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राम की लीला पर भी लग रही जीएसटी, भक्त हो रहे परेशान

Sun, 14 Oct 2018 08:52 PM IST
Updated Sun, 14 Oct 2018 08:52 PM IST
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राम की लीला पर भी जीएसटी
demo pic - फोटो : अमर उजाला
आस्था और धर्म के प्रतीक पुरुषोत्तम राम की रामलीला भी यूजर चार्ज और जीएसटी चुकाए बिना नहीं मनाई जा सकती। सेक्टर तीन मदर डेयरी के सामने स्थित हुडा के मैदान में तो यह मुमकिन नहीं है। इस मैदान में रामलीला का आयोजन करने के लिए कमेटी को रोजाना 25 हजार रुपये यूजर चार्ज और 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाना पड़ता है।
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हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण रोजाना 29.5 हजार रुपये रामलीला कमेटी से वसूल रहा है लेकिन सुविधा के नाम पर यहां झाड़ू तक नहीं लगवाई जाती। धार्मिक कार्य केे लिए मैदान का शुल्क वसूले जाने से लोगों में गुस्सा है।
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रामलीला दशहरा कमेटी सेक्टर तीन के प्रधान शिव सिंह मलिक ने बताया कि मदर डेयरी के सामने खाली पड़े इस मैदान पर पिछले 22 वर्ष से दशहरा मनाया जा रहा है। यह मैदान एचएसवीपी का है लेकिन इसकी कोई देखभाल या साफ सफाई नहीं होती। रामलीला करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी जाती है तो एचएसवीपी में जीएसटी सहित यूजर चार्ज जमा करवाने को कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि रामलीला का मंच और पंडाल तैयार करने में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। धार्मिक कार्यक्रम होने के कारण आपसी चंदे से यह काम किया जाता है। सिर्फ प्राधिकरण को नौ दिन के लिए 2.65 लाख रुपये जमा भुगतान करना पड़ता है।

श्रीभगवान शर्मा कहते हैं कि प्राधिकरण रोजाना 29.5 हजार रुपये तो वसूल करता है लेकिन न तो मैदान में सफाई कराई जाती है और न ही पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। मैदान को रामलीला के मंचन और श्रद्धालुओं के आने लायक बनाने में कमेटी का एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च हो जाता है, पानी का टैंकर भी मंगाना पड़ता है जबकि यह काम प्रशासन का है।


जसबीर मलिक कहते हैं कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनवाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार रामलीला से भी शुल्क वसूल रही है। वह कहते हैं कि रामलीला का मंचन समाज को बुराई पर अच्छाई का संदेश देने और सद्कर्म को प्रेरित करने का सामाजिक धार्मिक कार्य है, ऐसे पावन कार्यों के लिए बेकार पड़े मैदान का शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। एचएसवीपी अधिकारियों का कहना है कि यूजर चार्ज और जीएसटी की दर सरकार की ओर से तय की गई है इसलिए वसूलना मजबूरी है। शुल्क लेने या हटाने का फैसला सरकार करती है, प्राधिकरण तो उन्हें लागू करवाता है।
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