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Faridabad News: अफगानिस्तान के नागरिक ने फरीदाबाद के फर्जी पते पर बनवाया भारतीय पासपोर्ट
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1983 में सरकार से आवंटित हुआ था मकान, जांच में खुला फर्जी पते का खेल
सचिन कुमार
फरीदाबाद। कमिश्नरेट फरीदाबाद में पासपोर्ट की पुन: तस्दीक के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने और नवीनीकरण कराने का मामला सामने आया है। थाना सारन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार तकदीर सिंह, जो मूल रूप से अफगानिस्तान का निवासी बताया गया है और गमनजीत कौर नामक महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर में दोनों आरोपियों के बीच किसी रिश्ते का उल्लेख नहीं किया गया है।
प्राथमिकी के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कमिश्नरेट फरीदाबाद में पहले से बने पासपोर्ट की दोबारा तस्दीक की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान एक पासपोर्ट नंबर की जांच की गई, जो तकदीर सिंह के नाम पर जारी हुआ था। जांच में पाया गया कि तकदीर सिंह मूल रूप से अफगानिस्तान का निवासी है। उसके नाम से पहले दिल्ली से पासपोर्ट नंबर 20 सितंबर 2007 को जारी हुआ था।
2018 में फरीदाबाद के पते से कराया नवीनीकरण
प्राथमिकी के मुताबिक तकदीर सिंह ने 13 अप्रैल 2018 को मकान नंबर 113, न्यू जनता कॉलोनी, एनआईटी फरीदाबाद का पता दर्शाकर पासपोर्ट का नवीनीकरण कराया था। जांच के दौरान इसी पते पर जारी एक अन्य पासपोर्ट भी सामने आया। यह पासपोर्ट नंबर गमनजीत कौर के नाम से 18 जनवरी 2018 को जारी किया गया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि यह पासपोर्ट भी न्यू जनता कॉलोनी स्थित मकान नंबर के पते पर तस्दीक के बाद जारी हुआ था। एक ही पते पर दोनों के दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस को संदेह हुआ और मामले की गहन जांच शुरू की गई।
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पुन: सत्यापन पर पता चला की 1983 से एक ही परिवार के कब्जे में है मकान
पुलिस द्वारा दोबारा सत्यापन किए जाने पर जांच टीम न्यू जनता कॉलोनी स्थित एक मकान पर पहुंची। वहां नरेश सलूजा नंद अपने परिवार सहित रहते मिले। उन्होंने पुलिस को बताया कि यह मकान उन्हें वर्ष 1983 में सरकार द्वारा आवंटित किया गया था और तभी से वे अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। पुन: तस्दीक के दौरान यह सत्यापित नहीं हुआ कि तकदीर सिंह और गमनजीत कौर कभी इस मकान में खुद रहे हों या किरायेदार के तौर पर रहे हों। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों द्वारा गलत आवासीय पता इस्तेमाल किए जाने की बात दर्ज की है।
गलत जानकारी और पता छुपाकर पासपोर्ट लेने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने अपनी नागरिकता और आवासीय जानकारी छुपाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किए। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने गलत पते के दस्तावेज जमा कर महत्वपूर्ण जानकारी छुपाई, जिसके आधार पर पासपोर्ट जारी और नवीनीकरण कराया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दस्तावेज तैयार कराने और सत्यापन प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
डीसीपी की अनुमति के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
थाना सारन के प्रबंधक अफसर ब्रह्म सिंह ने मामले की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस उपायुक्त एनआईटी को भेजी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों आरोपियों ने धोखाधड़ी से गलत जानकारी देकर पासपोर्ट हासिल किए हैं। पुलिस उपायुक्त से अनुमति मिलने के बाद सात मई को थाना सारन में धारा 420, पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1)(ए) और 12(1)(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। कमिश्नरेट फरीदाबाद में पासपोर्ट की पुन: तस्दीक के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने और नवीनीकरण कराने का मामला सामने आया है। थाना सारन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार तकदीर सिंह, जो मूल रूप से अफगानिस्तान का निवासी बताया गया है और गमनजीत कौर नामक महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर में दोनों आरोपियों के बीच किसी रिश्ते का उल्लेख नहीं किया गया है।
प्राथमिकी के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कमिश्नरेट फरीदाबाद में पहले से बने पासपोर्ट की दोबारा तस्दीक की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान एक पासपोर्ट नंबर की जांच की गई, जो तकदीर सिंह के नाम पर जारी हुआ था। जांच में पाया गया कि तकदीर सिंह मूल रूप से अफगानिस्तान का निवासी है। उसके नाम से पहले दिल्ली से पासपोर्ट नंबर 20 सितंबर 2007 को जारी हुआ था।
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2018 में फरीदाबाद के पते से कराया नवीनीकरण
प्राथमिकी के मुताबिक तकदीर सिंह ने 13 अप्रैल 2018 को मकान नंबर 113, न्यू जनता कॉलोनी, एनआईटी फरीदाबाद का पता दर्शाकर पासपोर्ट का नवीनीकरण कराया था। जांच के दौरान इसी पते पर जारी एक अन्य पासपोर्ट भी सामने आया। यह पासपोर्ट नंबर गमनजीत कौर के नाम से 18 जनवरी 2018 को जारी किया गया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि यह पासपोर्ट भी न्यू जनता कॉलोनी स्थित मकान नंबर के पते पर तस्दीक के बाद जारी हुआ था। एक ही पते पर दोनों के दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस को संदेह हुआ और मामले की गहन जांच शुरू की गई।
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पुन: सत्यापन पर पता चला की 1983 से एक ही परिवार के कब्जे में है मकान
पुलिस द्वारा दोबारा सत्यापन किए जाने पर जांच टीम न्यू जनता कॉलोनी स्थित एक मकान पर पहुंची। वहां नरेश सलूजा नंद अपने परिवार सहित रहते मिले। उन्होंने पुलिस को बताया कि यह मकान उन्हें वर्ष 1983 में सरकार द्वारा आवंटित किया गया था और तभी से वे अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। पुन: तस्दीक के दौरान यह सत्यापित नहीं हुआ कि तकदीर सिंह और गमनजीत कौर कभी इस मकान में खुद रहे हों या किरायेदार के तौर पर रहे हों। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों द्वारा गलत आवासीय पता इस्तेमाल किए जाने की बात दर्ज की है।
गलत जानकारी और पता छुपाकर पासपोर्ट लेने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने अपनी नागरिकता और आवासीय जानकारी छुपाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किए। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने गलत पते के दस्तावेज जमा कर महत्वपूर्ण जानकारी छुपाई, जिसके आधार पर पासपोर्ट जारी और नवीनीकरण कराया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दस्तावेज तैयार कराने और सत्यापन प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
डीसीपी की अनुमति के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
थाना सारन के प्रबंधक अफसर ब्रह्म सिंह ने मामले की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस उपायुक्त एनआईटी को भेजी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों आरोपियों ने धोखाधड़ी से गलत जानकारी देकर पासपोर्ट हासिल किए हैं। पुलिस उपायुक्त से अनुमति मिलने के बाद सात मई को थाना सारन में धारा 420, पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1)(ए) और 12(1)(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।