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Faridabad News: भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव में 23 देश लेंगे हिस्सा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल नहीं
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फोटो-
दोनों देशों के पास विज्ञान से संबंधित कोई आधुनिक खोज और व्यापारिक विचार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित टीएचएसटीआई (ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट) में होने वाले नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव की तैयारियां चल रही हैं। विज्ञान महोत्सव में शामिल होने के लिए अफ्रीकी, यूरोपी और एशिया के 23 देशों को निमंत्रण भेजा गया है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान को विज्ञान महोत्सव में शामिल होने का न्योता नहीं भेजा गया है। यह जानकारी टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने तैयारियों का जायजा लेने के दौरान दी। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के पास विज्ञान से संबंधित कोई आधुनिक खोज और व्यापारिक विचार नहीं हैं।
डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में देश आज अनेक देशों से आगे निकल चुका है लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। इसके चलते भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। जिसमें अमेरिका, कुवैत, जर्मनी, फ्रांस, जापान, नांबीबिया, म्यामांर, थाईलैंड, केन्या, मलेशिया सहित विभिन्न देशों के वैज्ञानिक अपनी तकनीक के साथ उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा इन देशों के उद्योगपति भी होंगे। उन्होंने कहा कि आईआईएसएफ का उद्देश्य व्यापक स्तर पर लोगों को प्रेरित करना और छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग के पेशेवरों, उद्यमियों के लिए एक मंच प्रदान करना है। इसके लिए टीएचएसटीआई परिसर में 44 एकड़ में स्टॉल लगाए जाएंगे। इस भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव में अब तक 15 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल होंगे।
इसरो के वैज्ञानिक विद्यार्थियों से होंगे रूबरू
राष्ट्रीय नव प्रवर्तन प्रतिष्ठान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में इसरो के वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। चंद्रयान तीन निर्माण से लेकर उसकी चांद के दक्षिण ध्रुव पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग कराने तक शामिल रहने वाले वैज्ञानिक विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। चंद्रयान की सफलता के अनुभवों को सांझा करेंगे। इसके अलावा उसकी कार्य विधि के बारे में भी बताया जाएगा। महाेत्सव में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रमुखता दी जाएगी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र को विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले वैज्ञानिक अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ सांझा करेंगे। वैज्ञानिकों से मिलने से उनका हौसलाअफजाई होगा व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
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कोरोना रोधी टीका बनाने की विधि सीखेंगे युवा वैज्ञानिक
वैज्ञानिक डाॅ. हरदेव चौधरी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एमवी संतो ने बताया कि टीएचएसटीआई ने कोरोना के समय में कोरोना रोधी टीके के निर्माण में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्य को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। कोरोना रोधी टीके के निर्माण से लेकर उसके ट्रायल के आधार सहित तमाम बातों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में स्टार्टअप को भी आमंत्रित किया गया है। जिससे वह अपने प्रयोगों को विश्व के वैज्ञानिकों के समक्ष पेश कर सकें। डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा गया है, लेकिन उनके कार्यालय से अभी आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। इनके अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरन रिजिजू को निमंत्रण भेजा गया है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों और विश्वविद्यालयों के कुलपति को भी आमंत्रित किया गया है।
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दोनों देशों के पास विज्ञान से संबंधित कोई आधुनिक खोज और व्यापारिक विचार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड स्थित टीएचएसटीआई (ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट) में होने वाले नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव की तैयारियां चल रही हैं। विज्ञान महोत्सव में शामिल होने के लिए अफ्रीकी, यूरोपी और एशिया के 23 देशों को निमंत्रण भेजा गया है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान को विज्ञान महोत्सव में शामिल होने का न्योता नहीं भेजा गया है। यह जानकारी टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने तैयारियों का जायजा लेने के दौरान दी। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के पास विज्ञान से संबंधित कोई आधुनिक खोज और व्यापारिक विचार नहीं हैं।
डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में देश आज अनेक देशों से आगे निकल चुका है लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। इसके चलते भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। जिसमें अमेरिका, कुवैत, जर्मनी, फ्रांस, जापान, नांबीबिया, म्यामांर, थाईलैंड, केन्या, मलेशिया सहित विभिन्न देशों के वैज्ञानिक अपनी तकनीक के साथ उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा इन देशों के उद्योगपति भी होंगे। उन्होंने कहा कि आईआईएसएफ का उद्देश्य व्यापक स्तर पर लोगों को प्रेरित करना और छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग के पेशेवरों, उद्यमियों के लिए एक मंच प्रदान करना है। इसके लिए टीएचएसटीआई परिसर में 44 एकड़ में स्टॉल लगाए जाएंगे। इस भारत अंतरराष्ट्रीय एवं विज्ञान महोत्सव में अब तक 15 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी भी शामिल होंगे।
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इसरो के वैज्ञानिक विद्यार्थियों से होंगे रूबरू
राष्ट्रीय नव प्रवर्तन प्रतिष्ठान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में इसरो के वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। चंद्रयान तीन निर्माण से लेकर उसकी चांद के दक्षिण ध्रुव पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग कराने तक शामिल रहने वाले वैज्ञानिक विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। चंद्रयान की सफलता के अनुभवों को सांझा करेंगे। इसके अलावा उसकी कार्य विधि के बारे में भी बताया जाएगा। महाेत्सव में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रमुखता दी जाएगी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र को विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले वैज्ञानिक अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ सांझा करेंगे। वैज्ञानिकों से मिलने से उनका हौसलाअफजाई होगा व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
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कोरोना रोधी टीका बनाने की विधि सीखेंगे युवा वैज्ञानिक
वैज्ञानिक डाॅ. हरदेव चौधरी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एमवी संतो ने बताया कि टीएचएसटीआई ने कोरोना के समय में कोरोना रोधी टीके के निर्माण में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्य को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। कोरोना रोधी टीके के निर्माण से लेकर उसके ट्रायल के आधार सहित तमाम बातों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में स्टार्टअप को भी आमंत्रित किया गया है। जिससे वह अपने प्रयोगों को विश्व के वैज्ञानिकों के समक्ष पेश कर सकें। डॉ. जयंत भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा गया है, लेकिन उनके कार्यालय से अभी आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। इनके अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरन रिजिजू को निमंत्रण भेजा गया है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों और विश्वविद्यालयों के कुलपति को भी आमंत्रित किया गया है।