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जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
Updated Sat, 14 Jul 2018 09:00 PM IST
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फोटो
भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ निकले भगवान जगन्नाथ
या
रथ पर सवार होकर निकले भगवान जगन्नाथ
- भगवान के रथ को खींचने के लिए व्याकुल दिखे श्रद्धालु
- सेक्टर-14-17 मोड़ पर बनाए गए मौसी का गुंडीचा में पहुंचे भगवान, नौ दिन करेंगे विश्राम
- झाडू लगा रास्ता साफ करते रहे लोग तब निकली रथयात्रा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-15ए स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से शनिवार को भव्य तरीके से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। यात्रा में जय जगन्नाथ और हरे कृष्णा-हरे रामा के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु बड़े हर्षोल्लास के साथ मंत्रमुग्ध होकर भगवान जगन्नाथ का गुणगान कर रहे थे। रथ को हजारों श्रद्धालु खींचने को व्याकुल नजर आए, जिस किसी को भी भगवान जगन्ननाथ के रथ को खींचने को मौका मिला, वो खुद को धन्य समझ रहा था। रथयात्रा शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई सेक्टर-14-17 के मोड़ पर समाप्त हुई, जहां भगवान की मौसी का गुंडीचा (अस्थाई घर) बनाया गया है, यहां अगले नौ दिन तक भगवान विश्राम करेंगे।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा को मंदिर से बाहर खड़े रथ में विराजमान किया जाता है। इस कार्य में पारंपरिक रीति-रिवाज को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है। शनिवार सुबह से ही सेक्टर-15ए स्थित जगन्नाथ मंदिर में पूजा आरंभ हो गई थी। भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालने के लिए यहां 25 फुट ऊंचा भव्य रथ तैयार किया गया था। दोपहर को घंटे-घड़ियाल, ढोल-बाजों की ध्वनि और भजन-कीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा को रथ में विराजमान करवाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष लगाए और माहौल को भक्तिमय कर दिया। रथयात्रा सेक्टर-15ए से जिमखाना क्लब मोड़, सेक्टर-16 मोड़ से होते हुए सेक्टर-14-17 के मोड़ पर समाप्त हुई।
हरे रामा हरे कृष्णा पर झूमे श्रद्धालु
रथयात्रा के दौरान इस्कॉन मंदिर से भजन कीर्तन मंडली ने हरे रामा-हरे कृष्णा की धुन पर माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भी हरे रामा-हरे कृष्णा गाने हुए खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। इसके अलावा मंदिर की भजन मंडली भी वाद्य यंत्रों के साथ भगवान जगन्नाथ का गुणगान कर रही थी। रथयात्रा जिस रास्ते पर निकली, उसके आगे श्रद्धालु झाड़ू लगा कर रास्ता साफ करते रहे।
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भगवान जगन्नाथ का मात्र एक मंदिर
जिले में मात्र एक ही सेक्टर-15ए में श्री जगन्नाथ मंदिर है। यह भव्य मंदिर 2400 गज में तैयार हो रहा है। वर्ष 1985 में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने इस मंदिर का शिलान्यास किया था। उसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। मंदिर प्रबंधन पिछले 30 से अधिक सालों से रथ यात्रा का आयोजन कर रहा है, जिसने अब भव्य रूप ले लिया है।
रविवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भव्य तरीके से निकाली गई। सेक्टर-17 स्थित लेबर चौक पर भगवान की मौसी का गुंडीचा (अस्थाई घर) बनाया गया है, 21 जुलाई तक यात्रा वहीं रुकेगी। वहां हर रोज पूजा अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 22 जुलाई रविवार को रथयात्रा वापस मंदिर लौट आएगी।
- डा. पीकेएमके दास, अध्यक्ष, श्री जगन्नाथ मंदिर कमेटी
मंदिर कमेटी पिछले 30 सालों से शोभा यात्रा का आयोजन कर रही है। पहले यह यात्रा छोटे स्तर पर आयोजित की जाती थी। मगर धीरे-धीरे यात्रा ने भव्य रूप ले लिया है और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- डी. भारती, उपाध्यक्ष, श्री जगन्नाथ मंदिर कमेटी
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भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ निकले भगवान जगन्नाथ
या
रथ पर सवार होकर निकले भगवान जगन्नाथ
- भगवान के रथ को खींचने के लिए व्याकुल दिखे श्रद्धालु
- सेक्टर-14-17 मोड़ पर बनाए गए मौसी का गुंडीचा में पहुंचे भगवान, नौ दिन करेंगे विश्राम
- झाडू लगा रास्ता साफ करते रहे लोग तब निकली रथयात्रा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-15ए स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से शनिवार को भव्य तरीके से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। यात्रा में जय जगन्नाथ और हरे कृष्णा-हरे रामा के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु बड़े हर्षोल्लास के साथ मंत्रमुग्ध होकर भगवान जगन्नाथ का गुणगान कर रहे थे। रथ को हजारों श्रद्धालु खींचने को व्याकुल नजर आए, जिस किसी को भी भगवान जगन्ननाथ के रथ को खींचने को मौका मिला, वो खुद को धन्य समझ रहा था। रथयात्रा शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई सेक्टर-14-17 के मोड़ पर समाप्त हुई, जहां भगवान की मौसी का गुंडीचा (अस्थाई घर) बनाया गया है, यहां अगले नौ दिन तक भगवान विश्राम करेंगे।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा को मंदिर से बाहर खड़े रथ में विराजमान किया जाता है। इस कार्य में पारंपरिक रीति-रिवाज को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है। शनिवार सुबह से ही सेक्टर-15ए स्थित जगन्नाथ मंदिर में पूजा आरंभ हो गई थी। भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालने के लिए यहां 25 फुट ऊंचा भव्य रथ तैयार किया गया था। दोपहर को घंटे-घड़ियाल, ढोल-बाजों की ध्वनि और भजन-कीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन माता सुभद्रा को रथ में विराजमान करवाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष लगाए और माहौल को भक्तिमय कर दिया। रथयात्रा सेक्टर-15ए से जिमखाना क्लब मोड़, सेक्टर-16 मोड़ से होते हुए सेक्टर-14-17 के मोड़ पर समाप्त हुई।
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हरे रामा हरे कृष्णा पर झूमे श्रद्धालु
रथयात्रा के दौरान इस्कॉन मंदिर से भजन कीर्तन मंडली ने हरे रामा-हरे कृष्णा की धुन पर माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भी हरे रामा-हरे कृष्णा गाने हुए खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। इसके अलावा मंदिर की भजन मंडली भी वाद्य यंत्रों के साथ भगवान जगन्नाथ का गुणगान कर रही थी। रथयात्रा जिस रास्ते पर निकली, उसके आगे श्रद्धालु झाड़ू लगा कर रास्ता साफ करते रहे।
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भगवान जगन्नाथ का मात्र एक मंदिर
जिले में मात्र एक ही सेक्टर-15ए में श्री जगन्नाथ मंदिर है। यह भव्य मंदिर 2400 गज में तैयार हो रहा है। वर्ष 1985 में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने इस मंदिर का शिलान्यास किया था। उसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। मंदिर प्रबंधन पिछले 30 से अधिक सालों से रथ यात्रा का आयोजन कर रहा है, जिसने अब भव्य रूप ले लिया है।
रविवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भव्य तरीके से निकाली गई। सेक्टर-17 स्थित लेबर चौक पर भगवान की मौसी का गुंडीचा (अस्थाई घर) बनाया गया है, 21 जुलाई तक यात्रा वहीं रुकेगी। वहां हर रोज पूजा अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 22 जुलाई रविवार को रथयात्रा वापस मंदिर लौट आएगी।
- डा. पीकेएमके दास, अध्यक्ष, श्री जगन्नाथ मंदिर कमेटी
मंदिर कमेटी पिछले 30 सालों से शोभा यात्रा का आयोजन कर रही है। पहले यह यात्रा छोटे स्तर पर आयोजित की जाती थी। मगर धीरे-धीरे यात्रा ने भव्य रूप ले लिया है और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- डी. भारती, उपाध्यक्ष, श्री जगन्नाथ मंदिर कमेटी