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Faridabad News: नेहरू कॉलोनी में दूसरे दिन भी 20 मकान किए ध्वस्त
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फरीदाबाद नेहरू कॉलोनी में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने पर दुसरे दिन भी मलबा उठाते नगर निगम कर
भारी पुलिस बल के बीच छावनी में बदला इलाका, टूटते आशियानों के बीच बेघर परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
एनजीटी के आदेश और स्लिप रोड निर्माण को लेकर चला प्रशासन का डंडा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी क्षेत्र स्थित नेहरू कॉलोनी में अतिक्रमण हटाओ अभियान दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार तड़के शुरू हुई प्रशासन और नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई रविवार को भी भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चलती रही। रविवार को कुल 20 मकान तोड़े गए। कार्रवाई में मुख्य सड़क से 30 फीट की सीमा में आने वाले मकानों और निर्माणों को तोड़ा जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर मलबा हटाने का काम जारी है। इलाके के हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस बल तैनात है और वाहनों की आवाजाही रोकी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई एनजीटी के निर्देशों और विकास परियोजनाओं के तहत की जा रही है। हालांकि टूटते मकानों और बिखरते सामान के बीच कई परिवारों का दर्द भी सामने आ रहा है। कोई अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है तो कोई बीमार परिजन और बच्चों को लेकर बेबस दिखाई दे रहा है।
मकान टूटने की सूचना मिलते ही आया ब्रेन स्ट्रोक
तोड़फोड़ की कार्रवाई के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर नवीन के परिवार की सामने आई। परिजनों के अनुसार जैसे ही उन्हें मकान टूटने की सूचना मिली, नवीन को अचानक ब्रेन स्ट्रोक आ गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें गंभीर अवस्था में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। नवीन परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। उनके तीन बेटियां और दो बेटे सहित कुल पांच बच्चे हैं। परिवार के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ सिर से छत छिनने का डर और दूसरी तरफ अस्पताल में भर्ती नवीन की जिंदगी बचाने की चिंता। परिजन अस्पताल और घर के बीच लगातार भाग दौड़ कर रहे हैं। आसपास टूटते मकानों की आवाज और घर से सामान निकालते लोगों के बीच नवीन के बच्चे डरे-सहमे नजर आए। परिवार के लोग यही कहते दिखे कि अब इलाज भी कराएं और रहने का इंतजाम भी कैसे करें।
नाकाबंदी के बीच बेबस परिवार
नवीन के परिवार की तरह ही गजराज सिंह का परिवार भी इस कार्रवाई से गहरे संकट में है। गजराज सिंह लंबे समय से लकवाग्रस्त हैं और बिस्तर से उठ भी नहीं सकते। परिवार में पत्नी राजवती, दो बेटे, दो बहुएं, दो पोते और दो पोतियां हैं। राजवती ने बताया कि अचानक तोड़फोड़ की सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार घबरा गया। चारों तरफ पुलिस नाकाबंदी होने से सबसे बड़ी चिंता यह थी कि उनके पति को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने परिवार को तैयारी के लिए समय तक नहीं दिया। घर के बाहर खड़ी जेसीबी और भारी पुलिस बल को देखकर बच्चे भी सहम गए। परिवार बीमारी, छोटे बच्चों और रहने की चिंता के बीच खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है। राजवती बार-बार यही सवाल करती रहीं कि ऐसे हालात में आखिर परिवार जाए तो कहां जाए।
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बच्चों की पढ़ाई, किराया और उजड़ता आशियाना
नेहरू कॉलोनी में रहने वाली 65 वर्षीय पुखराजी देवी की कहानी भी बाकी परिवारों की पीड़ा से जुड़ती नजर आई। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से यहां रह रहा है। पहले भी एक बार मकान तोड़ने का नोटिस मिला था, लेकिन तब कोर्ट जाने और तैयारी करने का समय मिल गया था। इस बार अचानक कार्रवाई शुरू हो गई। उनकी बहू लीलावती ने बताया कि अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर है। बेटा पुनीत दसवीं कक्षा में और बेटी साक्षी चौथी कक्षा में पढ़ती है। परिवार का कहना है कि आसपास किराए के मकानों के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं। ऐसे में नया ठिकाना ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया है। सामान समेटते हुए परिवार के लोग बार-बार यही सवाल पूछते नजर आए कि अब जाएं तो जाएं कहां। टूटते मकानों के बीच यह सवाल इलाके के कई परिवारों की साझा पीड़ा बन गया है।
स्लिप रोड निर्माण शुरू, एक माह में मिलेगा जाम से राहत का समाधान
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने अवैध निर्माण हटाने के बाद स्लिप रोड निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से 10 मीटर चौड़ी और 90 मीटर लंबी स्लिप रोड बनाई जाएगी, जिसे अगले एक माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि दोबारा अतिक्रमण न हो, इसलिए मलबा हटाने के साथ ही निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचा दी गई है।
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एनजीटी के आदेश और स्लिप रोड निर्माण को लेकर चला प्रशासन का डंडा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी क्षेत्र स्थित नेहरू कॉलोनी में अतिक्रमण हटाओ अभियान दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार तड़के शुरू हुई प्रशासन और नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई रविवार को भी भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चलती रही। रविवार को कुल 20 मकान तोड़े गए। कार्रवाई में मुख्य सड़क से 30 फीट की सीमा में आने वाले मकानों और निर्माणों को तोड़ा जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर मलबा हटाने का काम जारी है। इलाके के हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस बल तैनात है और वाहनों की आवाजाही रोकी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई एनजीटी के निर्देशों और विकास परियोजनाओं के तहत की जा रही है। हालांकि टूटते मकानों और बिखरते सामान के बीच कई परिवारों का दर्द भी सामने आ रहा है। कोई अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है तो कोई बीमार परिजन और बच्चों को लेकर बेबस दिखाई दे रहा है।
मकान टूटने की सूचना मिलते ही आया ब्रेन स्ट्रोक
तोड़फोड़ की कार्रवाई के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर नवीन के परिवार की सामने आई। परिजनों के अनुसार जैसे ही उन्हें मकान टूटने की सूचना मिली, नवीन को अचानक ब्रेन स्ट्रोक आ गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें गंभीर अवस्था में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। नवीन परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। उनके तीन बेटियां और दो बेटे सहित कुल पांच बच्चे हैं। परिवार के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ सिर से छत छिनने का डर और दूसरी तरफ अस्पताल में भर्ती नवीन की जिंदगी बचाने की चिंता। परिजन अस्पताल और घर के बीच लगातार भाग दौड़ कर रहे हैं। आसपास टूटते मकानों की आवाज और घर से सामान निकालते लोगों के बीच नवीन के बच्चे डरे-सहमे नजर आए। परिवार के लोग यही कहते दिखे कि अब इलाज भी कराएं और रहने का इंतजाम भी कैसे करें।
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नाकाबंदी के बीच बेबस परिवार
नवीन के परिवार की तरह ही गजराज सिंह का परिवार भी इस कार्रवाई से गहरे संकट में है। गजराज सिंह लंबे समय से लकवाग्रस्त हैं और बिस्तर से उठ भी नहीं सकते। परिवार में पत्नी राजवती, दो बेटे, दो बहुएं, दो पोते और दो पोतियां हैं। राजवती ने बताया कि अचानक तोड़फोड़ की सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार घबरा गया। चारों तरफ पुलिस नाकाबंदी होने से सबसे बड़ी चिंता यह थी कि उनके पति को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने परिवार को तैयारी के लिए समय तक नहीं दिया। घर के बाहर खड़ी जेसीबी और भारी पुलिस बल को देखकर बच्चे भी सहम गए। परिवार बीमारी, छोटे बच्चों और रहने की चिंता के बीच खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है। राजवती बार-बार यही सवाल करती रहीं कि ऐसे हालात में आखिर परिवार जाए तो कहां जाए।
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बच्चों की पढ़ाई, किराया और उजड़ता आशियाना
नेहरू कॉलोनी में रहने वाली 65 वर्षीय पुखराजी देवी की कहानी भी बाकी परिवारों की पीड़ा से जुड़ती नजर आई। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से यहां रह रहा है। पहले भी एक बार मकान तोड़ने का नोटिस मिला था, लेकिन तब कोर्ट जाने और तैयारी करने का समय मिल गया था। इस बार अचानक कार्रवाई शुरू हो गई। उनकी बहू लीलावती ने बताया कि अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर है। बेटा पुनीत दसवीं कक्षा में और बेटी साक्षी चौथी कक्षा में पढ़ती है। परिवार का कहना है कि आसपास किराए के मकानों के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं। ऐसे में नया ठिकाना ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया है। सामान समेटते हुए परिवार के लोग बार-बार यही सवाल पूछते नजर आए कि अब जाएं तो जाएं कहां। टूटते मकानों के बीच यह सवाल इलाके के कई परिवारों की साझा पीड़ा बन गया है।
स्लिप रोड निर्माण शुरू, एक माह में मिलेगा जाम से राहत का समाधान
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने अवैध निर्माण हटाने के बाद स्लिप रोड निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से 10 मीटर चौड़ी और 90 मीटर लंबी स्लिप रोड बनाई जाएगी, जिसे अगले एक माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि दोबारा अतिक्रमण न हो, इसलिए मलबा हटाने के साथ ही निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचा दी गई है।