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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   A four-lane bridge will be built over the Budhiya drain, closing the gap between Sector 45 and Greenfield.

Faridabad News: बुढ़िया नाले पर बनेगा फोर लेन पुल, सेक्टर-45 और ग्रीन फील्ड के बीच खत्म होगी दूरी

Fri, 05 Jun 2026 12:30 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:30 AM IST
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A four-lane bridge will be built over the Budhiya drain, closing the gap between Sector 45 and Greenfield.
फरीदाबाद बुढ़िया नाले की फाइल फोटो। - फोटो : 1
केंद्रीय राज्यमंत्री ने सीएम के समक्ष रखी थी मांग, दिशा की बैठक में भी उठा था मुद्दा
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आईआईटी दिल्ली या रुड़की से करवाई जाएगी डिजाइन की जांच


मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी समस्याओं में से एक का समाधान अब धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। सेक्टर-45 और ग्रीन फील्ड कॉलोनी के बीच बहने वाले बुढ़िया नाले पर प्रस्तावित फोर लेन पुल के निर्माण की दिशा में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्राधिकरण ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), सिविल एवं स्ट्रक्चरल डिजाइन, एप्रोच रोड डिजाइन और निर्माण के दौरान तकनीकी निगरानी के लिए तकनीकी पहलुओं पर काम शुरू कर दिया है। यह परियोजना केवल एक पुल तक सीमित नहीं है, बल्कि फरीदाबाद के दो बड़े रिहायशी क्षेत्रों के बीच वर्षों से चली आ रही भौगोलिक बाधा को समाप्त करने वाली योजना मानी जा रही है। वर्तमान में बुढ़िया नाला दोनों इलाकों के बीच प्राकृतिक अवरोध बना हुआ है, जिसके कारण लोगों को कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
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पुल निर्माण की आवश्यकता को सबसे पहले 3 अप्रैल 2026 को आयोजित फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की सातवीं बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर परियोजना की व्यवहार्यता जांचने के निर्देश दिए गए। 12 मई को दिशा समिति की बैठक में भी कृष्णपाल गुर्जर ने एचएसवीपी अधिकारियों को इस परियोजना पर तत्काल कार्रवाई करने और निर्माण की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जून के पहले सप्ताह में तकनीकी पहलुओं पर काम शुरू कर दिया गया है।
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रोजाना हजारों लोगों को झेलनी पड़ती है परेशानी

सेक्टर-45, ग्रीन फील्ड कॉलोनी, सेक्टर-46, 47, 48, सूरजकुंड रोड क्षेत्र और आसपास की अनेक कॉलोनियों के लोगों को वर्तमान में सीधा संपर्क मार्ग नहीं मिलने के कारण अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों को रोजाना वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार कुछ मिनटों की दूरी तय करने के लिए 20 से 30 मिनट अतिरिक्त लग जाते हैं। पीक आवर्स में आसपास के संपर्क मार्गों और प्रमुख चौराहों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे जाम की स्थिति बनती है। इसका असर आपातकालीन सेवाओं पर भी पड़ता है। एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों को भी लंबा चक्कर लगाकर घटनास्थल तक पहुंचना पड़ता है।

सर्वे में ट्रैफिक से लेकर पानी के बहाव तक होगी जांच

एचएसवीपी द्वारा नियुक्त एजेंसी को सबसे पहले विस्तृत साइट सर्वे करना होगा। इसके तहत टोपोग्राफिकल सर्वे के जरिए इलाके की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। ट्रैफिक सर्वे में मौजूदा और भविष्य के यातायात दबाव का आकलन किया जाएगा ताकि पुल की चौड़ाई और क्षमता तय की जा सके। इसके अलावा हाइड्रोलॉजिकल स्टडी भी कराई जाएगी जिसमें बुढ़िया नाले में पानी के बहाव, वर्षा के दौरान जलस्तर और संभावित बाढ़ की परिस्थितियों का विश्लेषण किया जाएगा। मिट्टी की गुणवत्ता और नींव की क्षमता का परीक्षण भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

पुल के साथ एप्रोच रोड, फुटपाथ और ड्रेनेज की भी योजना

डीपीआर में केवल पुल नहीं बल्कि उससे जुड़ी संपूर्ण आधारभूत संरचना को शामिल किया जाएगा। सलाहकार एजेंसी को पुल के फाउंडेशन, पियर्स, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, फुटपाथ, जंक्शन सुधार और ड्रेनेज सिस्टम का डिजाइन तैयार करना होगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टर और स्ट्रीट लाइटिंग की भी विस्तृत योजना बनाई जाएगी। पुल के आसपास लैंडस्केपिंग और पौधारोपण के प्रस्ताव भी रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। परियोजना के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं का प्रबंधन होगा। इसलिए सलाहकार एजेंसी को मार्ग में आने वाली सीवर लाइन, पेयजल पाइपलाइन, बिजली के खंभों और टेलीकॉम केबलों की पहचान कर उनकी शिफ्टिंग की योजना भी तैयार करनी होगी ताकि निर्माण के दौरान नागरिक सुविधाएं प्रभावित न हों।

आईआईटी दिल्ली या रुड़की से होगी तकनीकी जांच

एचएसवीपी ने परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान किए हैं। प्राधिकरण की तरफ से पुल के स्ट्रक्चरल डिजाइन और ड्राइंग की थर्ड पार्टी वीटिंग आईआईटी दिल्ली या आईआईटी रुड़की से करवाई जाएगी। इससे डिजाइन की सुरक्षा, मजबूती और तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल बनने के बाद कई इलाकों के बीच की दूरी मिनटों में सिमट जाएगी। सेक्टर-45, ग्रीन फील्ड कॉलोनी, सेक्टर-46, 47, 48, सूरजकुंड रोड क्षेत्र को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे न केवल लोगों का समय और ईंधन बचेगा, बल्कि आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी कम होगा। स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

वर्जन

यहां पर फोर लेन का पुल बनाया जाएगा। इससे लोगों को लंबा चक्कर काटकर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय व पेट्रोल की बचत के साथ जाम से भी राहत मिलेगी। -संदीप दहिया, एसई एचएसवीपी
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