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अभियान में 19 नए टीबी मरीजों की पहचान
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फरीदाबाद। जिला टीबी एवं एचआइवी-एड्स नियंत्रण विभाग की ओर से चलाए गए डोर टू डोर अभियान से विभाग को काफी लाभ मिला है। इसके तहत सोमवार को 19 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है। यह पखवाड़ा टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत चलाया गया था। 15 दिन चले अभियान में 657 सैंपल लिए गए थे। नए मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। डॉक्टरों की टीम मरीजों पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके चलते जागरूकता अभियान एवं उन मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो बीच में दवा लेना छोड़ देते हैं। इस क्रम में विभाग ने 29 अक्तूबर से 12 नवंबर तक अभियान चलाया था। इसमें स्वास्थ्य कर्मी डोर टू डोर जाकर दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार वाले मरीजों की पहचान की और उनकी नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई गई। इस दौरान 657 लोग चिन्हित किए गए।
इनमें जिला टीबी केंद्र से 10, खेड़ीकलां, डबुआ, तिगांव से एक-एक, पाली से दो और मोहना से चार मरीजों की पहचान हुई। विभाग की ओर से सभी नए मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। यह मरीज बीच में अपनी दवाएं नहीं छोड़ें, यह सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी लगातार इनके संपर्क में रहते हैं। टीबी कार्यक्रम के संयोजक सुभाष गहलोत ने बताया कि जिले में अब तक 5393 टीबी के मरीज हैं। इसके अलावा 195 एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) मरीज हैं।
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वर्ष 2023 तक टीबी को समाप्त करने के लिए नए मरीजों की पहचान किया जाना बहुत जरूरी है। इस तरह का दूसरा पखवाड़ा जल्द ही चलाया जाएगा। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई मरीज दवा नहीं छोड़ें। इसलिए विभाग की टीम मरीजों पर नजर बनाए हुए है।
-डॉ. शीला भगत, अधिकारी जिला टीबी एवं एचआइवी एड्स नियंत्रण विभाग
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके चलते जागरूकता अभियान एवं उन मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो बीच में दवा लेना छोड़ देते हैं। इस क्रम में विभाग ने 29 अक्तूबर से 12 नवंबर तक अभियान चलाया था। इसमें स्वास्थ्य कर्मी डोर टू डोर जाकर दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार वाले मरीजों की पहचान की और उनकी नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई गई। इस दौरान 657 लोग चिन्हित किए गए।
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इनमें जिला टीबी केंद्र से 10, खेड़ीकलां, डबुआ, तिगांव से एक-एक, पाली से दो और मोहना से चार मरीजों की पहचान हुई। विभाग की ओर से सभी नए मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। यह मरीज बीच में अपनी दवाएं नहीं छोड़ें, यह सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी लगातार इनके संपर्क में रहते हैं। टीबी कार्यक्रम के संयोजक सुभाष गहलोत ने बताया कि जिले में अब तक 5393 टीबी के मरीज हैं। इसके अलावा 195 एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) मरीज हैं।
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वर्ष 2023 तक टीबी को समाप्त करने के लिए नए मरीजों की पहचान किया जाना बहुत जरूरी है। इस तरह का दूसरा पखवाड़ा जल्द ही चलाया जाएगा। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई मरीज दवा नहीं छोड़ें। इसलिए विभाग की टीम मरीजों पर नजर बनाए हुए है।
-डॉ. शीला भगत, अधिकारी जिला टीबी एवं एचआइवी एड्स नियंत्रण विभाग