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बजट में चंदे के प्रावधान ने नेताओं का किया मूड ऑफ, जानिए क्यों

Thu, 02 Feb 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Thu, 02 Feb 2017 12:19 AM IST
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donation arrangements to political parties in budget and its critics

नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने राजनैतिक पार्टियों को दूसरा बड़ा झटका दिया है जब पार्टी में चंदे को लेकर कैश की सीमा केवल दो हजार कर दी है। अब ऐसी पार्टियां हासिए पर आ गई हैं जो टिकट देने के नाम पर पार्टी करोड़ों रुपये का चंदे के नाम नकद में ले लेती थी। मगर अब नकदी में केवल दो हजार रुपये तक ही चंदा दे सकेंगे और बाकी रकम जो देनी होगी वह चेक या फिर डिजिटल से देनी होगी। अमर उजाला ने राजनैतिक पार्टियों के नेताओं से बातचीत की।

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भाजपा देश की बड़ी पार्टी है और राजनीतिक फंड भी उसी के पास है।  नोटबंदी के बाद अपना कालाधन कैश कर लिया है। भाजपा सोच रही है कि दूसरी  पार्टियों नोट बांटकर चुनाव जीतती हैं इसलिए वह तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर रही हैं। मगर भाजपा को सोचना होगा कि यूपी में सपा सरकार काम के कारण आई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने काम किए हैं तो ही सरकार आई थी और पांच साल में 15 साल का विकास किया है। भाजपा को यह जानना होगा कि सरकारें काम से बनती,  चंदे से नहीं।-नरेंद्र सिंह भाटी, एमएलसी एवं पूर्व मंत्री सपा
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समाजवादी पार्टी को पहले भी कोई परेशानी नहीं थी और आज भी कोई दिक्कत नहीं है। जो बजट पेश कर रहे हैं वह स्वयं देखें और अपने चंदे की जानकारी सार्वजनिक करें कि उनका चंदा कितना चेक से आया है। समाजवादी पार्टी ने ईमानदारी से पहले से ही सिस्टम शुरू कर रखा है इसमें उन्हें कोई परेशान नहीं है। और वह इस तरह के कदम की निंदा करते हैं जो दूसरों को गलत समझ रहे हैं और अपने आप को ईमानदार घोषित करने पर तुले हैं।-सुरेंद्र सिंह नागर, राज्यसभा सांसद व सपा के राष्ट्रीय महासचिव

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चंदे की व्यवस्था पर कसी नकेल

donation arrangements to political parties in budget and its critics
budget - फोटो : amar ujala
केंद्र सरकार की ओर से जो बजट पेश किया हैस वह बेहद सराहनीय है। बजट में किसान, मजदूर से लेकर आम आदमी और युवाओं तथा शिक्षा पर सुधार के लिए काम किया है। कांग्रेस, बसपा और सपा में कालेधन को पार्टियों में चंदा देकर काम किए जा रहे थे।

भाजपा ने कालेधन को रोकने के लिए चंदे की व्यवस्था पर नकेल कसी है। चूंकि कई-कई करोड़ रुपये नकद दिए जाते रहे हैं अब उन पार्टियों द्वारा नकदी नहीं ली जा सकेगी।- डॉ.महेश शर्मा, गौतमबुद्धनगर के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री भाजपा

अभी तक पार्टियों में चंदे को लेने-देने की छूट दी थी कि कोई कितना भी कालाधन दे सकता था। मगर अब चंदे के रूप में पारदर्शिता आएगी और सही लोग सफेद राशि ही पार्टी फंड में दे सकेंगे। केंद्रीय सरकार का चंदे को लेकर यह एतिहासिक निर्णय है और स्वागत योग्य है।-नवाब सिंह नागर, पूर्व मंत्री भाजपा

भाजपा यूपी में बुरी तरह हार रही है और बौखलाहट में कभी नोट बंद कर देती है तो अब चंदे पर रोक लगा रही है। भाजपा की ऐसी नीतियों से यूपी में उसकी सरकार नहीं बनेगी। रही चंदे की बात तो इस काम को तो बहुजन समाजवादी पार्टी पहले ही कर चुकी है। पार्टी फंड में जो भी कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता चंदा देता था वह चेक से ही देता है। इसे बसपा को कोई परेशानी नहीं है।- सतीश अवाना, पूर्व मंत्री बसपा
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