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नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी को नहीं पता अपने
Updated Fri, 13 Jul 2018 09:36 PM IST
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नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी को नहीं पता अपने अधिकार
- आरटीआई में एमओएच की योग्यता, अधिकार और उत्तरदायित्व की मांगी जानकारी
- आरटीआई कार्यकर्ता को चार माह बाद भी नहीं दिया जवाब, राज्य सूचना आयोग में की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी के कर्तव्य क्या हैं, इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य शाखा के अधिकारियों को नहीं है। स्लॉटर हाउस, मछली बाजार, गोशालाओं के संबंध में प्रावधान की भी जानकारी अधिकारियों को नहीं है। आरटीआई में पूछे गए सवालों का जवाब निगम अधिकारी नहीं दे पाए। आरटीआई कार्यकर्ता ने जवाब पाने के लिए अब राज्य सूचना आयोग में अपील की है।
सामाजिक संस्था आरटीआई एक्टिविस्ट एंड सिटिजन वॉयस एसोसिएशन के कार्यकर्ता रवींद्र चावला कहते हैं कि नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी का पद है। इसकी योग्यता एमबीबीएस होनी चाहिए लेकिन यहां इंजीनियर तैनात हैैं। उन्होंने आरटीआई लगाकर पूछा कि हरियाणा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 की किस धारा के तहत नगर निगम फरीदाबाद में स्वास्थ्य अधिकारी (एमओएच) की तैनाती की गई, एमओएच की शैक्षणिक योग्यता क्या है। एक्ट की किन धाराओं में एमओएच की ड्यूटी का प्रावधान है और उसकी ड्यूटी क्या हैं। इसके अलावा उन्होंने जानकारी मांगी कि नगर निगम क्षेत्राधिकारी में कितने स्लॉटर हाउस और मछली बाजार हैं, 2017 से अब तक एमओएच ने कितने स्लॉटर हाउस, मछली बाजार की जांच की कि यहां कटने वाले जानवर, मछली खाने लायक हैं या नहीं। नगर निगम में चलने वाले बर्फ कारखानों की बर्फ खाने लायक है या नहीं इसकी जांच अब तक कितनी बार हुई। नगर निगम क्षेत्र में आने वाली जितनी गोशालाओं को निगम की ओर से अनुदान दिया जा रहा है। उनमें एमओएच ने कितनी बार जाकर पशुधन की जांच की।
26 अप्रैल से जुलाई 2018 के बीच नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा से जो जवाब मिला उसमें एमओएच की तैनाती, अधिकारी और उत्तरदायित्व की कोई जानकारी नहीं दी गई। स्लॉटर हाउस और मछली बाजार के बारे में जवाब दिया गया कि यह एफएसएसएआई के क्षेत्राधिकार में आता है। रवींद्र चावला कहते हैं कि एफएसएसएआई खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े कारखानों और उत्पादों की जांच करता है न कि कटने जा रहे जिंदा जानवर या मछलियों की। उनके मुताबिक, नगर निगम का एमओएच ही स्लॉटर हाउस में कटने जा रहे पशुओं के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें कटने योग्य या अयोग्य घोषित करता है, इसी तरह मछलियों की जांच भी उसकी ड्यूटी है। निगम अधिकारी बर्फ कारखाने के बारे में भी सही जवाब नहीं दे पाए। सही जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने पहली अपील की। प्रथम अपील अधिकारी संयुक्त आयुक्त संदीप अग्रवाल सुनवाई में मौजूद नहीं थे, इस पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील लगाई है।
- आरटीआई में एमओएच की योग्यता, अधिकार और उत्तरदायित्व की मांगी जानकारी
- आरटीआई कार्यकर्ता को चार माह बाद भी नहीं दिया जवाब, राज्य सूचना आयोग में की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी के कर्तव्य क्या हैं, इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य शाखा के अधिकारियों को नहीं है। स्लॉटर हाउस, मछली बाजार, गोशालाओं के संबंध में प्रावधान की भी जानकारी अधिकारियों को नहीं है। आरटीआई में पूछे गए सवालों का जवाब निगम अधिकारी नहीं दे पाए। आरटीआई कार्यकर्ता ने जवाब पाने के लिए अब राज्य सूचना आयोग में अपील की है।
सामाजिक संस्था आरटीआई एक्टिविस्ट एंड सिटिजन वॉयस एसोसिएशन के कार्यकर्ता रवींद्र चावला कहते हैं कि नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी का पद है। इसकी योग्यता एमबीबीएस होनी चाहिए लेकिन यहां इंजीनियर तैनात हैैं। उन्होंने आरटीआई लगाकर पूछा कि हरियाणा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 की किस धारा के तहत नगर निगम फरीदाबाद में स्वास्थ्य अधिकारी (एमओएच) की तैनाती की गई, एमओएच की शैक्षणिक योग्यता क्या है। एक्ट की किन धाराओं में एमओएच की ड्यूटी का प्रावधान है और उसकी ड्यूटी क्या हैं। इसके अलावा उन्होंने जानकारी मांगी कि नगर निगम क्षेत्राधिकारी में कितने स्लॉटर हाउस और मछली बाजार हैं, 2017 से अब तक एमओएच ने कितने स्लॉटर हाउस, मछली बाजार की जांच की कि यहां कटने वाले जानवर, मछली खाने लायक हैं या नहीं। नगर निगम में चलने वाले बर्फ कारखानों की बर्फ खाने लायक है या नहीं इसकी जांच अब तक कितनी बार हुई। नगर निगम क्षेत्र में आने वाली जितनी गोशालाओं को निगम की ओर से अनुदान दिया जा रहा है। उनमें एमओएच ने कितनी बार जाकर पशुधन की जांच की।
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26 अप्रैल से जुलाई 2018 के बीच नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा से जो जवाब मिला उसमें एमओएच की तैनाती, अधिकारी और उत्तरदायित्व की कोई जानकारी नहीं दी गई। स्लॉटर हाउस और मछली बाजार के बारे में जवाब दिया गया कि यह एफएसएसएआई के क्षेत्राधिकार में आता है। रवींद्र चावला कहते हैं कि एफएसएसएआई खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े कारखानों और उत्पादों की जांच करता है न कि कटने जा रहे जिंदा जानवर या मछलियों की। उनके मुताबिक, नगर निगम का एमओएच ही स्लॉटर हाउस में कटने जा रहे पशुओं के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें कटने योग्य या अयोग्य घोषित करता है, इसी तरह मछलियों की जांच भी उसकी ड्यूटी है। निगम अधिकारी बर्फ कारखाने के बारे में भी सही जवाब नहीं दे पाए। सही जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने पहली अपील की। प्रथम अपील अधिकारी संयुक्त आयुक्त संदीप अग्रवाल सुनवाई में मौजूद नहीं थे, इस पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में दूसरी अपील लगाई है।
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