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सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल फरीदाबाद में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर
Updated Thu, 08 Nov 2018 06:00 PM IST
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जहरीली हवा के और बिगड़े तेवर
फरीदाबाद। हर सांस में जहर निगल रहे औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के लोग पर्यावरण को लेकर सचेत नहीं हैं। दिवाली की रात हुई जमकर आतिशबाजी से शहर की हवा फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक 451 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया। इसका बुरा असर पर्यावरण के साथ शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ आंखों में जलन की समस्या से भी झेलनी पड़ रही है।
दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। इस दौरान लोग पटाखे चलाने से खुद को रोक नहीं पाते। दिवाली से पहले ही खराब हुई वायु की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सेक्टर 16ए स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड, क्लोरो फ्लोरो कार्बन और धूल, मिट्टी के सूक्ष्म कण शहर का हुलिया बिगाड़ रहे हैं। पीएम 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन बृहस्पतिवार को इसका स्तर 451 तक पहुंच गया। पिछले वर्ष दिवाली पर 21 अक्तूबर को पीएम 2.5 का स्तर 309 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। प्रदूषण से बिगड़ रहे हालात शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं।
आतिशबाजी हुई कम, फिर भी प्रदूषण ज्यादा
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण इस बार शहर में पटाखों की बिक्री नहीं हुई। ग्रीन पटाखों की शर्त के कारण जिला प्रशासन ने किसी भी पटाखा विक्रेता को लाइसेंस जारी नहीं किया था। इसके कारण इस बार आतिशबाजी पिछले सालों की अपेक्षा कम हुई है। इसके बावजूद जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लाइसेंस जारी नहीं होने के बावजूद जिले में अवैध रूप से पटाखों की जमकर बिक्री हुई। पुलिस ने अवैध रूप से पटाखे बेचने वाले 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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मरीजों की बढ़ी परेशानी
बीके सिविल अस्पताल के डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि शहर में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 200 के करीब सांस व ह्दय की बीमारियों से संबंधित मरीज आ रहे हैं। दिवाली पर वातावरण में सल्फर, क्रोमियम आदि तत्वों की मात्रा बढ़ने से सांस, त्वचा, नेत्र व ह्दय के मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। इसके अलावा आंखों में जलन और खुजली आदि की भी परेशानी हो रही है।
इस महीने प्रदूषण का हाल
----------------
तारीख पीएम 2.5 का स्तर
1 अक्तूबर 407
2 अक्तूबर 405
3 अक्तूबर 360
4 अक्तूबर 198
5 अक्तूबर 412
6 अक्तूबर 362
7 अक्तूबर 251
8 अक्तूबर 451
फरीदाबाद। हर सांस में जहर निगल रहे औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के लोग पर्यावरण को लेकर सचेत नहीं हैं। दिवाली की रात हुई जमकर आतिशबाजी से शहर की हवा फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक 451 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया। इसका बुरा असर पर्यावरण के साथ शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ आंखों में जलन की समस्या से भी झेलनी पड़ रही है।
दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। इस दौरान लोग पटाखे चलाने से खुद को रोक नहीं पाते। दिवाली से पहले ही खराब हुई वायु की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सेक्टर 16ए स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड, क्लोरो फ्लोरो कार्बन और धूल, मिट्टी के सूक्ष्म कण शहर का हुलिया बिगाड़ रहे हैं। पीएम 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन बृहस्पतिवार को इसका स्तर 451 तक पहुंच गया। पिछले वर्ष दिवाली पर 21 अक्तूबर को पीएम 2.5 का स्तर 309 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था। प्रदूषण से बिगड़ रहे हालात शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहे हैं।
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आतिशबाजी हुई कम, फिर भी प्रदूषण ज्यादा
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण इस बार शहर में पटाखों की बिक्री नहीं हुई। ग्रीन पटाखों की शर्त के कारण जिला प्रशासन ने किसी भी पटाखा विक्रेता को लाइसेंस जारी नहीं किया था। इसके कारण इस बार आतिशबाजी पिछले सालों की अपेक्षा कम हुई है। इसके बावजूद जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लाइसेंस जारी नहीं होने के बावजूद जिले में अवैध रूप से पटाखों की जमकर बिक्री हुई। पुलिस ने अवैध रूप से पटाखे बेचने वाले 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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मरीजों की बढ़ी परेशानी
बीके सिविल अस्पताल के डॉ. मोहित अग्रवाल ने बताया कि शहर में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिख रहा है। सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 200 के करीब सांस व ह्दय की बीमारियों से संबंधित मरीज आ रहे हैं। दिवाली पर वातावरण में सल्फर, क्रोमियम आदि तत्वों की मात्रा बढ़ने से सांस, त्वचा, नेत्र व ह्दय के मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। इसके अलावा आंखों में जलन और खुजली आदि की भी परेशानी हो रही है।
इस महीने प्रदूषण का हाल
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तारीख पीएम 2.5 का स्तर
1 अक्तूबर 407
2 अक्तूबर 405
3 अक्तूबर 360
4 अक्तूबर 198
5 अक्तूबर 412
6 अक्तूबर 362
7 अक्तूबर 251
8 अक्तूबर 451