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Faridabad News: साढ़े तीन में लिए 75 नमूने, 8 मिले फेल
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। साल 2024 में जनवरी से 15 अप्रैल तक 75 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें चीनी, गुड़, कुट्टू का आटा, दूध, मावा, मक्खन, पनीर, तेल और ठंडे पेय पदार्थों के सैंपल लिए जा चुके हैं। आगामी दिनों में अभियान को तेज किया जाएगा। हालांकि अधिकारियों की कमी से जूझ रहा खाद्य सुरक्षा विभाग जांच में तेजी नहीं ला पा रहा है।
जिले में पूर्ण रूप से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग के लिए तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जरूरत है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास केवल एक ही अधिकारी मौजूद हैं। डॉ. सचिन शर्मा पर फरीदाबाद के अलावा पलवल का भी कार्यभार है। फिलहाल शिकायत के आधार पर सैंपलिंग की जाती है। अशुद्ध और नकली ब्रांड के खाद्य पदार्थों को बेचने वाले दुकानदारों से विभाग के अधिकारी ग्राहक बनकर सैंपल एकत्रित करते हैं। इसके बाद इन्हें जांच के लिए भेजा जाता है। बता दें कि फेल सैम्पल तीन तरह के होते हैं। इनमें अनसेफ, मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड शामिल है। सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर ही जुर्माना तय किया जाता है। अनसेफ में छह महीने की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना, मिस ब्रांड सैंपल पाए जाने पर तीन लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। वहीं सब स्टैंडर्ड पर एक से लेकर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।
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अशुद्ध पेय पदार्थों पर बंदिश नहीं
अप्रैल की शुरूआत तेज धूप और गर्मी के साथ हुई है। दिन में अधिकतम तापमान 37 से पहुंच रहा है। गर्मी से बचाव के लिए पेय पदार्थों के नाम पर अशुद्ध चीजें परोसी जा रही है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। शिकंजी, लस्सी, जूस, मैंगो शेक, कच्ची बर्फ और ठंडे पानी की खुलेआम बिक्री हो रही है। ठेलों में बिकने वाली बर्फ को बच्चे चाव से खाते हैं। बर्फ की चुस्की में कई तरह के रंग मिलाए जाते हैं। मिठास के लिए सस्ती चीजों का प्रयोग किया जा रहा है। इन पेय पदार्थों के दुष्प्रभाव से एनीमिया और अपच जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।
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वर्जन
दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति होनी है। इसकी स्वीकृति मिल गई है, लेकिन अभी अधिकारियों की ज्वाइनिंग नहीं हो पाई है। गर्मी में ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, कई दुकानदार इन्हें गंदगी से तैयार करते हैं, इनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। अधिकारियों की संख्या बढ़ते ही अभियान में तेजी आएगी।
- पृथ्वी सिंह, नामित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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फरीदाबाद। साल 2024 में जनवरी से 15 अप्रैल तक 75 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें चीनी, गुड़, कुट्टू का आटा, दूध, मावा, मक्खन, पनीर, तेल और ठंडे पेय पदार्थों के सैंपल लिए जा चुके हैं। आगामी दिनों में अभियान को तेज किया जाएगा। हालांकि अधिकारियों की कमी से जूझ रहा खाद्य सुरक्षा विभाग जांच में तेजी नहीं ला पा रहा है।
जिले में पूर्ण रूप से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग के लिए तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जरूरत है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास केवल एक ही अधिकारी मौजूद हैं। डॉ. सचिन शर्मा पर फरीदाबाद के अलावा पलवल का भी कार्यभार है। फिलहाल शिकायत के आधार पर सैंपलिंग की जाती है। अशुद्ध और नकली ब्रांड के खाद्य पदार्थों को बेचने वाले दुकानदारों से विभाग के अधिकारी ग्राहक बनकर सैंपल एकत्रित करते हैं। इसके बाद इन्हें जांच के लिए भेजा जाता है। बता दें कि फेल सैम्पल तीन तरह के होते हैं। इनमें अनसेफ, मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड शामिल है। सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर ही जुर्माना तय किया जाता है। अनसेफ में छह महीने की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना, मिस ब्रांड सैंपल पाए जाने पर तीन लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। वहीं सब स्टैंडर्ड पर एक से लेकर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।
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अशुद्ध पेय पदार्थों पर बंदिश नहीं
अप्रैल की शुरूआत तेज धूप और गर्मी के साथ हुई है। दिन में अधिकतम तापमान 37 से पहुंच रहा है। गर्मी से बचाव के लिए पेय पदार्थों के नाम पर अशुद्ध चीजें परोसी जा रही है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। शिकंजी, लस्सी, जूस, मैंगो शेक, कच्ची बर्फ और ठंडे पानी की खुलेआम बिक्री हो रही है। ठेलों में बिकने वाली बर्फ को बच्चे चाव से खाते हैं। बर्फ की चुस्की में कई तरह के रंग मिलाए जाते हैं। मिठास के लिए सस्ती चीजों का प्रयोग किया जा रहा है। इन पेय पदार्थों के दुष्प्रभाव से एनीमिया और अपच जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।
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दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति होनी है। इसकी स्वीकृति मिल गई है, लेकिन अभी अधिकारियों की ज्वाइनिंग नहीं हो पाई है। गर्मी में ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, कई दुकानदार इन्हें गंदगी से तैयार करते हैं, इनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। अधिकारियों की संख्या बढ़ते ही अभियान में तेजी आएगी।
- पृथ्वी सिंह, नामित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग