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Faridabad News: गैस संकट से 2500 ढाबे-रेस्टोरेंट प्रभावित, 30 हजार कर्मचारियों पर संकट
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ढाबे-रेस्टोरेंट संचालकों ने कुछ कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा, कुछ छोटे स्टॉल अस्थायी रूप से बंद
सचिन कुमार
फरीदाबाद। शहर में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति का असर अब सीधे रोजगार और छोटे कारोबार पर दिखाई देने लगा है। छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडरों का काम आधा रह गया है, जिससे करीब 30 हजार कर्मचारियों की आय प्रभावित हो रही है।
फरीदाबाद में छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, ढाबे, मिठाई की दुकानें, कैटरिंग यूनिट और स्ट्रीट फूड वेंडरों की संख्या करीब 2500 मानी जाती है। इनसे सीधे तौर पर लगभग 30 हजार लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। इनमें रसोइये, हेल्पर, डिलीवरी स्टाफ, वेटर, सफाई कर्मचारी, बर्तन धोने वाले, सप्लाई से जुड़े लोग और अस्थायी मजदूर शामिल हैं। संचालकों के अनुसार सामान्य दिनों में एक मध्यम आकार के ढाबे या रेस्टोरेंट में 8 से 15 लोग काम करते हैं, जबकि बड़े रेस्टोरेंट में 25 से 40 तक कर्मचारी होते हैं। गैस की कमी के चलते अब काम आधा रह गया।
तीन वक्त की जगह दो वक्त ही बन रहा खाना
ढाबे-रेस्टोरेंट संचालकों को सिलिंडर समय पर नहीं मिल पाने की वजह से पूरे दिन किचन चलाना संभव नहीं हो पा रहा है। कई जगह केवल सुबह और शाम ही खाना बनाया जा रहा है, जबकि कुछ ढाबों ने सुबह की शिफ्ट ही बंद कर दी है। स्ट्रीट फूड वेंडरों के सामने स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि उनके पास अतिरिक्त सिलिंडर रखने की क्षमता नहीं होती।
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पूरा मेन्यू उपलब्ध नहीं करा पा रहे संचालक
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एक रेस्टोरेंट संचालक के अनुसार पहले रोजाना 8 से 10 सिलिंडर की खपत होती थी, लेकिन अब 2 से 3 सिलिंडर में ही काम चलाना पड़ रहा है। इसके कारण ग्राहक लौट रहे हैं क्योंकि पूरा मेन्यू उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
वेतन नहीं दे पाने की वजह से छुट्टी पर भेजा गया स्टाफ
व्यवसायियों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि आय घट गई है लेकिन खर्चों में कोई कमी नहीं आई। हर महीने दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, कच्चे माल का भुगतान और लाइसेंस फीस देनी पड़ती है। कई जगहों पर स्टाफ की ड्यूटी कम कर दी गई है, कुछ को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा गया है, जबकि कई कर्मचारियों को आधा वेतन देने की बात कही गई है। दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। उन्हें काम नहीं मिलने पर उसी दिन की आय समाप्त हो जाती है।
चाट, चाय और मोमोज स्टॉल अस्थायी रूप से बंद
फरीदाबाद में बड़ी संख्या में लोग ठेले, रेहड़ी और छोटे फूड स्टॉल लगाकर रोजी कमाते हैं। इनमें से अधिकतर लोग एक-दो सिलिंडर पर ही पूरा काम चलाते हैं। गैस की आपूर्ति बाधित होने से चाट, समोसा, पराठा, चाय, छोले-भटूरे और मोमोज जैसे स्टॉल प्रभावित हुए हैं। कई वेंडरों ने अस्थायी रूप से स्टॉल बंद कर दिए हैं।
संकट लंबा चला तो बढ़ेगी बेरोजगारी
व्यापार मंडल से जुड़े लोगों का कहना है कि फूड कारोबार शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां कम पढ़े-लिखे और बाहर से आए लोग आसानी से रोजगार पा लेते हैं। अगर गैस संकट लंबा चला तो छोटे कारोबारियों के साथ-साथ हजारों कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
इंडक्शन अपनाने पर भी बढ़ा खर्च
गैस की कमी के कारण कुछ रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने अस्थायी समाधान के रूप में इंडक्शन चूल्हे का सहारा लिया है। लेकिन इससे भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इंडक्शन पर खाना बनाने के लिए अलग तरह के स्टील या इंडक्शन बेस वाले बर्तन खरीदने पड़ते हैं। संचालकों के अनुसार एक मध्यम आकार के किचन के लिए 5 से 10 नए बर्तन लेने पड़ते हैं, जिन पर 10 से 20 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसके अलावा बिजली बिल भी बढ़ रहा है।
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गैस सिलिंडर नहीं मिलने से तीन दिन से स्टॉल बंद रखना पड़ रहा है, रोज की कमाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है।- खुर्शीद
पहले एक सिलिंडर से दो दिन काम चल जाता था, अब गैस नहीं मिलने से स्टॉल लगाना भी मुश्किल हो गया है।-धीरज
गैस की कमी के कारण मजबूरी में इंडक्शन चूल्हे लगाए हैं, लेकिन नए बर्तन खरीदने और बिजली बिल बढ़ने से खर्च काफी बढ़ गया है।-अज्जू
गैस की कमी के कारण अब तीन शिफ्ट की जगह सिर्फ सुबह और शाम दो समय ही खाना बना पा रहे हैं। -गुरदीप सिंह बख्शी
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कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता से सुनिश्चित की जा रही है। शेष वितरण को सामान्य करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और शीघ्र ही इनकी स्थिति भी पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगी। - राजेश नागर, मंत्री
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। शहर में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति का असर अब सीधे रोजगार और छोटे कारोबार पर दिखाई देने लगा है। छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडरों का काम आधा रह गया है, जिससे करीब 30 हजार कर्मचारियों की आय प्रभावित हो रही है।
फरीदाबाद में छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, ढाबे, मिठाई की दुकानें, कैटरिंग यूनिट और स्ट्रीट फूड वेंडरों की संख्या करीब 2500 मानी जाती है। इनसे सीधे तौर पर लगभग 30 हजार लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। इनमें रसोइये, हेल्पर, डिलीवरी स्टाफ, वेटर, सफाई कर्मचारी, बर्तन धोने वाले, सप्लाई से जुड़े लोग और अस्थायी मजदूर शामिल हैं। संचालकों के अनुसार सामान्य दिनों में एक मध्यम आकार के ढाबे या रेस्टोरेंट में 8 से 15 लोग काम करते हैं, जबकि बड़े रेस्टोरेंट में 25 से 40 तक कर्मचारी होते हैं। गैस की कमी के चलते अब काम आधा रह गया।
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तीन वक्त की जगह दो वक्त ही बन रहा खाना
ढाबे-रेस्टोरेंट संचालकों को सिलिंडर समय पर नहीं मिल पाने की वजह से पूरे दिन किचन चलाना संभव नहीं हो पा रहा है। कई जगह केवल सुबह और शाम ही खाना बनाया जा रहा है, जबकि कुछ ढाबों ने सुबह की शिफ्ट ही बंद कर दी है। स्ट्रीट फूड वेंडरों के सामने स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि उनके पास अतिरिक्त सिलिंडर रखने की क्षमता नहीं होती।
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पूरा मेन्यू उपलब्ध नहीं करा पा रहे संचालक
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एक रेस्टोरेंट संचालक के अनुसार पहले रोजाना 8 से 10 सिलिंडर की खपत होती थी, लेकिन अब 2 से 3 सिलिंडर में ही काम चलाना पड़ रहा है। इसके कारण ग्राहक लौट रहे हैं क्योंकि पूरा मेन्यू उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
वेतन नहीं दे पाने की वजह से छुट्टी पर भेजा गया स्टाफ
व्यवसायियों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि आय घट गई है लेकिन खर्चों में कोई कमी नहीं आई। हर महीने दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, कच्चे माल का भुगतान और लाइसेंस फीस देनी पड़ती है। कई जगहों पर स्टाफ की ड्यूटी कम कर दी गई है, कुछ को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा गया है, जबकि कई कर्मचारियों को आधा वेतन देने की बात कही गई है। दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। उन्हें काम नहीं मिलने पर उसी दिन की आय समाप्त हो जाती है।
चाट, चाय और मोमोज स्टॉल अस्थायी रूप से बंद
फरीदाबाद में बड़ी संख्या में लोग ठेले, रेहड़ी और छोटे फूड स्टॉल लगाकर रोजी कमाते हैं। इनमें से अधिकतर लोग एक-दो सिलिंडर पर ही पूरा काम चलाते हैं। गैस की आपूर्ति बाधित होने से चाट, समोसा, पराठा, चाय, छोले-भटूरे और मोमोज जैसे स्टॉल प्रभावित हुए हैं। कई वेंडरों ने अस्थायी रूप से स्टॉल बंद कर दिए हैं।
संकट लंबा चला तो बढ़ेगी बेरोजगारी
व्यापार मंडल से जुड़े लोगों का कहना है कि फूड कारोबार शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां कम पढ़े-लिखे और बाहर से आए लोग आसानी से रोजगार पा लेते हैं। अगर गैस संकट लंबा चला तो छोटे कारोबारियों के साथ-साथ हजारों कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
इंडक्शन अपनाने पर भी बढ़ा खर्च
गैस की कमी के कारण कुछ रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने अस्थायी समाधान के रूप में इंडक्शन चूल्हे का सहारा लिया है। लेकिन इससे भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इंडक्शन पर खाना बनाने के लिए अलग तरह के स्टील या इंडक्शन बेस वाले बर्तन खरीदने पड़ते हैं। संचालकों के अनुसार एक मध्यम आकार के किचन के लिए 5 से 10 नए बर्तन लेने पड़ते हैं, जिन पर 10 से 20 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसके अलावा बिजली बिल भी बढ़ रहा है।
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गैस सिलिंडर नहीं मिलने से तीन दिन से स्टॉल बंद रखना पड़ रहा है, रोज की कमाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है।- खुर्शीद
पहले एक सिलिंडर से दो दिन काम चल जाता था, अब गैस नहीं मिलने से स्टॉल लगाना भी मुश्किल हो गया है।-धीरज
गैस की कमी के कारण मजबूरी में इंडक्शन चूल्हे लगाए हैं, लेकिन नए बर्तन खरीदने और बिजली बिल बढ़ने से खर्च काफी बढ़ गया है।-अज्जू
गैस की कमी के कारण अब तीन शिफ्ट की जगह सिर्फ सुबह और शाम दो समय ही खाना बना पा रहे हैं। -गुरदीप सिंह बख्शी
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कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता से सुनिश्चित की जा रही है। शेष वितरण को सामान्य करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और शीघ्र ही इनकी स्थिति भी पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगी। - राजेश नागर, मंत्री