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गंदगी फैलाने पर 180 डेयरियों का चालान कटा
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गंदगी फैलाने पर 180 डेयरियों का चालान कटा
फरीदाबाद। रिहायशी इलाके में डेयरी संचालन कर गंदगी फैलाने वाले 180 लोगों को नगर निगम प्रशासन की ओर से चालान काटा। निगम प्रशासन ने फरवरी-मार्च के बीच प्रतिदिन औसतन दो डेयरी संचालकों का चालान किया है। इन संचालकों को पांच हजार रुपये तक जुर्माना भरने के साथ दोबारा गंदगी नहीं करने का शपथपत्र भी देना होगा।
रिहायशी इलाकों में खुली डेयरी, भैंस पालन केंद्र के कारण फैलने वाली गंदगी के खिलाफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए दिसंबर 2018 में कार्रवाई का आदेश दिया था। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता दीपक किंगर ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर शहर में रिहायशी इलाकों में चलाई जा रही डेयरियों के खिलाफ फरवरी माह से अभियान शुरू किया गया था। दो माह में कुल 21 दिन छापामारी की गई। इस दौरान 180 डेयरी संचालकों का चालान काटा गया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग दिनों में अधिकतम बीस और न्यूनतम पांच चालान काटे गए। डेयरी संचालक गोबर व अन्य कूड़ा नालियों में बहा देते हैं जिससे क्षेत्र में आए दिन नाली और सीवर जाम की समस्या पैदा हो जाती है और स्थानीय लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गोबर के कारण इलाके में मक्खी-मच्छरों की तादाद भी बढ़ जाती है जो कई तरह की बीमारियों का कारण बनती हैं।
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फरीदाबाद। रिहायशी इलाके में डेयरी संचालन कर गंदगी फैलाने वाले 180 लोगों को नगर निगम प्रशासन की ओर से चालान काटा। निगम प्रशासन ने फरवरी-मार्च के बीच प्रतिदिन औसतन दो डेयरी संचालकों का चालान किया है। इन संचालकों को पांच हजार रुपये तक जुर्माना भरने के साथ दोबारा गंदगी नहीं करने का शपथपत्र भी देना होगा।
रिहायशी इलाकों में खुली डेयरी, भैंस पालन केंद्र के कारण फैलने वाली गंदगी के खिलाफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए दिसंबर 2018 में कार्रवाई का आदेश दिया था। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता दीपक किंगर ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर शहर में रिहायशी इलाकों में चलाई जा रही डेयरियों के खिलाफ फरवरी माह से अभियान शुरू किया गया था। दो माह में कुल 21 दिन छापामारी की गई। इस दौरान 180 डेयरी संचालकों का चालान काटा गया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग दिनों में अधिकतम बीस और न्यूनतम पांच चालान काटे गए। डेयरी संचालक गोबर व अन्य कूड़ा नालियों में बहा देते हैं जिससे क्षेत्र में आए दिन नाली और सीवर जाम की समस्या पैदा हो जाती है और स्थानीय लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गोबर के कारण इलाके में मक्खी-मच्छरों की तादाद भी बढ़ जाती है जो कई तरह की बीमारियों का कारण बनती हैं।
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