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Delhi NCR News: केवल गैर-शिक्षण स्टाफ के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू होने से कर्मचारी संघ नाराज
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डीयू में बायोमेट्रिक विवाद : कुलपति को पत्र लिखकर वापस लेने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में केवल गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ (डुक्कू) ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कुलपति को पत्र लिखा है और 18 नवंबर 2025 की अधिसूचना तुरंत वापस लेने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बायोमेट्रिक प्रणाली पहले से ही गैर-शिक्षण कर्मचारियों के द्वारा नियमित रूप से इस्तेमाल की जा रही है। इसके बावजूद नई अधिसूचना में यह व्यवस्था सिर्फ गैर-शिक्षण स्टाफ के लिए अनिवार्य की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष फैल गया है।
वहीं, डुक्कू का कहना है कि यह फैसला चयनात्मक और भेदभावपूर्ण है, क्योंकि शिक्षण कर्मचारियों पर अब तक किसी भी प्रकार की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू नहीं की गई है। संघ ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारी समान वेतनभोगी हैं, इसलिए उपस्थिति का नियम भी सभी के लिए समान होना चाहिए। संघ ने कुलपति से मांग की है कि बायोमेट्रिक सिस्टम सभी कर्मचारियों पर एक समान लागू किया जाए। साथ ही, जब तक न्यायसंगत व्यवस्था न बन जाए, नई अधिसूचना वापस ली जाए। संघ का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के मनोबल, पारदर्शिता और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में केवल गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ (डुक्कू) ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कुलपति को पत्र लिखा है और 18 नवंबर 2025 की अधिसूचना तुरंत वापस लेने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बायोमेट्रिक प्रणाली पहले से ही गैर-शिक्षण कर्मचारियों के द्वारा नियमित रूप से इस्तेमाल की जा रही है। इसके बावजूद नई अधिसूचना में यह व्यवस्था सिर्फ गैर-शिक्षण स्टाफ के लिए अनिवार्य की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष फैल गया है।
वहीं, डुक्कू का कहना है कि यह फैसला चयनात्मक और भेदभावपूर्ण है, क्योंकि शिक्षण कर्मचारियों पर अब तक किसी भी प्रकार की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू नहीं की गई है। संघ ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारी समान वेतनभोगी हैं, इसलिए उपस्थिति का नियम भी सभी के लिए समान होना चाहिए। संघ ने कुलपति से मांग की है कि बायोमेट्रिक सिस्टम सभी कर्मचारियों पर एक समान लागू किया जाए। साथ ही, जब तक न्यायसंगत व्यवस्था न बन जाए, नई अधिसूचना वापस ली जाए। संघ का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के मनोबल, पारदर्शिता और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
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