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Faridabad News: भूपानी में बनेगा डॉग शेल्टर, 1000 कुत्तों की होगी क्षमता
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-8 महीने में तैयार होगा, नसबंदी और टीकाकरण की भी होगी व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में लावारिस कुत्तों की समस्या और डॉग बाइट की घटनाओं से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम ने भूपानी गांव में एक एकड़ जमीन पर आधुनिक डॉग शेल्टर बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह शेल्टर शहर का पहला संगठित और हाईटेक केंद्र होगा जहां बेसहारा कुत्तों के रखरखाव से लेकर उनके उपचार तक की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
नगर निगम की पहल को लंबे समय से उठ रही जन शिकायतों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। शहर की कई कॉलोनियों और सेक्टरों में लावारिस कुत्तों के झुंड लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे थे। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या गंभीर हो चुकी थी। ऐसे में भूपानी में बनने वाला यह केंद्र कुत्तों को सुरक्षित ठिकाना देने के साथ शहर की सड़कों को भी अधिक सुरक्षित बनाएगा।
प्रस्तावित डॉग शेल्टर भूपानी गांव में गोशाला के पास स्थित एक एकड़ खाली जमीन पर बनाया जाएगा। आबादी से थोड़ी दूरी पर होने के कारण यहां कुत्तों के शोर से लोगों को परेशानी नहीं होगी। वहीं खुले वातावरण में पशुओं के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराई जा सकेंगी। यहां कुत्तों के लिए मजबूत सीमेंट कंक्रीट की फ्लोरिंग, ईंटों से बने सुरक्षित शेड और जी.एस. शीट की छत तैयार की जाएगी। पानी की निरंतर आपूर्ति के लिए 5 एचपी का सबमर्सिबल पंप लगाया जाएगा, जबकि बिजली के लिए 6 किलोवाट का अलग कनेक्शन दिया जाएगा। रात के समय सुरक्षा और निगरानी के लिए पूरे परिसर में एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, स्टाफ के लिए पांच एसी पोर्टा केबिन भी बनाए जाएंगे।
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नसबंदी और टीकाकरण पर रहेगा जोर
इसका उद्देश्य लावारिस कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना भी है। शेल्टर में कुत्तों की नसबंदी के लिए अभियान चलाया जाएगा। इससे न केवल उनकी संख्या नियंत्रित होगी, बल्कि रेबीज जैसी बीमारियों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि अब तक शहर में ऐसी कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी, जहां बड़े स्तर पर कुत्तों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा सके। इस केंद्र के शुरू होने के बाद लावारिस कुत्तों को पकड़कर यहां रखा जाएगा और उनके व्यवहार में सुधार के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा।
परियोजना प्रक्रिया और समयसीमा तय
नगर निगम ने इस परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी औपचारिकताएं 30 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एजेंसी को 8 महीने का समय दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रक्रिया पूरी होते ही काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। शहर में आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासी लंबे समय से लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कई इलाकों में लोगों ने विरोध भी जताया था। ऐसे में यह परियोजना समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
यह डॉग शेल्टर केवल एक शुरुआत है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इसकी क्षमता और बढ़ा दी जाएगी ताकि शहर को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।- डालचंद, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में लावारिस कुत्तों की समस्या और डॉग बाइट की घटनाओं से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम ने भूपानी गांव में एक एकड़ जमीन पर आधुनिक डॉग शेल्टर बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह शेल्टर शहर का पहला संगठित और हाईटेक केंद्र होगा जहां बेसहारा कुत्तों के रखरखाव से लेकर उनके उपचार तक की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
नगर निगम की पहल को लंबे समय से उठ रही जन शिकायतों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। शहर की कई कॉलोनियों और सेक्टरों में लावारिस कुत्तों के झुंड लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे थे। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या गंभीर हो चुकी थी। ऐसे में भूपानी में बनने वाला यह केंद्र कुत्तों को सुरक्षित ठिकाना देने के साथ शहर की सड़कों को भी अधिक सुरक्षित बनाएगा।
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प्रस्तावित डॉग शेल्टर भूपानी गांव में गोशाला के पास स्थित एक एकड़ खाली जमीन पर बनाया जाएगा। आबादी से थोड़ी दूरी पर होने के कारण यहां कुत्तों के शोर से लोगों को परेशानी नहीं होगी। वहीं खुले वातावरण में पशुओं के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराई जा सकेंगी। यहां कुत्तों के लिए मजबूत सीमेंट कंक्रीट की फ्लोरिंग, ईंटों से बने सुरक्षित शेड और जी.एस. शीट की छत तैयार की जाएगी। पानी की निरंतर आपूर्ति के लिए 5 एचपी का सबमर्सिबल पंप लगाया जाएगा, जबकि बिजली के लिए 6 किलोवाट का अलग कनेक्शन दिया जाएगा। रात के समय सुरक्षा और निगरानी के लिए पूरे परिसर में एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, स्टाफ के लिए पांच एसी पोर्टा केबिन भी बनाए जाएंगे।
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नसबंदी और टीकाकरण पर रहेगा जोर
इसका उद्देश्य लावारिस कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना भी है। शेल्टर में कुत्तों की नसबंदी के लिए अभियान चलाया जाएगा। इससे न केवल उनकी संख्या नियंत्रित होगी, बल्कि रेबीज जैसी बीमारियों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि अब तक शहर में ऐसी कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी, जहां बड़े स्तर पर कुत्तों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा सके। इस केंद्र के शुरू होने के बाद लावारिस कुत्तों को पकड़कर यहां रखा जाएगा और उनके व्यवहार में सुधार के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा।
परियोजना प्रक्रिया और समयसीमा तय
नगर निगम ने इस परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी औपचारिकताएं 30 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एजेंसी को 8 महीने का समय दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रक्रिया पूरी होते ही काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। शहर में आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासी लंबे समय से लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कई इलाकों में लोगों ने विरोध भी जताया था। ऐसे में यह परियोजना समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
यह डॉग शेल्टर केवल एक शुरुआत है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इसकी क्षमता और बढ़ा दी जाएगी ताकि शहर को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।- डालचंद, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम