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कूड़े का पहाड़ ढहने से हुई थी 2 लोगों की मौत, परिजनों को मिलेगा एक-एक लाख का मुआवजा

Sun, 03 Sep 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 03 Sep 2017 09:19 AM IST
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edmc gives compensation of rs 1 lakh of kins who lost life in ghazipur landfill collapse
लैंडफिल हादसे में मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचीं ईडीएमसी मेयर।

दिल्ली के गाजीपुर सेनेटरी लैंडफिल हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतकों के परिजनों को पूर्वी दिल्ली नगर निगम एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देगी। 

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शनिवार को यह घोषणा पूर्वी दिल्ली नगर निगम की मेयर नीमा भगत ने की। उन्होंने गाजीपुर सेनेटरी लैंडफिल हादसे में जान गंवाने वाले दोनों लोगों के परिजनों से शनिवार को मुलाकात के दौरान मुआवजा देने का ऐलान किया। शुक्रवार को लैंडफिल 
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सड़क बनाने में होगा लैंडफिल साइट के कूड़े का इस्तेमाल
लैंडफिल साइट पर हुए हादसे के बाद अब तय किया गया है कि इस साइट को कूड़ा मुक्त किया जाए। आगामी नवंबर से साइट से कूड़ा उठाकर उसका प्रयोग सड़क बनाने के लिए किया जाएगा और अगले दो वर्षो में इस साइट को खाली कर दिया जाएगा। 
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एलजी की मीटिंग में हुआ फैसला
उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इतना ही नहीं, लोगों की सुरक्षा के ध्यानार्थ घटना स्थल वाली सड़क को भी अस्थाई रूप से बंद कर करने का निर्देश दिया गया है।      
  
अब वैकल्पिक तौर पर भलस्वा में डलेगा कूड़ा
उधर, पूर्वी दिल्ली में कोई वैकल्पिक जगह नहीं होने पर नगर निगम ने भलस्वा सेनेटरी लैंडफिल में कूड़ा डालने का निर्णय लिया है। मजेदार बात यह है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के इस सेनेटरी लैंडफिल की स्थिति गाजीपुर सेनेटरी लैंडफिल से कम नहीं है। 

पांच साल पहले ही कूड़े से भर चुका है भलस्वा

edmc gives compensation of rs 1 lakh of kins who lost life in ghazipur landfill collapse
ghazipur landfill collapse

यह सेनेटरी लैंडफिल भी समय से करीब पांच साल पहले वर्ष 2002 में कूड़े से भर चुका है और उसमें अभी भी कूड़ा डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, इस सेनेटरी लैंडफिल में भी गैस बनने के चलते निरंतर आग लगने की घटनाएं होती रहती है। यहां पर पूर्वी दिल्ली का करीब ढाई हजार मीट्रिक टन कूड़ा आने के डालने के बाद स्थिति भवाह होने से इंकार नहीं किया जा सकता।       

करीब तीन दशक पहले बनाए गए भलस्वा सेनेटरी लैंडफिल के वर्ष 2007 तक कूड़े से भरने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन यह सेनेटरी लैंडफिल इस अवधि से पांच साल पहले ही कूड़े से भर गया था। इसके बावजूद इस सेनेटरी लैंडफिल में कूड़ा डालने का सिलसिला जारी रहा। 

लिहाजा गाजीपुर सेनेटरी लैंडफिल में कूड़े के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बन गए। इसके चलते स्थानीय लोग पिछले तीन साल से इस सेनेटरी लैंडफिल को बंद करके विकसित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है।

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