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अरावली में डिलाइट मॉल सहित सभी निर्माण कार्य रुकेंगे
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:56 PM IST
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अरावली में डिलाइट मॉल सहित सभी निर्माण कार्य रुकेंगे
फरीदाबाद। पंजाब लैंड प्रिजर्वेेशन एक्ट (पीएलपीए) और नेशनल कंजर्वेशन जोन (एनसीजेड) में शामिल अरावली संरक्षित क्षेत्र में चल रही हर तरह के निर्माण कार्य पर पूर्णतया प्रतिबंध लगेगा। अनखीर में निर्माणाधीन डिलाइट मॉल का निर्माण कार्य भी सोमवार से रोकने के आदेश निगमायुक्त ने जारी किए हैं। निगमायुक्त के मुताबिक, डिलाइट मॉल की मालिक ने निर्माण कार्य के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एनओसी नहीं ली है।
अरावली पहाड़ियां पीएलपीए की धारा चार और पांच के अधीन संरक्षित घोषित की गई हैं। इसके बावजूद पहाड़ियों पर खनन, पेड़ कटाई और निर्माण कार्य जारी है। इस मामले में एनजीटी में भी याचिका डाली गई थी। केस में सरकार ने डिलाइट मॉल को जारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी वापस लेेने का शपथपत्र दिया था। एनओसी समाप्त होने के बाद भी वहां निर्माण कार्य जारी है। डिलाइट के अलावा भी प्रतिबंधित क्षेत्र में 140 से अधिक निर्माण कार्य हुए। इसके अलावा जिस जमीन पर निर्माण चल रहा है, उसके मालिकाना हक को लेकर भी विवाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में विचाराधीन है।
सीएम दरबार में भी उठ चुका है डिलाइट मामला
सामाजिक कार्यकर्ता धीरज हिंदुस्तानी ने 23 जुलाई 2027 को आयोजित सीएम दरबार में अरावली संरक्षित क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन, निर्माण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के खराब होने का मामला उठाया था। निगम की ओर से उन्हें दिए गए जवाब में बताया गया है कि अनखीर गांव स्थित डिलाइट गार्डन मामले में डीए ब्रांच की संस्तुति पर ही अनुमति दी गई है। अनुमति के साथ ही डिलाइट की मालकिन ने शपथपत्र दाखिल किया है कि जमीन के मालिकाना हक के संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा वह उन्हें मान्य होगा। यह भी बताया गया है कि प्रार्थी को वन एवं पर्यावरण विभाग से गैर वानिकी कार्यों के लिए एनओसी मिली हुई है। हाल ही में मंत्रालय ने यह एनओसी वापस ले ली है।
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फरीदाबाद। पंजाब लैंड प्रिजर्वेेशन एक्ट (पीएलपीए) और नेशनल कंजर्वेशन जोन (एनसीजेड) में शामिल अरावली संरक्षित क्षेत्र में चल रही हर तरह के निर्माण कार्य पर पूर्णतया प्रतिबंध लगेगा। अनखीर में निर्माणाधीन डिलाइट मॉल का निर्माण कार्य भी सोमवार से रोकने के आदेश निगमायुक्त ने जारी किए हैं। निगमायुक्त के मुताबिक, डिलाइट मॉल की मालिक ने निर्माण कार्य के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एनओसी नहीं ली है।
अरावली पहाड़ियां पीएलपीए की धारा चार और पांच के अधीन संरक्षित घोषित की गई हैं। इसके बावजूद पहाड़ियों पर खनन, पेड़ कटाई और निर्माण कार्य जारी है। इस मामले में एनजीटी में भी याचिका डाली गई थी। केस में सरकार ने डिलाइट मॉल को जारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी वापस लेेने का शपथपत्र दिया था। एनओसी समाप्त होने के बाद भी वहां निर्माण कार्य जारी है। डिलाइट के अलावा भी प्रतिबंधित क्षेत्र में 140 से अधिक निर्माण कार्य हुए। इसके अलावा जिस जमीन पर निर्माण चल रहा है, उसके मालिकाना हक को लेकर भी विवाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में विचाराधीन है।
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सीएम दरबार में भी उठ चुका है डिलाइट मामला
सामाजिक कार्यकर्ता धीरज हिंदुस्तानी ने 23 जुलाई 2027 को आयोजित सीएम दरबार में अरावली संरक्षित क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन, निर्माण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के खराब होने का मामला उठाया था। निगम की ओर से उन्हें दिए गए जवाब में बताया गया है कि अनखीर गांव स्थित डिलाइट गार्डन मामले में डीए ब्रांच की संस्तुति पर ही अनुमति दी गई है। अनुमति के साथ ही डिलाइट की मालकिन ने शपथपत्र दाखिल किया है कि जमीन के मालिकाना हक के संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा वह उन्हें मान्य होगा। यह भी बताया गया है कि प्रार्थी को वन एवं पर्यावरण विभाग से गैर वानिकी कार्यों के लिए एनओसी मिली हुई है। हाल ही में मंत्रालय ने यह एनओसी वापस ले ली है।
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