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खबर का असर : हटेगा किराएदार, पढ़ेंगे बच्चे
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हटेगा किरायेदार, पढ़ेंगे बच्चे
फरीदाबाद। सूर्या नगर फेस-1 के सरकारी स्कूल में अब किरायेदारों की जगह जल्द ही विद्यार्थी देखने को मिलेेंगे। बीते छह वर्षों से इस स्कूल में किरायेदार रह रहे थे। इसकी जानकारी न तो शिक्षा विभाग अधिकारियों को थी न ही यह स्कूल ही शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में था। अमर उजाला ने 21 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने स्कूल रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि छह साल से स्कूल की इमारत बनी खड़ी है, मगर आज तक इसमें पढ़ाई शुरू न हो सकी। अब नए शैक्षणिक सत्र से इस स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने और स्कूल को संवारने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 2012 में छह स्कूलों का निर्माण कराया गया। इसमें से एक सूर्या नगर फेस-1 भी शामिल था। बनाए गए इन छह स्कूलों में से सूर्या नगर स्थित इस स्कूल में ही कक्षाएं नहीं लग सकी। बाकी पांच जगहों पर स्कूल निर्माण के बाद त्रिखा कालोनी, आदर्श नगर फेस-1, 2 और अन्य दो जगहों पर यह विद्यालय चलाए जा रहे हैं। चार कमरों वाले इस प्राथमिक स्कूल को करीब आधा एकड़ जमीन को नगर निगम की जमीन पर बनाया गया है। जिसका रिकॉर्ड मीडिया प्रकाशन के बाद शिक्षा विभाग के हाथ लगा है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत ने बताया कि विभाग ने इस स्कूल को सेहतपुर गांव के रिकॉर्ड में दर्ज किया हुआ था। जबकि वहां वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मौजूद है। शिक्षा अधिकारी का कहना है कि विभाग दोनों स्कूलों की दूरी मापेगा। यदि स्कूल एक किलोमीटर के दायरे में हुआ तो वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में दाखिल विद्यार्थियों को यहां स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं वर्ष 2019-20 के सत्र में स्कूल के आसपास के विद्यार्थियों का दाखिला लेकर स्कूल इमारत का इस्तेमाल कराया जाएगा। शशि अहलावत का कहना है कि स्कूल में किराएदार कैसे और क्यों बसे हैं और उनसे किराया कौन वसूल रहा था, इस बात की भी जांच कराई जा रही है। जल्द ही इस मामले में भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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फरीदाबाद। सूर्या नगर फेस-1 के सरकारी स्कूल में अब किरायेदारों की जगह जल्द ही विद्यार्थी देखने को मिलेेंगे। बीते छह वर्षों से इस स्कूल में किरायेदार रह रहे थे। इसकी जानकारी न तो शिक्षा विभाग अधिकारियों को थी न ही यह स्कूल ही शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में था। अमर उजाला ने 21 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने स्कूल रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि छह साल से स्कूल की इमारत बनी खड़ी है, मगर आज तक इसमें पढ़ाई शुरू न हो सकी। अब नए शैक्षणिक सत्र से इस स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने और स्कूल को संवारने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 2012 में छह स्कूलों का निर्माण कराया गया। इसमें से एक सूर्या नगर फेस-1 भी शामिल था। बनाए गए इन छह स्कूलों में से सूर्या नगर स्थित इस स्कूल में ही कक्षाएं नहीं लग सकी। बाकी पांच जगहों पर स्कूल निर्माण के बाद त्रिखा कालोनी, आदर्श नगर फेस-1, 2 और अन्य दो जगहों पर यह विद्यालय चलाए जा रहे हैं। चार कमरों वाले इस प्राथमिक स्कूल को करीब आधा एकड़ जमीन को नगर निगम की जमीन पर बनाया गया है। जिसका रिकॉर्ड मीडिया प्रकाशन के बाद शिक्षा विभाग के हाथ लगा है।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत ने बताया कि विभाग ने इस स्कूल को सेहतपुर गांव के रिकॉर्ड में दर्ज किया हुआ था। जबकि वहां वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मौजूद है। शिक्षा अधिकारी का कहना है कि विभाग दोनों स्कूलों की दूरी मापेगा। यदि स्कूल एक किलोमीटर के दायरे में हुआ तो वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में दाखिल विद्यार्थियों को यहां स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं वर्ष 2019-20 के सत्र में स्कूल के आसपास के विद्यार्थियों का दाखिला लेकर स्कूल इमारत का इस्तेमाल कराया जाएगा। शशि अहलावत का कहना है कि स्कूल में किराएदार कैसे और क्यों बसे हैं और उनसे किराया कौन वसूल रहा था, इस बात की भी जांच कराई जा रही है। जल्द ही इस मामले में भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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