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Faridabad News: भीषण गर्मी में एसी बन रहे आग का गोला

Mon, 25 May 2026 11:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 11:57 PM IST
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ACs are turning into fireballs in the scorching heat
सर्विसिंग न कराना, घटिया वायरिंग और अप्रशिक्षित तकनीशियनों से मरम्मत कराना पड़ रहा है भारी
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (एसी) अब आम लोगों की जरूरत बन चुका है। पिछले दिनों जिस तरह एसी में ब्लास्ट के मामले सामने आए हैं, उसने लोगों को चिंता में डाल दिया है। एसी की वजह से लगने वाली आग जानलेवा साबित हो रही है। एसी में आग की घटनाएं ऐसे ही नहीं हो रही हैं, इसमें लोगों की लापरवाही, हादसे से बचाव की जानकारी न होना बहुत बड़ा कारण है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एसी की समय पर सर्विसिंग न कराना, घटिया वायरिंग और अप्रशिक्षित तकनीशियनों से मरम्मत करवाना बड़े हादसों को न्योता दे रहा है। इंजीनियर हिमांशू शर्मा के अनुसार भीषण गर्मी में एसी लगातार चलने के कारण ओवरहीट हो जाते हैं। इससे उनके अंदर शॉर्ट सर्किट होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि कई लोग पैसे बचाने के लिए सस्ते और बिना प्रशिक्षित तकनीशियनों से काम कराते हैं, जो सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते। कई मामलों में वायरिंग के साथ छेड़छाड़ और खराब मरम्मत कार्य आग लगने की वजह बनते हैं।
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लोगों का कहना है कि एसी सर्विसिंग और मरम्मत कार्य करने वाले तकनीशियनों के लिए प्रशासन की ओर से कोई सख्त नियम या नीति नहीं है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति बिना तकनीकी प्रशिक्षण के यह काम शुरू कर देता है, जो कई बार जानलेवा साबित हो रहा है।
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हाल ही में दिल्ली के विवेक विहार इलाके में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग में नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी से जुड़ी तकनीकी खामियों की आशंका जताई गई थी। इसके अलावा डबुआ थाना क्षेत्र के ई-ब्लॉक में 25 अप्रैल को एसी में शॉर्ट सर्किट से घर में आग लग गई थी, जिसमें घर का अधिकांश सामान जल गया। वहीं, फ्लोरिडा सोसाइटी के टावर-एच में एसी स्टेबलाइजर में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई थी। लोगों और सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। इससे पहले ग्रीन फील्ड कॉलोनी में एसी कंप्रेसर फटने से लगी आग में एक ही परिवार के तीन लोगों की दम घुटने से मौत हो गई थी। विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित सर्विसिंग कराने, बिजली उपकरणों की जांच करवाने और एसी को लंबे समय तक बिना निगरानी चालू न छोड़ने की सलाह दी है।



फायर विभाग को रोजाना मिल रही 8 से 10 फायर कॉल



फरीदाबाद में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंचते ही आग लगने की घटनाओं में तेजी आने लगती है। सेक्टर-20 स्थित फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार मई-जून के दौरान हर दिन औसतन 8 से 10 फायर कॉल मिल रही हैं। इनमें बड़ी संख्या शॉर्ट सर्किट, एसी ओवरलोड और बिजली उपकरणों से जुड़ी होती है। एनआईटी, डबुआ, ओल्ड फरीदाबाद और घनी आबादी वाली कॉलोनियों में पुराने मकानों की वायरिंग सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई है। कई घरों और दुकानों में अब भी कम क्षमता वाले तारों पर हाई पावर एसी चलाए जा रहे हैं। फायर कर्मियों का कहना है कि अधिकांश मामलों में समय पर सर्विसिंग और सही अर्थिंग होने पर हादसे टाले जा सकते हैं।


फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच नियमित रूप से नहीं हो रही

ग्रेटर फरीदाबाद, सेक्टर-75 से 89 की सोसाइटियों और एनआईटी के बाजार क्षेत्रों में गर्मी के दौरान बिजली लोड कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में फ्लैटों में लगातार 14 से 18 घंटे तक एसी चल रहे हैं। इसके बावजूद कई सोसाइटियों में फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच नियमित रूप से नहीं हो रही। ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ के पुराने बाजारों में भी तारों का जाल और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर चिंता का कारण बने हुए हैं। बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि लोकल स्तर पर अनट्रेंड मैकेनिकों से मरम्मत करवाने से एसी, स्टेबलाइजर और एमसीबी में खराबी बढ़ रही है जिससे आग लगने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

एसी ब्लास्ट के कुछ कारण

. जानबूझकर एसी को 15 से 24 घंटे तक लगातार चलाने से कंप्रेशर पर लोड पड़ता है। कंप्रेशन ज्यादा गर्म होने से एसी फटने की संभावना बनी रहती है।

. एसी की आउट डोर यूनिट को यदि सही हवा आने-जाने वाले स्थान या सीधे धूप वाले स्थान पर लगाया जाए तो हादसे की संभावना बनी रहती है।

. कूलिंग कॉइल पर गंदगी जमने के कारण कंप्रेशर को ज्यादा ताकत से काम करना पड़ता है, यह भी एक वजह बन सकती है।

. एसी के कंप्रेशर की एक्सपायरी डेट होती है। लंबे समय तक पुराने एसी को चलाना भी खतरे की वजह हो सकता है।

. लूज कनेक्शन, खराब बिजली के तार, क्षमता से कम बिजली के तार और कमजोर एक्सटेंशन बोर्ड भी हादसों की वजह बनते हैं।

. आर-32 और आर 410-ए गैस हाई प्रेशर वाली गैस हैं, एसी की इन गैस के रिसाव को नजरअंदाज करने से भी खतरा बढ़ जाता है।

. मार्केट में एसी में इस्तेमाल होने वाली नकली गैस भी मौजूद होती है। उसे एसी में डालने से भी खतरा बढ़ जाता है।

. कमरे के क्षेत्रफल के अनुसार यदि सही घनत्व (टन) का एसी नहीं लगाया तो अपने आप बिना कट हुए लगातार चलता रहता है, इससे खतरा बना रहता है।

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हादसे से बचने के लिए इन बातों का रखें ख्याल...

-एसी लगातार चलाने से बचें। कुछ घंटों के बाद एसी को 20 से 25 मिनट का आराम देकर दोबारा चलाएं।

. रात के समय टाइमर लगाकर लगातार एसी चलाने से बचा जा सकता है, इससे बिजली की बचत भी होगी।

. एसी को 16 डिग्री पर करके न चलाएं, 24 से 26 डिग्री पर चलाने से एसी कट होगा और कंप्रेशर को आराम मिलेगा।

. एसी के तार को अच्छे सॉकेट में लगाकर उसमें बढि़या क्वालिटी की एमसीबी लगवाएं।

. एसी की एमसीबी बार-बार ट्रिप हो रही हो तो एसी को बंद कर दें और मैकेनिक को बुलवाकर जांच करवाएं।

. वोल्टेज का उतार-चढ़ाव होता हो तो बढि़या क्वालिटी का स्टेबलाइजर लगाकर ही एसी चलवाएं।

. कुछ जलने की गंध या स्पार्किंग की आवाज आए तो तुरंत एसी को बंद कर दें।

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एसी में आग लगे तो क्या करें...

. एसी में आग लगती है तो सबसे पहले तुरंत मेन स्विच से घर की बिजली को बंद कर दें।

. 112 पर दमकल केंद्र को सूचना देकर तुरंत परिवार के साथ घर से निकल जाएं।

. आग बुझाने के लिए पानी का इस्तेमाल न कर रेत या किसी अन्य वस्तु का इस्तेमाल
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