पाक विजय की खुशी में नहीं शामिल हुए पूर्व सैनिक
वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के लिए आंदोलन कर रहे पूर्व सैनिकों ने 1965 की पाक विजय की स्वर्ण जयंती पर शुक्रवार से इंडिया गेट पर शुरू कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।
उन्होंने अपने परिवार के साथ जंतर-मंतर पर जश्न मनाया। इस मौके पर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, जिस पर 65 में हुए भारत-पाक युद्ध की तस्वीरों को दिखाया गया।
पूर्व सैनिकों ने एक-दूसरे को गुलाब का फूल देकर खुशी का इजहार किया। विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) विनोद नेब ने रक्षा मंत्री से अपील की कि ओआरओपी के ऐलान में अब और देरी न करें।
1965 के युद्ध का हिस्सा रहे ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डीपी नायर ने कहा कि सरकार की तरफ से बुलावा आया था, लेकिन इंडिया गेट पर जाने की तरह हमने अपने परिवार का हिस्सा बनना ज्यादा बेहतर समझा।
'सैनिक भूखा बैठा है तो जश्न का क्या मतलब'
उन्होंने सवाल किया कि अगर हमारा पूर्व सैनिक यहां भूखा बैठा है तो इंडिया गेट के जश्न में शामिल होने का मतलब क्या रहा। सरकार को ओआरओपी पर अब देरी नहीं करनी चाहिए।
वहीं, यूनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्स सर्विस मैन की अगुवाई कर रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सतबीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार शाम उनकी गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई।
इस दौरान उन्हें बताया गया कि ओआरओपी लागू करने में किस तरह नौकरशाही अड़चन बन रही है। गृहमंत्री हमारी बातों से सहमत थे। उन्होंने इस बारे में पूरी मदद का भरोसा भी दिया।
लेकिन इसे लागू करने की कोई तारीख नहीं बताई। इससे पहले बृहस्पतिवार शाम को भी सरकार से बात हुई थी। उस वक्त ओआरओपी के मौजूदा फार्मूले में कुछ बदलाव करने का दबाव हम पर डाला गया, लेकिन हमने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
इसके बाद पूर्व सैनिकों ने इंडिया गेट के कार्यक्रम का बहिष्कार किया। हालांकि, सतबीर सिंह कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से अभी भी उम्मीद है। संभव है कि अगले दो दिनों में उनसे मुलाकात हो जाए।