कहीं आपने तो नहीं डलवाया नकली ऑयल: दिल्ली में फैक्टरी का खुलासा, कैस्ट्रोल से लेकर हीरो कंपनी का फेक माल बरामद
पुलिस को पता चला कि फैक्टरी मुंडका इलाके में चल रही है। पुलिस ने वहां छापा मारकर फैक्टरी मालिक नांगलोई निवासी राजेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
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बाहरी जिला पुलिस ने मुंडका इलाके में चल रहे नकली मोबिल ऑयल बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया है। पुलिस ने फैक्टरी मालिक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी नकली मोबिल ऑयल तैयार करने के बाद उसने नामी कंपनी के डिब्बे में पैक कर बेचते थे। पुलिस ने फैक्टरी से नकली ऑयल बनाने वाली मशीन, कैस्ट्रोल, टीवीएस और हीरो कंपनी की लगभग चार हजार खाली बोतलें, करीब 15 सौ लीटर मिलावटी तेल और तीनों कंपनी के करीब 20 हजार स्टीकर, नकली प्रिंटिंग मशीनें जब्त की है।
कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक (ऑपरेशन) हरिराम शर्मा ने 24 फरवरी को बाहरी जिला पुलिस को बताया कि इलाके में कैस्ट्रोल, टीवीएस और हीरो मोटो कॉर्प के नाम पर मिलावटी मोबिल ऑयल बनाया जा रहा है। शिकायत पर स्पेशल स्टाफ के निरीक्षक प्रवीण के नेतृत्व में टीम ने फैक्टरी की पहचान करने में जुट गई।
पुलिस को पता चला कि फैक्टरी मुंडका इलाके में चल रही है। पुलिस ने वहां छापा मारकर फैक्टरी मालिक नांगलोई निवासी राजेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। वहां से काफी संख्या में नकली स्टिकर, खाली बोतलें, भरी हुई बोतलें मिलीं। परिसर में बोतलों और कंटेनरों में तेल भरने के लिए इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर भी मिला।
राजेश शर्मा से पूछताछ के बाद पुलिस ने एक अन्य गोदाम पर भी छापा मारा। वहां से भारी मात्रा में नकली स्टीकर, खाली बोतल, भरी बोतल भी बरामद की गई। उसके बाद पुलिस ने स्वर्ण पार्क स्थित एक अन्य गोदाम पर भी छापा मारा। जहां से पुलिस ने काफी संख्या में नकली स्टिकर, खाली बोतलें, भरी हुई बोतलें मिलीं। परिसर में बोतलें भरने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रिक मोटर भी मिली है। बोतल बनाने की मशीन भी मिली। पुलिस ने यहां से नांगलोई निवासी शुभम तनेजा को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दोनों चार पांच साल से इस धंधे से जुड़े हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। उन्होंने बताया कि वह इस्तेमाल किया हुआ मोबिल ऑयल को स्थानीय दुकानदारों से खरीदते थे। उसके बाद उसे उबालकर केमिकल से साफ करने के बाद उसमें तेल मिला देते थे। बाद में नामी कंपनी के बोतल और ड्रम में डालकर उसे दिल्ली के बाहर बेच देते थे। वह यहां पर दो माह से काम कर रहे थे।