एक्सप्रेस-वे पर फ्री वाईफाई का सपना लटका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर फ्री वाईफाई का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। नोएडा प्राधिकरण की इस महत्वाकांक्षी योजना में इंटरनेट नेटवर्क बाधा बन गया है।
100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ते वाहनों में बिना रुकावट वाईफाई नेटवर्क पहुंचा सके, ऐसी कोई आईटी कंपनी प्राधिकरण को नहीं मिली है। नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे को देश का पहला वाईफाई एक्सप्रेसवे बनाने का सपना नोएडा प्राधिकरण ने देखा था।
10 फरवरी को एचटीएमएस (हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के उद्घाटन के दौरान एक्सप्रेसवे को वाईफाई सुविधा से लैस करने की घोषणा की गई थी। मार्च से इस सुविधा का लाभ एक्सप्रेसवे से गुजरने वालों को मिलना था।
कैसे दूर होगी समस्या?
बाकायदा, इसके लिए आईटी कंपनियों की मदद ली जा रही थी, लेकिन देश की किसी कंपनी के पास ऐसी तकनीक नहीं मिली है जो 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने वाले वाहनों में वाईफाई नेटवर्क पहुंचा सके।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कई कंपनियों से संपर्क साधा गया, लेकिन ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली है जो 23 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर एक टावर से दूसरे टावर के बीच निर्बाध इंटरनेट नेटवर्क उपलब्ध करा सके।
हालांकि, प्राधिकरण के आला अधिकारी इस योजना पर खासा जोर दे रहे हैं। जिसको ध्यान में रख कंपनियों की तलाश अब भी जारी है।
जितने विकल्प उतने जोखिम
अधिकतम गति सीमा 60 किमी- देश की बड़ी आईटी कंपनियों से वाईफाई के लिए संपर्क साधा जा चुका है। इस बीच सिसको नाम की एक बड़ी कंपनी ने भी अपना प्रजेंटेशन दिया है, लेकिन 60 किलोमीटर प्रतिघंटे से ज्यादा की रफ्तार पर दौड़ने वाले वाहनों में वाईफाई नेटवर्क पहुंचाने में इस कंपनी ने भी असमर्थता जाहिर कर दी है।
विकल्प तो है लेकिन जोखिम भी- आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर एक टावर से दूसरे टावर के बीच नेटवर्क कनेक्टिविटी की दिक्कतों के बीच सड़क पर वाहन रोकने की जगह सुनिश्चित करने का विकल्प है। लेकिन इसमें जोखिम कहीं ज्यादा है। आए दिन हादसे का कारण एक्सप्रेसवे पर खड़े वाहन ही होते हैं। वाईफाई की योजना के लिए लोगों की जिंदगी खतरे में नहीं डाली जा सकती।
पहले 3जी, फिर 4जी की थी योजना- प्राधिकरण की योजना थी कि एक्सप्रेसवे पर पहले 3जी (थर्ड जनरेशन) इंटरनेट नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद 4जी (फोर्थ जनरेशन) नेटवर्क से जोड़ा जाए। दुरुपयोग को रोकने के लिए महज आधे घंटे तक वाईफाई से इंटरनेट का इस्तेमाल करने की योजना थी।