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फ्लैग: अरावली बचेगी तो दिल्ली-एनसीआर में बचेगा जीवन
Updated Sun, 15 Jul 2018 06:20 PM IST
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अरावली संरक्षण को एकजुट हुए पर्यावरण प्रेमी
फरीदाबाद। अवैध खनन, निर्माण, पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण से विश्व की प्राचीनतम पहाड़ियों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने रविवार सुबह वाक फॉर अरावली परिक्रमा यात्रा की। यात्रा में दिल्ली-एनसीआर और दूसरे शहरों से आए लोगों ने बैनर, पोस्टर, प्लेकॉर्ड के जरिए अरावली संरक्षण का संदेश दिया।
अरावली पहाड़ियां औद्योगिक शहर के सूरजकुंड इलाके में मौजूद हैं। शहर के पर्यावरण प्रेमी अरावली संरक्षण के लिए सेव फरीदाबाद नामक ग्रुप से जुड़े हैं। इस ग्रुप में दिल्ली एनसीआर और अन्य शहरों के पर्यावरण प्रेमी भी जुड़ रहे हैं। बारिश शुरू होने पर अरावली क्षेत्र में पौधरोपण, प्राकृतिक जलकुंडों के संरक्षण की प्रेरणा और संरक्षित क्षेत्र में अवैध क्रियाकलाप के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को ग्रुप के लोगों ने वाक फॉर अरावली यात्रा निकाली।
सैनिक कॉलोनी मोड़ पर सुबह आठ बजे एकत्र हुए पर्यावरण प्रेमियों में जट्टारी, अलीगढ़ (यूपी) के राजेश शर्मा ने बताया कि अरावली पहाड़ियों का दिल्ली एनसीआर का मौसम निर्धारण करने में बड़ी भूमिका रहती है, यदि यह पहाड़ियां खत्म हो गईं तो राजस्थान से आने वाली रेतीली और गर्म हवाएं दिल्ली एनसीआर को अपनी चपेट में ले लेंगी।
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पलवल के रवि ने बताया कि दिल्ली एनसीआर देश का सबसे प्रदूषित इलाका है, इन शहरों से निकलने वाले प्रदूषणकारी तत्वों में साठ फीसदी से अधिक यहीं अरावली और इसकी प्रकृति अवशोषित कर लेती है। यदि यह प्राकृतिक संरचना नहीं रही तो दिल्ली एनसीआर में सांस लेना मुश्किल होगा।
एनआईटी पांच की प्रमिला चौधरी ने कहा कि फरीदाबाद-गुरुग्राम की अरावली संरक्षित क्षेत्र में होने के बावजूद इसका लगातार दोहन किया जा रहा है। अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण से इसको नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अरावली संरक्षक के नाम से मशहूर सुनील हरसाना ने कहा कि शासन और प्रशासन की अनदेखी से अरावली की वनस्पति और जीव जंतुओं का प्राकृतिक आवास समाप्त होता जा रहा है, इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। पवन भारद्वाज और विष्णु गोयल ने अरावली को धरोहर के रूप में संरक्षित कर अगली पीढ़ियों को सौंपने के लिए सबको एकजुट होने को कहा।
सैनिक कॉलोनी से बड़खल तक निकली यात्रा
सेव फरीदाबाद ग्रुप की वाक फॉर अरावली यात्रा गुरुग्राम रोड स्थित सैनिक कॉलोनी मोड़ से शुरू हुई। यहां से पाली चौक, मानव रचना यूनिवर्सिटी चौक होते हुए अनखीर चौक होते हुए सेक्टर बड़खल झील की पार्किंग तक पहुंची। यात्रा के दौरान अरावली बचाओ, प्रशासन जगाओ, अरावली है तो पर्यावरण है-अरावली है तो भूजल है, निगम आयुक्त मो. शाईन की घोषणाओं को याद दिलाते क्या हुआ तेरा वादा नाम के बैनर में अवैध निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई। यात्रा में सागर दुआ, अखिल चड्ढा, राजेश, किशन, दीपक, धीरज हिंदुस्तानी, वीरप्रताप शर्मा, आरिफ खान, भारत, चंद्रपाल भारद्वाज और सौरव भारद्वाज शामिल रहे।
नन्हे-मुन्नों ने भी दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
वाक फॉर अरावली में शामिल हुए नन्हे-मुन्नों ने भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कक्षा पांच की छात्रा तमन्ना गोयल का कहना था कि पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलती है इसलिए इन्हें काटना नहीं चाहिए। पिता धीरज राणा के साथ यात्रा में शामिल होने आई कक्षा दो की भूमि राणा ने बताया कि जंगल हमारे अच्छे मित्र हैं। इनके कटने से हमारा जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए इन्हें बचाना चाहिए। इनके अलाव दृष्टि गोयल, गर्वित गोयल आदि बच्चे शामिल हुए।
फरीदाबाद। अवैध खनन, निर्माण, पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण से विश्व की प्राचीनतम पहाड़ियों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने रविवार सुबह वाक फॉर अरावली परिक्रमा यात्रा की। यात्रा में दिल्ली-एनसीआर और दूसरे शहरों से आए लोगों ने बैनर, पोस्टर, प्लेकॉर्ड के जरिए अरावली संरक्षण का संदेश दिया।
अरावली पहाड़ियां औद्योगिक शहर के सूरजकुंड इलाके में मौजूद हैं। शहर के पर्यावरण प्रेमी अरावली संरक्षण के लिए सेव फरीदाबाद नामक ग्रुप से जुड़े हैं। इस ग्रुप में दिल्ली एनसीआर और अन्य शहरों के पर्यावरण प्रेमी भी जुड़ रहे हैं। बारिश शुरू होने पर अरावली क्षेत्र में पौधरोपण, प्राकृतिक जलकुंडों के संरक्षण की प्रेरणा और संरक्षित क्षेत्र में अवैध क्रियाकलाप के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को ग्रुप के लोगों ने वाक फॉर अरावली यात्रा निकाली।
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सैनिक कॉलोनी मोड़ पर सुबह आठ बजे एकत्र हुए पर्यावरण प्रेमियों में जट्टारी, अलीगढ़ (यूपी) के राजेश शर्मा ने बताया कि अरावली पहाड़ियों का दिल्ली एनसीआर का मौसम निर्धारण करने में बड़ी भूमिका रहती है, यदि यह पहाड़ियां खत्म हो गईं तो राजस्थान से आने वाली रेतीली और गर्म हवाएं दिल्ली एनसीआर को अपनी चपेट में ले लेंगी।
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पलवल के रवि ने बताया कि दिल्ली एनसीआर देश का सबसे प्रदूषित इलाका है, इन शहरों से निकलने वाले प्रदूषणकारी तत्वों में साठ फीसदी से अधिक यहीं अरावली और इसकी प्रकृति अवशोषित कर लेती है। यदि यह प्राकृतिक संरचना नहीं रही तो दिल्ली एनसीआर में सांस लेना मुश्किल होगा।
एनआईटी पांच की प्रमिला चौधरी ने कहा कि फरीदाबाद-गुरुग्राम की अरावली संरक्षित क्षेत्र में होने के बावजूद इसका लगातार दोहन किया जा रहा है। अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण से इसको नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अरावली संरक्षक के नाम से मशहूर सुनील हरसाना ने कहा कि शासन और प्रशासन की अनदेखी से अरावली की वनस्पति और जीव जंतुओं का प्राकृतिक आवास समाप्त होता जा रहा है, इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। पवन भारद्वाज और विष्णु गोयल ने अरावली को धरोहर के रूप में संरक्षित कर अगली पीढ़ियों को सौंपने के लिए सबको एकजुट होने को कहा।
सैनिक कॉलोनी से बड़खल तक निकली यात्रा
सेव फरीदाबाद ग्रुप की वाक फॉर अरावली यात्रा गुरुग्राम रोड स्थित सैनिक कॉलोनी मोड़ से शुरू हुई। यहां से पाली चौक, मानव रचना यूनिवर्सिटी चौक होते हुए अनखीर चौक होते हुए सेक्टर बड़खल झील की पार्किंग तक पहुंची। यात्रा के दौरान अरावली बचाओ, प्रशासन जगाओ, अरावली है तो पर्यावरण है-अरावली है तो भूजल है, निगम आयुक्त मो. शाईन की घोषणाओं को याद दिलाते क्या हुआ तेरा वादा नाम के बैनर में अवैध निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई। यात्रा में सागर दुआ, अखिल चड्ढा, राजेश, किशन, दीपक, धीरज हिंदुस्तानी, वीरप्रताप शर्मा, आरिफ खान, भारत, चंद्रपाल भारद्वाज और सौरव भारद्वाज शामिल रहे।
नन्हे-मुन्नों ने भी दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
वाक फॉर अरावली में शामिल हुए नन्हे-मुन्नों ने भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कक्षा पांच की छात्रा तमन्ना गोयल का कहना था कि पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलती है इसलिए इन्हें काटना नहीं चाहिए। पिता धीरज राणा के साथ यात्रा में शामिल होने आई कक्षा दो की भूमि राणा ने बताया कि जंगल हमारे अच्छे मित्र हैं। इनके कटने से हमारा जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए इन्हें बचाना चाहिए। इनके अलाव दृष्टि गोयल, गर्वित गोयल आदि बच्चे शामिल हुए।