर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली सरकारी खरीद में दूसरी मंडी में बोरियों में भरकर पहुंचा दिया। वहीं, मुख्यमंत्री नायब सैनी के आदेश के बाद भी 22 सितंबर को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली किसानों की धान की फसल की खरीद शुरू नहीं की। किसान संगठन के नेता देवेंद्र नंबरदार, रमन पंखिया ने बताया कि व्यापारी वर्ग किसानों के साथ अन्याय करने में जुटा हुआ है। जहां किसानों की फसल को तोड़ते समय लगभग दो से तीन किलोग्राम अधिक फसल को नमी के नाम पर तुलाई कर दी जाती है। अब व्यापारी किसानों की फसल को सस्ते दामों में खरीद कर सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री कर किसान को चूना लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन के लोग इस मामले को लेकर जल्द अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री नायब सिंह से मुलाकात कर मंडी अधिकारियों के अलावा घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
वर्जन
मंडी में शनिवार शाम तक 85 हजार पीआर धान की खरीद निजी एजेंसियों द्वारा की गई जबकि पांच हजार क्विंटल मोटे धान की खरीद निजी एजेंसियों के माध्यम से हुई है। शनिवार को फसल में नमी होने के कारण खरीद एजेंसी वेयरहाउस ने किसानों की 60 क्विंटल धान की फसल को सरकारी रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा है। - विद्यासागर, मंडी सचिव होडल