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Faridabad News: तीन महीने में 227 किशोरियां बनीं मां...बाल विवाह रोकने की चुनौती बरकरार

Tue, 14 Jul 2026 12:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 12:15 AM IST
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227 adolescent girls became mothers in three months... the challenge of curbing child marriage persists.
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प्रदेश में बाल विवाह रोकने के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में कुप्रथा थमने का नाम नहीं ले रही

कुल 9,873 प्रसव में 2.29 फीसदी मामले किशोर आयु वर्ग के

राहुल राज


फरीदाबाद। प्रदेश में बाल विवाह रोकने के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में यह कुप्रथा थमने का नाम नहीं ले रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 से जून 2026 के बीच जिले में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की 227 किशोरियां मां बनी हैं। तीन महीने में हुए कुल 9,873 प्रसव में यह संख्या 2.29 फीसदी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में गर्भावस्था कई जटिलताओं को जन्म देती है। इसके कारण एनीमिया, हाई रिस्क प्रेगनेंसी, नवजात कुपोषण के मामले बढ़ते हैं।


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच जिले में कुल 9,873 महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। अप्रैल में 3,216 प्रसव हुए। मई में 3,393 प्रसव दर्ज किए गए। जून में 3,264 प्रसव हुए है। इसी अवधि में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की माताओं की संख्या भी चिंताजनक रही। अप्रैल में 28, मई में 164 और जून में 35 किशोरियों ने बच्चों को जन्म दिया है। अकेले मई में किशोरियों के प्रसव के मामले सबसे अधिक मामले सामने आए है जिसने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता बढ़ा दी है।
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बाल विवाह करने पर दो साल की है सजा


प्रदेश में बाल विवाह को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। कानून के अनुसार, प्रदेश में लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर शादी करना कानूनी अपराध है। ऐसा करने या बढ़ावा देने पर 2 साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) अधिनियम के तहत राज्य में बाल विवाह को अमान्य घोषित किया गया है। प्रशासन ने शादियों में उम्र प्रमाण पत्र की जांच अनिवार्य कर दी है और उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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12 विभाग मिलकर कर रहे है मॉनिटरिंग

प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। मुख्यालय स्तर से पोर्टल के माध्यम से सभी मामलों की सीधे मॉनिटरिंग की जाती है। इस व्यवस्था में पुलिस, बाल विवाह निषेध अधिकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कुल 12 विभागों को एकीकृत किया गया है जिससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यदि कहीं बाल विवाह होता है तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना पोर्टल पर देना अनिवार्य किया गया है। सूचना छिपाने या लापरवाही बरतने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में बाल विवाह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही है।




पांच साल में बाल विवाह के 1729 मामले दर्ज

प्रदेश सरकार ने मिशन क्लीन हरियाणा के तहत साल 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रदेश में बाल विवाह से जुड़ी 1,729 शिकायतें दर्ज की गई हैं। सरकार ने मैरिज पैलेस संचालकों, बैंड-बाजा और टेंट व्यवसायियों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों, मंदिर प्रबंधन समितियों और विवाह संपन्न कराने वाले पंडितों से बाल विवाह की सूचना देने की अपील की है।




महीना प्रसव लड़के का जन्म लड़कियों का जन्म
अप्रैल 3216 1704 1512
मई 3393 1757 1636
जून 3264 1743 1521
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