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डूसू चुनाव: आपसी कलह और बगावत ने खुलने ही नहीं दिया एनएसयूआई का खाता, निर्दलीय दीपांशु की जीत ने दिखाया आईना
Sun, 20 Sep 2026 04:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 20 Sep 2026 04:12 AM IST
सार
सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर हुआ, जहां एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज कर संगठन को बड़ा झटका दिया।
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डूसू के नए उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में चारों केंद्रीय सीटों पर वापसी की कोशिश कर रही एनएसयूआई का चुनावी गणित आपसी कलह और बगावत ने बिगाड़ दिया। टिकट बंटवारे से नाराज दावेदारों के मैदान में उतरने का सीधा असर संगठन के प्रत्याशियों पर पड़ा। नतीजा यह रहा कि एनएसयूआई एक भी केंद्रीय सीट अपने नाम नहीं कर सकी। सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर हुआ, जहां एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज कर संगठन को बड़ा झटका दिया।
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शौकीन ने एबीवीपी के ईशू मौर्य को हराया। ईशू को 16,910 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई के अधिकृत प्रत्याशी वीर चतरथ को महज 4,314 वोट मिले। वीर को मिले वोट इस सीट पर नोटा से भी कम रहे। यानी जिस दावेदार को संगठन ने टिकट नहीं दिया, उसी ने संगठन के अधिकृत प्रत्याशी से कई गुना अधिक वोट हासिल कर केंद्रीय पैनल की एक सीट अपने नाम कर ली।
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जातीय समीकरण नहीं साध पाई
अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने राजस्थान के मीणा समुदाय से विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारकर डूसू चुनाव में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले जाट-गुर्जर समीकरण को चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि नतीजों में जातीय समीकरण का असर फिर दिखाई दिया। जाट उम्मीदवार यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दसंयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के राजपूत समुदाय से आने वाले लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उन्होंने एनएसयूआई के बागी विशेष यादव को हराया।
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अंदरूनी खींचतान से नुकसान
चुनाव परिणामों के बाद एनएसयूआई भी मान रही है कि संगठन की अंदरूनी खींचतान का फायदा एबीवीपी को मिला। चुनाव से पहले दीपांशु शौकीन, विशेष यादव और समर्थ बेनीवाल समेत कई दावेदारों की टिकट को लेकर नाराजगी सामने आई थी। एनएसयूआई के अनुसार, दीपांशु को अध्यक्ष पद का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यश डबास के सामने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। वह उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन संगठन ने उनकी जगह वीर चतरथ को टिकट दिया।
नोटा ने बिगाड़ा जीत का समीकरण
डूसू चुनाव में नोटा ने कई प्रमुख सीटों के चुनावी गणित पर असर डालने की संभावनाएं पैदा की हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर कुल 23,942 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना। इन सभी सीटों पर नोटा को मिले मत विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच जीत के अंतर से अधिक रहे।