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सीवीओ विवाद: डॉ. हर्षवर्धन ने क्यों बोला इतना बड़ा झूठ?

Fri, 26 Sep 2014 01:38 AM IST
Updated Fri, 26 Sep 2014 01:38 AM IST
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dr harshvardhan tells wrong facts on aiims cvo case.

संजीव चतुर्वेदी को जब एम्स का चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) नियुक्ति किया गया था, उसके डेढ़ माह के बाद ही उन्हें पद से हटाने की कवायद शुरू हो गई थी। हालांकि उस समय सिविल सर्विसेज बोर्ड की पहल और आपत्ति के बाद उनके स्थानांतरण के प्रस्ताव को रोक दिया गया था।

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मिले दस्तावेज से स्पष्ट है कि तमाम प्रक्रिया के बाद 29 जून-2012 को संजीव चतुर्वेदी सीवीओ बने और 7 जुलाई-2012 को उन्हें आयुष विभाग में स्थानांतरण के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया।
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उसके बाद इस पर सिविल सर्विसेज बोर्ड ने सवाल उठाए, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सेक्रेट्री कर रहे थे। उनके स्थानांतरण के मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय से सवाल किए गए। तब सात जनवरी-2013 को स्वास्थ्य सचिव ने लिखित तौर पर कहा था कि संजीव चतुर्वेदी के स्थानांतरण के प्रस्ताव को रोक दिया गया है।

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दस्तावेजों से खुली पूरे मामले की पोल

dr harshvardhan tells wrong facts on aiims cvo case.

बता दें कि सीवीओ को पद से हटाए जाने के बाद केंद्रीय स्वास्‍थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा था कि संजीव चतुर्वेदी की नियु‌क्ति अवैध है क्योंकि इसके लिए सीवीसी से अनु‌मति नहीं ली गई। जबकि अब इस मामले में जो खुलासा हुआ है वह काफी चौंकाने वाला है।

स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग से मिले कुछ दस्तावेज से यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने एम्स के सीवीओ के तौर पर संजीव चतुर्वेदी के नाम का न तो विरोध किया और न ही नियुक्ति को गलत बताया।

इस बात का खुलासा पहले ही हो चुका है कि सीवीओं को हटाने के पीछे भाजपा नेता जेपी नड्डा की भूमिका सबसे ज्यादा थी। उन्होंने ही स्वास्‍थ्य मंत्री को पत्र लिखकर संजीव को हटाने की मांग की थी। इसके पीछे वजह यह भी सामने आई है कि वो संजीव के स्‍थान पर अपने पसंद के व्यक्ति को सीवीओ बनाना चाहते थे।

सीवीसी की लिस्ट में नहीं है एम्स

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केंद्रीय सतर्कता आयोग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से सीवीओ के पद के नाम और पांच वर्ष का विजिलेंस क्लीयरेंस जरूर मांगा था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो सूची सीवीसी को सौंपी, उसमें दोनों बार संजीव चतुर्वेदी का नाम था।

मौजूद दस्तावेज से यह भी स्पष्ट है कि सीवीसी ने 3 सितंबर, 2012 और 13 फरवरी, 2013 को पत्र लिखा था, लेकिन किसी भी पत्र में संजीव चतुर्वेदी के नाम को रिजेक्ट नहीं किया था।

सूत्रों का कहना है कि देश में 100 ऐसे सरकारी संस्थान और विभाग हैं जहां सीवीओ नियुक्त करने के पहले सीवीसी की अनुमति अनिवार्य है, इस सूची में एम्स का नाम नहीं है।

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