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Faridabad News: घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की पहचान करेंगी स्वास्थ्य विभाग की 1500 टीमें
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एक से 14 सितंबर तक चलेगा अभियान, 25 लाख आबादी को कवर करने का लक्ष्य, बीके अस्पताल से जागरूकता रैली के साथ होगी शुरुआत
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के मरीजों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग मंगलवार से 14 दिवसीय अभियान शुरू करेगा। अभियान एक से 14 सितंबर तक चलेगा। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की 1500 टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी और संदिग्ध मरीजों को चिन्हित कर उपचार के लिए प्रेरित करेंगी। अभियान के दौरान करीब 25 लाख की आबादी को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
अभियान की शुरुआत मंगलवार सुबह 9:30 बजे बीके अस्पताल से होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की पहचान करेंगे। प्रत्येक टीम में एक महिला और एक पुरुष स्वास्थ्यकर्मी शामिल होगा। पांच टीमों पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई है, जो टीमों के कार्य की निगरानी कर नियमित रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेंगे।
वर्तमान में 65 मरीज उपचाराधीन
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरजिंदर सिंह ने बताया कि फरीदाबाद में वर्तमान में 65 कुष्ठ रोगी उपचाराधीन हैं। हर वर्ष अभियान के दौरान करीब 15 नए मरीजों की पहचान होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फरीदाबाद में कुष्ठ रोगियों की संख्या अधिक है। इस बार अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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लंबे समय तक नहीं दिखते बीमारी के लक्षण
डॉ. हरजिंदर सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग का संक्रमण होने के बाद इसके लक्षण लंबे समय बाद सामने आ सकते हैं। कई मामलों में बीमारी का पता वर्षों बाद चलता है। शुरुआत में दर्द नहीं होने के कारण मरीज इसे गंभीरता से नहीं लेते और बीमारी की पहचान देर से हो पाती है। कई लोग सामाजिक झिझक और शर्म के कारण भी जांच कराने से बचते हैं।
उन्होंने बताया कि आशा वर्करों को भी अभियान में जिम्मेदारी दी गई है। वे घरों में जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान करेंगी और उनकी जानकारी विशेषज्ञों को देंगी। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सक आवश्यक जांच कर बीमारी की पुष्टि करेंगे।
जांच और दवाइयां मुफ्त
डॉ. हरजिंदर ने बताया कि कुष्ठ रोग की जांच और उपचार के लिए दवाइयां स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान होने पर इसका उपचार संभव है। लोगों को बीमारी छिपाने या शर्म करने के बजाय स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग करना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को बढ़ने और दूसरों तक फैलने से रोकने में मदद मिलती है।
ये लक्षण दिखें तो कराएं जांच
त्वचा पर हल्के रंग के ऐसे दाग या धब्बे जिनमें संवेदना कम या खत्म हो जाए
दाग वाले हिस्से में गर्मी, ठंड या दर्द का कम महसूस होना
हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट
त्वचा पर नसों का मोटा महसूस होना
हाथ-पैर की मांसपेशियों में कमजोरी
लंबे समय तक रहने वाले ऐसे त्वचा संबंधी बदलाव, जिनमें संवेदना कम हो रही हो
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के मरीजों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग मंगलवार से 14 दिवसीय अभियान शुरू करेगा। अभियान एक से 14 सितंबर तक चलेगा। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की 1500 टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी और संदिग्ध मरीजों को चिन्हित कर उपचार के लिए प्रेरित करेंगी। अभियान के दौरान करीब 25 लाख की आबादी को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
अभियान की शुरुआत मंगलवार सुबह 9:30 बजे बीके अस्पताल से होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत आहूजा जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की पहचान करेंगे। प्रत्येक टीम में एक महिला और एक पुरुष स्वास्थ्यकर्मी शामिल होगा। पांच टीमों पर एक सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई है, जो टीमों के कार्य की निगरानी कर नियमित रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेंगे।
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वर्तमान में 65 मरीज उपचाराधीन
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरजिंदर सिंह ने बताया कि फरीदाबाद में वर्तमान में 65 कुष्ठ रोगी उपचाराधीन हैं। हर वर्ष अभियान के दौरान करीब 15 नए मरीजों की पहचान होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फरीदाबाद में कुष्ठ रोगियों की संख्या अधिक है। इस बार अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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लंबे समय तक नहीं दिखते बीमारी के लक्षण
डॉ. हरजिंदर सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग का संक्रमण होने के बाद इसके लक्षण लंबे समय बाद सामने आ सकते हैं। कई मामलों में बीमारी का पता वर्षों बाद चलता है। शुरुआत में दर्द नहीं होने के कारण मरीज इसे गंभीरता से नहीं लेते और बीमारी की पहचान देर से हो पाती है। कई लोग सामाजिक झिझक और शर्म के कारण भी जांच कराने से बचते हैं।
उन्होंने बताया कि आशा वर्करों को भी अभियान में जिम्मेदारी दी गई है। वे घरों में जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान करेंगी और उनकी जानकारी विशेषज्ञों को देंगी। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सक आवश्यक जांच कर बीमारी की पुष्टि करेंगे।
जांच और दवाइयां मुफ्त
डॉ. हरजिंदर ने बताया कि कुष्ठ रोग की जांच और उपचार के लिए दवाइयां स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान होने पर इसका उपचार संभव है। लोगों को बीमारी छिपाने या शर्म करने के बजाय स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग करना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को बढ़ने और दूसरों तक फैलने से रोकने में मदद मिलती है।
ये लक्षण दिखें तो कराएं जांच
त्वचा पर हल्के रंग के ऐसे दाग या धब्बे जिनमें संवेदना कम या खत्म हो जाए
दाग वाले हिस्से में गर्मी, ठंड या दर्द का कम महसूस होना
हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट
त्वचा पर नसों का मोटा महसूस होना
हाथ-पैर की मांसपेशियों में कमजोरी
लंबे समय तक रहने वाले ऐसे त्वचा संबंधी बदलाव, जिनमें संवेदना कम हो रही हो