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बाइक बोट की तरह ई स्कूटी घोटाला: हर महीने सात हजार रुपये का लालच देकर करोड़ों की ठगी, कंपनी का संचालक गिरफ्तार

Mon, 15 Dec 2025 01:42 AM IST
Digvijay Singh माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 15 Dec 2025 01:42 AM IST
सार

कंपनी संचालक आरोपियों ने 35-40 लोगों से ई-स्कूटी के नाम पर 85 हजार रुपये जमा करवाए थे। इनमें कुछ निवेशकों ने कई-कई ई-स्कूटी के लिए रकम दी थी। 

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Escooter scam similar to the Bike Bot scam Crores of rupees swindled by luring people with the promise of Rs
हथकड़ी। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाइक बोट की तरह ई स्कूटी योजना लाकर प्रति महीने सात हजार रुपये देने व तीन साल वापसी का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी सामने आई है। यह सुनियोजित ठगी भंगेल में कंपनी का दफ्तर खोलकर की गई। कंपनी संचालक आरोपियों ने 35-40 लोगों से ई-स्कूटी के नाम पर 85 हजार रुपये जमा करवाए थे। इनमें कुछ निवेशकों ने कई-कई ई-स्कूटी के लिए रकम दी थी। कुछ ही महीनों बाद आरोपियों ने वादे के मुताबिक महीने में न तो मुनाफे की किश्त दी न ही मांगने पर रकम वापस कर रहे थे। आरोपी रातों-रात दफ्तर बंद कर फरार हो गए थे। निवेशकों की शिकायत पर फेज-2 थाना पुलिस ने कंपनी संचालक को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया है। पुलिस का दावा है कि निवेशकों से ली गई करोड़ों की रकम बैंक खातों में फ्रीज करवाई गई है।

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पुलिस कार्रवाई की यह जानकारी डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने रविवार को प्रेस-कॉन्फ्रेंस में दी। डीसीपी ने बताया कि सौरभ मिश्रा और गौरव मिश्रा ने मिलकर ये ठगी की है। ये मूलरूप से जयदेव पट्टी दरभंगा बिहार के निवासी हैं। शहर में भंगेल स्थित एमके एम अपार्टमेंट में रह रहे थे।
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गौरव पहले से ही जेल में है। इन दोनों ने मिलकर इको जैप स्मार्ट मोबिलिटी नाम से एक कंपनी खोली थी। इस कंपनी का कार्यालय भंगेल स्थित चैतन्य बिल्डिंग में बनाया था। डीसीपी ने बताया कि ये लोग ई स्कूटी के नाम पर लोगों को बताते थे कि आपके नाम पर एक स्कूटी 85 हजार की खरीदी जाएगी। तीन साल तक स्कूटी चलाएंगे जिसके एवज में प्रति माह 7 हजार रुपये दिए जाएंगे, और तीन साल बात स्कूटी आपको वापस कर दी जाएगी। अगर स्कूटी वापस नहीं लेना चाहते हैं तो आगे भी प्रति महीने 7 हजार रुपये कंपनी देगी। शुरुआत में कुछ लोगों ने झांसे में आकर रकम लगाई। इनको आरोपियों ने महीने में 7 हजार रुपये देना भी शुरू किया। इसके बाद इसका प्रचार-प्रसार हुआ और निवेशकों की संख्या बढ़ गई। इसके बाद यह कंपनी का दफ्तर बंद कर भाग गए थे।
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पीड़ितों की शिकायतें फेज-2 थाना पुलिस के पास पहुंची। शुरुआती जांच के बाद आरोपी सौरभ को गिरफ्तार किया गया। डीसीपी ने बताया कि आरोपी इतने शातिर तरीके से लोगों को फंसाते थे कि शिकायतकर्ता को यह आभास तक नहीं होता था कि वह एक सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है। आरोपियों के कई खातों की जानकारी मिली है जिनमें रकम फ्रीज करवाई गई है। इंजीनियर ने बनाई थी ठग कंपनी, भाई संभाल रहा था : पुलिस के मुताबिक ठगी की इस कंपनी की पूरी रुपरेखा गौरव ने बनाई थी। गौरव ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया हुआ है। पिछले महीने उसे साइबर अपराध से जुड़ी एक प्राथमिकी जांच में गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उसका भाई सौरभ जो कि 10 वीं पास है इस कंपनी को संभाल रहा था। पुलिस का कहना है कि इन दोनों आरोपियों की मां की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है।


सोशल मीडिया पर पोस्ट करने थे विज्ञापन: 
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने लोगों को फंसाने के लिए कई तरह से विज्ञापन जारी किए थे। हर दिन सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर विज्ञापन जारी किए जाते थे। इसके अलावा पोस्टर भी लगवाए थे। विज्ञापन में अधिक मुनाफे की बात देखकर लोगों ने निवेश करना शुरू कर दिया। निवेशकों से गौरव रुपये तो ले लिया करता था लेकिन ई स्कूटी खरीदने के बजाय रुपये अन्य काम में लगाया दिया करता था।

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