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Faridabad News: जिले से 6 माह में 4 प्रशिक्षकों के तबादले हुए
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- शहर के खिलाड़ियों को एक भी नया कोच नहीं मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर के सेक्टर-12 स्थित राज्य खेल परिसर से कोचों के तबादले का कार्य जारी है। पिछले 6 माह में 4 कोचों को पलवल भेज दिया गया है। जबकि इसके बदले शहर के खिलाड़ियों को कोई नया कोच भी नहीं दिया गया है। इसकी शुरुआत करीब 6 माह पहले मार्च में तीरंदाजी कोच दीपक अहलावत के स्थानांतरण से हुई थी।
इसके बाद एक-दो माह के भीतर ही बास्केटबॉल और टेबल टेनिस कोच का भी स्थानांतरण कर दिया गया था। वहीं अब इसी माह करीब 4-5 दिनों पहले एथलेटिक्स कोच धर्मेंद्र का भी पलवल स्थानांतरण कर दिया गया है। विशेष बात यह है कि इन सभी कोचों का स्थानांतरण पलवल ही किया गया है। इन सभी चीजों का प्रभाव खिलाड़ियों और अकादमी पर पड़ रहा है।
2023 में शुरू की गई तीरंदाजी नर्सरी की हालत कोच के जाने के बाद तो बेहद खराब हो गई है। बड़ी-बड़ी घास और टारगेट टूटे पड़े हैं। वहीं बास्केटबॉल में कोर्ट की फर्श जहां-तहां टूटी पड़ी हुई है। खिलाड़ियों ने भी आना कम कर दिया है। तो ऐसे में बिना कोच के अकादमियां धीरे-धीरे जंगल में तब्दील होती जा रही हैं।
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वर्जन
स्थानांतरण सरकार का फैसला है। उस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन कोचों के बदले नए कोच जरूर आएंगे पर उसमें थोड़ा सा समय लग सकता है।-आशा रानी, खेल अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर के सेक्टर-12 स्थित राज्य खेल परिसर से कोचों के तबादले का कार्य जारी है। पिछले 6 माह में 4 कोचों को पलवल भेज दिया गया है। जबकि इसके बदले शहर के खिलाड़ियों को कोई नया कोच भी नहीं दिया गया है। इसकी शुरुआत करीब 6 माह पहले मार्च में तीरंदाजी कोच दीपक अहलावत के स्थानांतरण से हुई थी।
इसके बाद एक-दो माह के भीतर ही बास्केटबॉल और टेबल टेनिस कोच का भी स्थानांतरण कर दिया गया था। वहीं अब इसी माह करीब 4-5 दिनों पहले एथलेटिक्स कोच धर्मेंद्र का भी पलवल स्थानांतरण कर दिया गया है। विशेष बात यह है कि इन सभी कोचों का स्थानांतरण पलवल ही किया गया है। इन सभी चीजों का प्रभाव खिलाड़ियों और अकादमी पर पड़ रहा है।
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2023 में शुरू की गई तीरंदाजी नर्सरी की हालत कोच के जाने के बाद तो बेहद खराब हो गई है। बड़ी-बड़ी घास और टारगेट टूटे पड़े हैं। वहीं बास्केटबॉल में कोर्ट की फर्श जहां-तहां टूटी पड़ी हुई है। खिलाड़ियों ने भी आना कम कर दिया है। तो ऐसे में बिना कोच के अकादमियां धीरे-धीरे जंगल में तब्दील होती जा रही हैं।
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स्थानांतरण सरकार का फैसला है। उस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन कोचों के बदले नए कोच जरूर आएंगे पर उसमें थोड़ा सा समय लग सकता है।-आशा रानी, खेल अधिकारी