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धुंध की चादर से ढका शहर, सांस लेने में भी दिक्कत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 05 Nov 2018 11:17 PM IST
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वायु प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर भारत में पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और पराली जलाए जाने का असर सोमवार को औद्योगिक नगरी में स्मॉग और सर्दी की आमद के रूप में नजर आया। धुंध की चादर ने सूरज की रोशनी को जमीन पर आने से रोका, तो हवा में तैरने वाले प्रदूषकों से लोगों ने सांस लेने में दिक्कत महसूस की।
वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन भर बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। दिवाली से पहले वायु प्रदूषण की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ने से आने वाले समय में वातावरण और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
औद्योगिक नगरी में शनिवार रात हवाएं चलने के कारण रविवार को वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ। इन हवाओं के कारण पहले तो वातावरण साफ हुआ, लेकिन बाद में अन्य राज्यों में जलाई जा रही पराली का धुआं और प्रदूषण भी साथ लेकर आई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने बताया कि दूसरे राज्यों से पराली का धुआं और प्रदूषण लेकर पहुंची इन हवाओं के कारण सोमवार रात ही वायु की गुणवत्ता बेहद खराब के स्तर पर पहुंच गई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में हुई बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट आई। तापमान गिरने के कारण जमीन के करीब की हवा ठंडी होकर नीचे बैठी और उसके साथ प्रदूषक भी नीचे उतर आए। इसका नतीजा वातावरण में धुंध के रूप में नजर आया।
विजय चौधरी के अनुसार सोमवार को भी हवाएं चलीं लेकिन स्मॉग के कारण सूरज की किरणों की गर्माहट नहीं पहुंच सकी। सुबह दस बजे तक सूरज आसमान में टिमटिमाता सा दिखा। सूरज की गर्मी धरती तक नहीं पहुंचने से हवा गर्म नहीं हो सकी और प्रदूषक हवा में एक से डेढ़ किलोमीटर ऊंचाई में ही इकट्ठा रहे। उनके अनुसार सामान्य तौर पर सूरज निकलने और वातावरण गर्म होने पर हवा छह किलोमीटर ऊंचाई तक उठती है और प्रदूषक उसके साथ ऊपर तक फैल जाते हैं, लेकिन सोमवार को यह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो सकी, बर्फबारी के कारण तापमान गिरने का असर भी रहा।
सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक 500 के बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। चार बजे के बाद सूचकांक 394 दर्ज किया गया। प्रदूषक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का औसत 412 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। हालांकि प्रदूषक नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा वातावरण में सामान्य बनी रही।
धुुंध और प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर नजर आया। थोड़ी ही देर बाहर रहने पर स्वस्थ लोगों ने सीने में जलन, आंखों में जलन, भारीपन, सांस लेने में दिक्कत महसूस की। हृदय और फेफड़े के रोगियों के लिए सोमवार का दिन परेशानी भरा रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने लोगों से अपील की कि जब तक जरूरी न हो तब तक बाहर न निकलें, खासकर हृदय और सांस के रोगी घर से बाहर न निकलें, घर के आसपास पानी का छिड़काव करें जिससे कि प्रदूषणकारी तत्व बैठ सकें।
बढ़ी मरीजों की संख्या
औद्योगिक नगरी के प्रदूषित वातावरण के कारण दिक्कत महसूस करने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बीके सिविल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी, धड़कन और सीने में जलन जैसी समस्या लेकर आने वाले हृदय रोगियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब तीस फीसदी बढ़ी है। उनके अनुसार हृदय रोगियों को यह समस्या प्रदूषित वायुमंडल में सांस लेने से हो रही है। जनरल फिजिशियन डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को आंखों में तकलीफ और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत वाले मरीज ज्यादा आए। उन्होंने बताया कि दशहरे के बाद से इस तरह के मरीजों की संख्या करीब तीस फीसदी बढ़ी है, दिवाली के बाद इसमें और भी इजाफा होने की उम्मीद है।
नगर निगम ने कराया छिड़काव
जमीन के करीब एकत्र हुए प्रदूषणकारी तत्वों को बैठाने के लिए सोमवार केा नगर निगम की ओर से शहर की मुख्य सड़कों और ग्रीन बेल्टों में पानी का फुहार कर छिड़काव कराया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में तैर रहे प्रदूषणकारी तत्व फुहार छोड़े जाने से पानी में घुल कर बैठ जाते हैं, इससे जमीन से करीब बीस फीट ऊंचाई तक के प्रदूषकों को कम किया जाता है। प्रदूषकों के बैठने से जमीन के करीब की हवा थोड़ी बहुत साफ हो जाती है।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक दिन भर बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। दिवाली से पहले वायु प्रदूषण की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ने से आने वाले समय में वातावरण और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
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औद्योगिक नगरी में शनिवार रात हवाएं चलने के कारण रविवार को वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ। इन हवाओं के कारण पहले तो वातावरण साफ हुआ, लेकिन बाद में अन्य राज्यों में जलाई जा रही पराली का धुआं और प्रदूषण भी साथ लेकर आई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने बताया कि दूसरे राज्यों से पराली का धुआं और प्रदूषण लेकर पहुंची इन हवाओं के कारण सोमवार रात ही वायु की गुणवत्ता बेहद खराब के स्तर पर पहुंच गई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में हुई बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट आई। तापमान गिरने के कारण जमीन के करीब की हवा ठंडी होकर नीचे बैठी और उसके साथ प्रदूषक भी नीचे उतर आए। इसका नतीजा वातावरण में धुंध के रूप में नजर आया।
विजय चौधरी के अनुसार सोमवार को भी हवाएं चलीं लेकिन स्मॉग के कारण सूरज की किरणों की गर्माहट नहीं पहुंच सकी। सुबह दस बजे तक सूरज आसमान में टिमटिमाता सा दिखा। सूरज की गर्मी धरती तक नहीं पहुंचने से हवा गर्म नहीं हो सकी और प्रदूषक हवा में एक से डेढ़ किलोमीटर ऊंचाई में ही इकट्ठा रहे। उनके अनुसार सामान्य तौर पर सूरज निकलने और वातावरण गर्म होने पर हवा छह किलोमीटर ऊंचाई तक उठती है और प्रदूषक उसके साथ ऊपर तक फैल जाते हैं, लेकिन सोमवार को यह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो सकी, बर्फबारी के कारण तापमान गिरने का असर भी रहा।
सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक 500 के बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। चार बजे के बाद सूचकांक 394 दर्ज किया गया। प्रदूषक पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का औसत 412 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के बेहद खतरनाक स्तर पर बना रहा। हालांकि प्रदूषक नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा वातावरण में सामान्य बनी रही।
धुुंध और प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर नजर आया। थोड़ी ही देर बाहर रहने पर स्वस्थ लोगों ने सीने में जलन, आंखों में जलन, भारीपन, सांस लेने में दिक्कत महसूस की। हृदय और फेफड़े के रोगियों के लिए सोमवार का दिन परेशानी भरा रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय चौधरी ने लोगों से अपील की कि जब तक जरूरी न हो तब तक बाहर न निकलें, खासकर हृदय और सांस के रोगी घर से बाहर न निकलें, घर के आसपास पानी का छिड़काव करें जिससे कि प्रदूषणकारी तत्व बैठ सकें।
बढ़ी मरीजों की संख्या
औद्योगिक नगरी के प्रदूषित वातावरण के कारण दिक्कत महसूस करने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बीके सिविल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी, धड़कन और सीने में जलन जैसी समस्या लेकर आने वाले हृदय रोगियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब तीस फीसदी बढ़ी है। उनके अनुसार हृदय रोगियों को यह समस्या प्रदूषित वायुमंडल में सांस लेने से हो रही है। जनरल फिजिशियन डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को आंखों में तकलीफ और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत वाले मरीज ज्यादा आए। उन्होंने बताया कि दशहरे के बाद से इस तरह के मरीजों की संख्या करीब तीस फीसदी बढ़ी है, दिवाली के बाद इसमें और भी इजाफा होने की उम्मीद है।
नगर निगम ने कराया छिड़काव
जमीन के करीब एकत्र हुए प्रदूषणकारी तत्वों को बैठाने के लिए सोमवार केा नगर निगम की ओर से शहर की मुख्य सड़कों और ग्रीन बेल्टों में पानी का फुहार कर छिड़काव कराया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार हवा में तैर रहे प्रदूषणकारी तत्व फुहार छोड़े जाने से पानी में घुल कर बैठ जाते हैं, इससे जमीन से करीब बीस फीट ऊंचाई तक के प्रदूषकों को कम किया जाता है। प्रदूषकों के बैठने से जमीन के करीब की हवा थोड़ी बहुत साफ हो जाती है।