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Delhi NCR News: विशेष मौके ने दिला दी स्नातकोत्तर की डिग्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Feb 2024 06:57 PM IST
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विशेष मौके ने दिला दी स्नातकोत्तर की डिग्री
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- नौ साल बाद डिग्री मिलना सपने जैसा, छोड़ दी थी उम्मीद

- वर्ष 2015 में एमए सांख्यिकी का एक पेपर रह गया था

- डिग्री पूरा करने के मौके के लिए अस्पताल के बेड से पढ़ाई पूरी की

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। डीयू के शताब्दी वर्ष में डिग्री पूरा करने के अवसर ने कई छात्रों के सपने को पूरा किया है। इस विशेष मौके से नौकरी कर रही एक पूर्व छात्रा को शनिवार को स्नातकोत्तर की डिग्री मिल गई। नौ साल बाद डिग्री मिलना उनके लिए सपने जैसा रहा। इस विशेष अवसर के तहत पेपर देने के लिए इस पूर्व छात्रा ने अस्पताल के बिस्तर से अपनी पढ़ाई की।

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने अपने शताब्दी वर्ष के तहत पूर्व छात्रों को अपनी डिग्री पूरा करने का अवसर दिया था। इस अवसर के तहत उन्हें परीक्षा देनी थी। 2013-15 में किरोड़ीमल कॉलेज से एमए सांख्यिकी की पढ़ाई करने वाली वृंदा गुप्ता ने बताया कि उनका स्नातकोत्तर 2015 में पूरा होना था, लेकिन उनका एक पेपर रह गया थाा। इस कारण से वह स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त नहीं कर सकी। बीते साल उन्होंने डीयू के शताब्दी वर्ष में डिग्री पूरे करने के अवसर के तहत पेपर दिया। इस पेपर के पास नहीं होने के कारण उन्हें बेहतर जॉब अवसर मिलने में दिक्कत आ रही थी। हर जगह स्नातकोत्तर की डिग्री मांगी जाती थी।
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वर्तमान में वृंदा हैदराबाद की एक सीए फर्म में कार्यरत हैं। वह हैदराबाद से ही परीक्षा देने के लिए पहुंची थी उस दौरान वह बीमार पड़ गई जिस कारण से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल से ही उन्होंने परीक्षा की तैयारी की और पेपर दिया। परीक्षा पास करने के बाद अब 100वें दीक्षांत समारोह में उन्हें डिग्री मिली। यह सब उन्हें सपने जैसा लग रहा है। वह कहती हैं कि डिग्री मिलने से उन्हें बेहतर जॉब के अवसर मिलेंगे।
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नाम के आगे डॉ. लगाने के लिए नौकरी छोड़ की पीएचडी

नाम के आगे डॉ. लगाने की ऐसी ललक रही कि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की नौकरी छोड़ कर पीएचडी पूरी कर ली। इस सपने को डीयू की पूर्व छात्रा दीपिका देशवाल ने पूरा किया है। दीपिका के मुताबिक कि उनका सपना था कि उनके नाम के आगे डॉ. लगना चाहिए। इस कारण से उन्होंने पीएचडी में दाखिला लिया था। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल भी डीयू से ही की थी। उन्होंने जेआरएफ में भी टॉप किया। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2022 में फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया था।


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एमबीए में प्राप्त किया गोल्ड मेडल

डीयू के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस) से एमबीए करना प्रतिष्ठा की बात होती है। ऐसा एमबीए में गोल्ड मेडल जीतने वाले परमजीत सिंह ने कर दिखाया है। डीयू के 100वें दीक्षांत समारोह में उन्हें एमबीए में टॉप करने के लिए गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। वह 2021-23 के टॉपर रहे हैं। आईपीयू से मैकैनिकल इंजीनियरिंग कर चुके परमजीत सिंह ने कहा कि एमबीए करना चाहते थे। आईआईएम की अधिक फीस के कारण वहां दाखिला नहीं ले सके तो एफएमएस के एमबीए में दाखिला लिया। अपनी काबलियत पर भरोसा था इसलिए लगता था कि टॉप तो कर ही जाऊंगा। ॉ
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