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मनन-दिशा को मिला नया जीवन: डॉक्टरों ने की अल्मोड़ा के भाई-बहन की दुर्लभ सर्जरी, सबसे महत्वपूर्ण अंग में थे ट्यूमर

Mon, 04 Jul 2022 09:22 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 04 Jul 2022 09:22 PM IST
सार

आठ वर्षीय मनन जोशी के बाएं एड्रिनल ग्लैंड में 4.5 सेंमी के आकार का एक बड़ा ट्यूमर पाया गया। वहीं, उसकी बहन दिशा के शरीर में भी दो ट्यूमर पाए गए। बड़ा ट्यूमर दाएं एड्रिनल ग्लैंड में 5.5 सेंमी का और दूसरा ट्यूमर बाएं एड्रिनल ग्लैंड में 2.5 सेंमी का मिला है।

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Doctors of Delhi s Sir Ganga Hospital performed a rare surgery and saved lives of two children
ऑपरेशन के बाद मनन और दिशा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भाई-बहन की दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में सर्जरी कर डॉक्टरों ने शरीर से तीन ट्यूमर निकाले हैं। ट्यूमर दोनों बच्चों के एड्रिनल ग्लैंड में मौजूद थे। इस वजह से दोनों भाई-बहनों को उच्च रक्त-चाप, मस्तिष्क में दौरे समेत विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अध्ययन में पता चला है कि दोनों भाई-बहन वीएचएल सिंड्रोम से पीड़ित थे, जिससे पूरे शरीर में ट्यूमर बन सकता है।

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अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, आठ वर्षीय मनन जोशी के बाएं एड्रिनल ग्लैंड में 4.5 सेंमी का एक बड़ा ट्यूमर पाया गया। वहीं, उसकी 15 वर्षीय बहन दिशा के शरीर में भी दो ट्यूमर पाए गए। बड़ा ट्यूमर(5.5 सेंमी) दाएं एड्रिनल ग्लैंड में और दूसरा ट्यूमर बाएं एड्रिनल ग्लैंड में 2.5 सेंमी का मिला। दोनों बच्चों का ऑपरेशन करने वाले डॉ. अश्विन माल्या के अनुसार, इस जटिल सर्जरी को करने से पहले शुरुआती चुनौती भाई-बहनों के उच्च रक्त-चाप को स्थिर करने की थी।

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टीम ने ट्यूमर को हटाने और एड्रिनल ग्लैंड के सामान्य हिस्से को बचाने की योजना बनाई, क्योंकि एड्रिनल ग्लैंड हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं। ये स्टेरॉयड का निर्माण करते हैं और रक्त-चाप को सामान्य बनाए रखते हैं। टीम ने इसे मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का उपयोग करके की-होल सर्जरी द्वारा ठीक किया।

यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक, ट्यूमर का एड्रिनल ग्लैंड में अति कठिन जगह में स्थित होने के कारण उसे ऑपरेट करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। ये ग्लैंड छोटे और त्रिकोणीय आकार के होते हैं, जो दोनों किडनी (गुर्दों) के ऊपर स्थित होते हैं। ये प्रमुख रक्त धमनियों के बहुत ही नजदीक स्थित होते हैं, जो ऑपरेशन के दौरान रक्त-चाप एवं हृदय गति में उतार-चढ़ाव होने की वजह से जीवन के लिए बहुत अधिक खतरा भी पैदा कर सकते हैं। बाएं एड्रिनल ट्यूमर को हटाने के लिए मनन की दो घंटे की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50 मिली खून की क्षति के साथ उसके ट्यूमर को हटा दिया गया और सामान्य एड्रिनल ग्लैंड को बचा लिया गया।

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वहीं, दिशा का रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। उसकी दाहिनी एड्रिनल ग्लैंड में स्थित 5.5 सेंमी वाले ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया गया। बाएं एड्रिनल ग्लैंड में स्थित 2.5 सेंमी वाले ट्यूमर को सामान्य ग्लैंड से अधिक से अधिक हटा दिया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, भाई-बहनों के जेनेटिक अध्ययन से एक दुर्लभ पारिवारिक ट्यूमर सिंड्रोम का पता चला है, जिसे वीएचएल सिंड्रोम कहा जाता है। यह दुर्लभ सिंड्रोम पूरे शरीर में ट्यूमर बना सकता है।

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