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Faridabad News: खाद्य पदार्थों के 30 फीसदी नमूने फेल
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मिलावटखोरों का खेल, मिठाई, पनीर और देसी घी की गुणवत्ता पर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में मिलावटखोरी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। खासकर त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पनीर, देसी घी और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के आंकड़े भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले में एक जनवरी 2024 से 10 अक्तूबर 2026 तक लिए गए 332 नमूनों में से 101 फेल पाए गए यानी करीब 30.4 प्रतिशत नमूने गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
आरोप हैं कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ कारोबारी मिलावटी खोया, नकली रंग और घटिया तेल का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ड्राई मिल्क से खोया तैयार करने और वनस्पति, रिफाइंड तेल व खुशबू मिलाकर देसी घी बनाने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच और निगरानी जरूरी हो जाती है।
होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज गार्डन के नमूनों में भी गड़बड़ी
विवाह समारोह और अन्य आयोजनों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक जनवरी 2020 से
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10 अक्तूबर 2026 तक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, बैंक्वेट हॉल और मैरिज गार्डन से 35 नमूने लिए गए। इनमें से 12 नमूने फेल पाए गए। यह कुल नमूनों का करीब 34 प्रतिशत है। इससे आयोजनों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत सामने आती है।
निजी अस्पतालों से पौने सात साल में छह नमूने
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के मामले में निजी अस्पतालों की निगरानी भी सीमित रही है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, करीब पौने सात साल में निजी अस्पतालों से खाद्य पदार्थों के केवल छह नमूने लिए गए, जिनमें से एक नमूना फेल आया। अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता के लिहाज से यह आंकड़ा निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हर महीने 100 से अधिक नमूने लेने की तैयारी
पहले जिले में महीनेभर में करीब 25 नमूने लिए जाते थे। अब त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा निगरानी अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के निर्देशों के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने भी जिला अधिकारियों को नमूने लेने की कार्रवाई बढ़ाने को कहा है। विभाग अब हर महीने 100 से अधिक नमूने लेने की तैयारी कर रहा है।
125 मामले कोर्ट में लंबित
विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस कारोबार करने, असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने और नमूने फेल होने से जुड़े कुल 262 मामले अदालत में दर्ज किए गए। इनमें से 137 मामलों में निर्णय हो चुका है, जबकि 125 मामले अभी लंबित हैं।
मिलावट से पेट, लिवर और किडनी पर असर
मेडिकल अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुमित वर्मा ने बताया कि मिलावटी मिठाइयों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक हानिकारक मिलावटी पदार्थों का सेवन लिवर और किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। लोगों को विश्वसनीय दुकानों से मिठाइयां खरीदनी चाहिए और उनकी गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
नियमित जांच से लगेगी मिलावट पर लगाम
सामाजिक कार्यकर्ता अजय सैनी ने कहा कि नमूने लेने की कार्रवाई में तेजी लाने के साथ मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। नियमित जांच और कार्रवाई से ऐसे कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
त्योहारों के दौरान कार्रवाई बढ़ाई जाती है : अधिकारी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पदेन अधिकारी पृथ्वी सिंह ने बताया कि विभाग नियमित रूप से नमूने लेता है और त्योहारों के दौरान छापों की कार्रवाई बढ़ाई जाती है। नमूने फेल होने पर अदालत में मामला दर्ज कराया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कम कीमत के लालच में खराब गुणवत्ता वाली मिठाइयां न खरीदें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में मिलावटखोरी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। खासकर त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पनीर, देसी घी और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के आंकड़े भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले में एक जनवरी 2024 से 10 अक्तूबर 2026 तक लिए गए 332 नमूनों में से 101 फेल पाए गए यानी करीब 30.4 प्रतिशत नमूने गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
आरोप हैं कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ कारोबारी मिलावटी खोया, नकली रंग और घटिया तेल का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ड्राई मिल्क से खोया तैयार करने और वनस्पति, रिफाइंड तेल व खुशबू मिलाकर देसी घी बनाने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जांच और निगरानी जरूरी हो जाती है।
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होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज गार्डन के नमूनों में भी गड़बड़ी
विवाह समारोह और अन्य आयोजनों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक जनवरी 2020 से
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10 अक्तूबर 2026 तक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, बैंक्वेट हॉल और मैरिज गार्डन से 35 नमूने लिए गए। इनमें से 12 नमूने फेल पाए गए। यह कुल नमूनों का करीब 34 प्रतिशत है। इससे आयोजनों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत सामने आती है।
निजी अस्पतालों से पौने सात साल में छह नमूने
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के मामले में निजी अस्पतालों की निगरानी भी सीमित रही है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, करीब पौने सात साल में निजी अस्पतालों से खाद्य पदार्थों के केवल छह नमूने लिए गए, जिनमें से एक नमूना फेल आया। अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता के लिहाज से यह आंकड़ा निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हर महीने 100 से अधिक नमूने लेने की तैयारी
पहले जिले में महीनेभर में करीब 25 नमूने लिए जाते थे। अब त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा निगरानी अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के निर्देशों के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने भी जिला अधिकारियों को नमूने लेने की कार्रवाई बढ़ाने को कहा है। विभाग अब हर महीने 100 से अधिक नमूने लेने की तैयारी कर रहा है।
125 मामले कोर्ट में लंबित
विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस कारोबार करने, असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने और नमूने फेल होने से जुड़े कुल 262 मामले अदालत में दर्ज किए गए। इनमें से 137 मामलों में निर्णय हो चुका है, जबकि 125 मामले अभी लंबित हैं।
मिलावट से पेट, लिवर और किडनी पर असर
मेडिकल अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुमित वर्मा ने बताया कि मिलावटी मिठाइयों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक हानिकारक मिलावटी पदार्थों का सेवन लिवर और किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। लोगों को विश्वसनीय दुकानों से मिठाइयां खरीदनी चाहिए और उनकी गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
नियमित जांच से लगेगी मिलावट पर लगाम
सामाजिक कार्यकर्ता अजय सैनी ने कहा कि नमूने लेने की कार्रवाई में तेजी लाने के साथ मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। नियमित जांच और कार्रवाई से ऐसे कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
त्योहारों के दौरान कार्रवाई बढ़ाई जाती है : अधिकारी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पदेन अधिकारी पृथ्वी सिंह ने बताया कि विभाग नियमित रूप से नमूने लेता है और त्योहारों के दौरान छापों की कार्रवाई बढ़ाई जाती है। नमूने फेल होने पर अदालत में मामला दर्ज कराया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कम कीमत के लालच में खराब गुणवत्ता वाली मिठाइयां न खरीदें।